Monday, April 6, 2026
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रानी मोटवानी की लघुकथाएँ

1 – एक शाम
मीरा एक शाम अपने दफ्तर से टेक्सी में घर लौट रही थी। बहुत तेज़ बरसात हो रही थी।  टेक्सी सिग्नल पर रुकी तब सर से पांव तक भीगी हुई एक लड़की ने डरते डरते उससे लिफ्ट मांगी। उसने उस लडकी को टेक्सी में अंदर ले लिया। उसके हाथ में जर्नल और नोटबुक्स देख कर लग रहा था कि वह कॉलेज से लौट रही है। कुछ देर बाद बात शुरू करने के लिए लड़की से उसका नाम पूछा। लड़की सहम गई। उसकी आँखों में डर था। मीरा ने एक नज़र उसकी किताबों पर डाली तो पता चला उसका नाम सलमा है। इससे पहले कि कोई कुछ कहे, मीरा ने देखा उनकी टेक्सी के चार पांच गाडि़यों के आगे कुछ लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। भीड़ में लोगों के पास लाठियाँ और बंदूकें थी। वह लोग काफी गुस्से में थे। गाडि़यों में से मुसलमानों को बाहर निकाल रहे थे और उनको आगे जाने से रोक रहे थे। 
मीरा ने अपने पर्स में से बिंदी निकाली और सलमा को कहा कि माथे पर लगा लो। सलमा ने अचरज भरी निगाहों से उसे देखा । मीरा ने उससे कहा, “इससे तुम्हारा धर्म भ्रष्ट नहीं होगा लेकिन तुम्हारी जान ज़रूर बच जाएगी। इसे ब्यूटी स्पोट समझ कर लगा लो। उसने बिंदी मीरा से ले ली। 
जब हिंदुओं की टोली उन तक पहुंची तब मीरा के माथे पर और सलमा के माथे पर बिंदी चमक रही थी। खीड़की खुलवाकर जब टेक्सी में लोगों ने मीरा और सलमा को देखा तब दोनों को हिंदू समझ कर जाने दिया।
सलमा माहिम पर उतर गई। 
मीरा बांद्रा में जब टेक्सी से उतरी तब तेज़ हवा और भारी बरसात हो रही थी। मीरा ने टेक्सी से उतरकर छाता खोलने की कोशिश की लेकिन तेज़ हवा की वजह से दिक्कत हो रही थी। ड्राइवर ने तुरंत बाहर आकर छाता खोलने में मदद की। जब वह वापस जा रहा था तब वह अचानक मुड़ा, उसके चहरे पर हल्की सी मुस्कराहट थी। उसने कहा मेडम, मेरा नाम शाहिद है। मैंने भीड़ को आते देखा तब मैंने उनको रामजीकह दिया।
मुस्कराकर वह अपनी ड्राइविंग सीट पर बैठा और चल दिया।
2 – मां
उसने माँ  को ब्रश करने में मदद की और फिर धीरे धीरे चलाकर बैठक में लेकर आई। सोफा पर बैठाया। रसोई से गरम चाय का प्याला लेकर आई। कप में से प्लेट में चाय डालकर मां को पिलाने लगी। मां की चाय होने के बाद अपना कप ले आई। 
चाय पीते वक्त उसने मोबाइल उठाकर देखा। WhatsApp मां पर लिखी कविताएँ, कहानियों, से भरा हुआ था । WhatsApp.चिल्ला चिल्ला कर कह रह था आज मदर्स डे है। फेसबुक देखा। यहाँ भी बहुत से लोगों ने माँ के साथ अपनी तस्वीरें डाली थी । 
उसने देखा मालती ने अपनी माँ की फोटो के साथ एक लंबी चौड़ी कविता भी लिख डाली थी जब की उसने अपनी मां को वृद्धाश्रम में रखा था। आरती ने तो कमाल ही कर दिया था। उसने अपनी सास और मां दोनों की तस्वीर डाल कर लिखा था मेरी दो मां है। मेरी सास भी मेरी मां जैसी ही है जबकि उसने दोनों में से किसी का ख़याल नहीं रखा। दीपा ने मां के साथ बचपन की तस्वीर लगाकर लिखा था आज मैं जो भी हूँ इनकी वजह से हूँ लेकिन दीपा जिस का ज्यादातर वक्त कीटी पार्टी में गुज़रता है वह अपनी ग़रीब मां का ख़याल नहीं रखती।
फेसबुक पर इतनी सारी तस्वीरें, लेख, आलेख, कविताएं देख कर उसको समझ में नहीं आया कि मां और सासु मां इतनी अच्छी होती हैं तो हमारे देश में इतने वृद्धाश्रम क्यों हैं
उसने मोबाइल रख दिया और नाश्ता बनाने की तैयारी करने में जुट गई।
रानी मोटवानी
प्रकाशन : Kaynaat and other short stories ( कायनात एन्ड अधर शोर्ट स्टोरिस) किताब उर्दू से अंग्रेजी में अनुवाद.
You and other short stories   किताब हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद।
Reverberation of revenge
अनहद का नादकिताब का हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद।
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