भारत–रत्न अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक सफल राजनीतिज्ञ ही नहीं; बल्कि एक युगद्रष्टा कवि, सजग पत्रकार और कुशल प्रशासक भी थे। भारतीय राजनीति के ‘शिखर पुरुष‘ कहे जाने वाले वाजपेयी जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र–सेवा को समर्पित रहा। उनका मानना था कि लोकतंत्र की सफलता का आधार केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता को श्रेष्ठ शासन (सुशासन) प्रदान करना है। उनके इसी विज़न को सम्मान देने के लिए भारत सरकार प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिन (25 दिसम्बर) को ‘सुशासन दिवस‘ (Good Governance Day) के रूप में मनाती है। इस लेख के माध्यम से उनके सुशासन के बारे में उन्हीं महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं को जानने का प्रयास किया गया है।
सुशासन की अवधारणा : अटल दृष्टि
अटल जी के लिए सुशासन का अर्थ था—‘अंत्योदय’। यानी कि समाज के अन्तिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना। उन्होंने सत्ता को सुख का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनके अनुसार, सुशासन के चार मुख्य स्तम्भ थे–
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पारदर्शिता : सरकार के कार्यों में स्पष्टता।
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जवाबदेही : जनता के प्रति शासन का उत्तरदायित्व।
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सहभागिता : निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम नागरिक की भागीदारी।
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समानता : बिना भेदभाव के न्याय और अवसर की उपलब्धता।
