रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – आहत

मिश्रा जी बगैर ये चिंता किए कि वह कुछ घंटे पहले पत्नी का अंतिम संस्कार करके आये है । तेजी से घर से निकल गये । घर के लोग चकित रह गये । वह सीधे कफन की दुकान पर गये और दुकानदार से बोले -...

सुनीता पाठक की दो लघुकथाएँ

बॉडी फ्रीज़र "पापा मम्मी, मुझे सब कुछ आपने दिया... इतनी अच्छी एजुकेशन, भरपूर प्यार दुलार और विदेश जाने का अवसर भी... अब जिंदगी में सिर्फ एक ही कमी खलती है कि मुझे आपसे दूर रहना पड़ रहा है.. लेकिन मैं भी क्या करूं..??? मेरे टैलेंट...

डॉ. अंजू लता सिंह की लघुकथा – पिघलता दुःख

सोनिया आज बेहद खुश नजर आ रही थी। सर्वश्रेष्ठ रैंक लेकर कोर्स भी पूरा कर लिया था उसने। आज पापा से जो मिलेगी स्वदेश जाकर..पूरे चार बरस के बाद। केदारनाथ की भीषण बाढ़ ने पूरे परिवार को  लील लिया था कुसमय में।बस वही बच गई थी...

हरदीप सबरवाल की दो लघुकथाएँ

 1- तटस्थ सदर की चौड़ी सड़क भी भीड़ के कारण किसी संकरी गली से महसूस हो रही थी, सवारियों को बिठाने की जद्दोजहद में ई-रिक्शा एक दूसरे के ऊपर चढ़े जा रहे थे। एक रिक्शा वाले ने चार सवारियां बैठा ली, वह रिक्शा निकालना चाहता...

अरमान नदीम की लघुकथा – बाज़ी पलट गयी

शहर से दूर राजपुर  नाम का एक गांव था । गांव के लोग बड़े सीधे, सच्चे और ईमानदार थे । गांव में सिर्फ एक ही दुकान थी जिसमें रोजमर्रा के सामान मिलते थे । दुकान का  मालिक  लालकृष्ण था, लेकिन गांव वाले उसे लाल...

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – सम्मान

उमर ने नेट से देखा कि नवरात्रि की पूजा में क्या क्या सामान लगता है और जाकर बाजार से खरीद लाया । वह बिन्दु के आने का इंतजार कर रहा था और समय है कि कट ही नहीं रहा था । वह आँखें बंद...