Wednesday, May 22, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – हम यात्रा में हैंं

यात्राएं जीवन को समृद्ध करती हैं। इंसान जितनी अधिक यात्राएं करता है, और जितनी प्रकार की यात्राओं पर रहता है, उन सबकी छाप उसके पूरे व्यक्तित्व पर रहती है। यात्राओं का माध्यम और यात्रा के संगी-साथी इन अनुभवों में अलग-अलग अध्याय जोड़ते जाते हैं।
प्रत्येक यात्रा मन-मस्तिष्क में अविस्मरणीय स्मृतियों का खजाना जोड़ती है। मानव के अद्भुत निर्माण की गाथा, मानव इतिहास के समान पुरातन है। मगर उससे अधिक चकित करने वाली रचना, प्रकृति ने युगों से कर रखी है। पशु-पक्षियों की दुनिया, प्रकृति के नज़ारे, पेड़-पौधे, वनस्पतियाँ और इन सबके बीच बसा मानव। हर दृश्य हैरान करता-सा, हर दृश्य चकित करता हुआ। यह सब जिस राही ने जितना अपने हिस्से में जोड़ा, उसका जीवन और समृद्ध हो गया।
यात्राओं से मिलने वाले अनुभव, पुस्तकों से मिलने वाले ज्ञान से बहुत अलग और कहीं अधिक मूल्यवान होते हैं। किसी ओर की यात्राओं के अनुभव पढ़ते-सुनते हुए आप एक अनदेखी दुनिया की कल्पना में गोते लगा लेते हैं। यह तब है जब आप उस दुनिया के साक्षी नहीं है। जरा सोचिए कि जब आप ख़ुद अपने लिए, ख़ुद का अनुभव संसार रचने निकलेंगे तब कैसा होगा।
एक बात याद रखें कि प्रकृति निरंतरता का संदेश देती है। नदी, हवा और जीवन, सब चलायमान है। हम गतिशील वायुमंडल का हिस्सा हैं। हर क्षण नवसृजन के दौर से होते हुए, हम सदियों से बदलाव के दौर में हैं। यहाँ जिसने, जितना अनुभव अपने हिस्से में जोड़ लिया, उसने स्वयं को उतना अधिक समृद्ध कर लिया। उतना अधिक प्रकृतिमय बना लिया। यात्राएं जीवन को सार्थक करती हैं इसीलिए आप भी समय मिलते ही अपने जीवन की सार्थकता तलाशने का अभियान शुरू कर दें।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - yvandana184@gmail.com
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