बालकृष्ण गुप्ता गुरु की तीन लघुकथाएँ

1 - परछाईं सीमा की ओर प्रस्थान करने को आतुर फौजी पिता की गोद में चढ़ते हुए बेटे ने कहा, ‘पापा, मैं भी आपके साथ जाऊंगा।’ ‘नहीं बेटे नहीं। अभी तुम्हारे खेलने-खाने के दिन हैं।’ ‘पापा, मम्मी अपनी सहेलियों को बता रही थी, ‘आप दुश्मनों के...

डॉ. सपना दलवी की लघुकथा – झलकारी का सपना

सुबह उठते ही झलकारी दौड़ती हुई मां के पास आई और कुछ लजाते हुए मां के सामने खड़ी हो गई।उसको लजाते देख मां ने पूछा,क्या हुआ क्यों इतना लजा रही हो...? झलकारी मां के गले लगते हुए बोली,मां आज मैंने एक सपना देखा और...

डॉ. अनुज प्रभात की लघुकथा – उसूल

विद्यालय में जादू दिखाया जाना था ।सभी बच्चों को। पांच से दस पैसे देने थे । मैंने मां से कहा - " मां ! कल स्कूल में जादू दिखाया जायेगा । मुझे भी देखना है ... पैसे दो ।" मां उस वक़्त बर्तन मांज...

दिव्या शर्मा की लघुकथा – जलमेव जीवनम्

"टैंकर आ गया है…मैं पानी ले आती हूँ।तू अपना ध्यान रखिओ…।" कैन उठा कर घर से बाहर निकलते हुए सुखिया ने बहू को कहा। "माई...न जा,दर्द हो रहे हैं मुझे।" "झूठे दर्द हैं अभी, तुझे पता है न टैंकर चला गया तो क्या हाल होगा!…पानी रखा...

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – उम्रदराज

अपार्टमेंट के बेस्मेंट  में कतार में गाड़ियां खड़ी रहती हैं और उनमें से कुछ तो रोज जाती हैं और कुछ खड़ी हैं - साफ सफाई तो नौकर कर देते हैं लेकिन उनको निकलने का मौका नहीं मिलता है। सुबह हुई और सफेद गाड़ी का...

पूनम शर्मा पूर्णिमा की लघुकथा – बया

एक बया अपने नन्हे-नन्हे  बच्चों के साथ बड़ी-शान्ति से और प्रेम से अपने घोंसले में रहती थी । वह एक कुशल एवं व्यवस्थित गृहणी की भाॅंति जीवन-यापन करती थी । तल्लीनता से एक-एक तिनका बीनकर सुरक्षित नीड़ बनाना उसकी प्राथमिकता दी । उसके संतोषजनक...