संपादकीय : डॉनल्ड ट्रंप के हाथ में उस्तरा 5

आज तक यही होता आया है कि अमरीका पूरे विश्व को लोकतन्त्र की नसीहतें देता रहा है। ईराक़, लीबिया, अफ़ग़ानिस्तान में सरकारें गिरा दी गयीं ताकि वहां लोकतन्त्र स्थापित किया जा सके। सद्दाम हुसैन और कर्नल गद्दाफ़ी को भयानक बेइज़्ज़ती के साथ मौत दी गयी। मगर दो सदी से भी पुराने लोकतन्त्र के मंदिर पर जिस प्रकार डोनॉल्ड ट्रंप के समर्थकों ने हमला किया वो किसी प्रकार की आतंकवादी कार्यवाही से कम नहीं था।

बचपन से एक कहावत सुनते आए थे – ‘बन्दर के हाथ में उस्तरा’। यानि कि किसी मूर्ख के हाथ में सत्ता नहीं आनी चाहिये वरना वह ऐसा नुक़्सान करेगा जिसकी भरपाई हो पाना संभव नहीं होगा। डॉनल्ड ट्रंप के हाथ वो उस्तरा चार साल पहले लग गया और उसने अमरीका की ऐसी फ़जीहत कर डाली कि वहां के लोकतन्त्र पर सवालिया निशान लग गये।
कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि कैपिटल हिल यानि कि वाशिंगटन में सत्ता के केन्द्र पर जनता हथियार लेकर चढ़ाई कर सकती है। मगर ट्रंप ने यह कर दिखाया और दुनिया को बता दिया कि उसकी सोच किसी अतिवादी से कम नहीं है। उसका लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं प्रक्रियाओं में कोई विश्वास नहीं है। चुनावों के नतीजों को वो मानता नहीं है।
आज तक यही होता आया है कि अमरीका पूरे विश्व को लोकतन्त्र की नसीहतें देता रहा है। ईराक़, लीबिया, अफ़ग़ानिस्तान में सरकारें गिरा दी गयीं ताकि वहां लोकतन्त्र स्थापित किया जा सके। सद्दाम हुसैन और कर्नल गद्दाफ़ी को भयानक बेइज़्ज़ती के साथ मौत दी गयी। मगर दो सदी से भी पुराने लोकतन्त्र के मंदिर पर जिस प्रकार डोनॉल्ड ट्रंप के समर्थकों ने हमला किया वो किसी प्रकार की आतंकवादी कार्यवाही से कम नहीं था।  

संपादकीय : डॉनल्ड ट्रंप के हाथ में उस्तरा 6

यह शायद विश्व का पहला राष्ट्रपति है जिसमें उसके अपने दल के सदस्यों का ही विश्वास नहीं बचा है। बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप के हजारों समर्थकों ने बुधवार को कैपिटल भवन (अमेरिकी संसद भवन) पर हमला किया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए।
इस घटना में कुछ लोग मारे भी गए। भारतीय मूल की अमेरिकी रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण से उनके समर्थकों के कैपिटल (संसद भवन) पर हमला करने के लिए भड़कने का दावा करते हुए इसकी निंदा की और कहा कि चुनाव बाद उनके आचरण की ‘इतिहास में निर्मम व्याख्या होगी 
ट्विटर ने इस हिंसा को देखते हुए अपने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म से डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट हमेशा के लिए बंद कर दिया है। ट्विटर के इस बैन पर ट्रंप ख़ासे तिलमिलाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके समर्थकों को चुप नहीं करवाया जा सकता। दुख की बात है कि जो आदमी कल तक दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में जाना जाता था, वही आज बेचारगी की स्थिति पर पहुंच गया है। 
अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि डॉनल्ड ट्रंप अब तक के अमरीका के सबसे अयोग्य राष्ट्रपति हैं। वहीं प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भीड़ को कैपिटल इमारत में घुसने के लिए भड़काने के मामले में ‘तत्काल’ इस्तीफा नहीं देते हैं तो सदन उन्हें हटाने के लिए महाभियोग लाने संबंधी प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ेगी।
पूरे विश्व में ट्रंप के आचरण और उनके समर्थकों की हिंसा पर प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ट्वीट में लिखा है, वाशिंगटन डी.सी. में हिंसा और उपद्रव की ख़बरों से उन्हें दुख पहुंचा है… सत्ता का ट्रांसफ़र सही और शांतिपूर्ण ढंग से होना ज़रूरी है। इस तरह के प्रदर्शनों के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है।” प्रधानमन्त्री के इस वक्तव्य पर भारतीय विपक्षी दलों की टिप्पणियां इस काबिल नहीं हैं कि उनकी चर्चा की जाए। 
ब्रिटिश प्रधानमंत्री बॉरिस जॉन्सन ने ट्वीट करके कहा है कि अमेरिका से जैसी ख़बरें आ रही हैं, वो चिंता बढ़ाने वाली हैं सभी को शांति से काम लेना चाहिए। उनके अलावा कनाडा के प्रधान मन्त्री जस्टिन ट्रूडो, ऑस्ट्रेलिया के  प्रधानमन्त्री स्कॉट मॉरिसन, न्यूजीलैंड की प्रधान मन्त्री जेसिंडा ने भी ट्विटर के ज़रिए अमेरिकी संसद पर हमले की निंदा की है। 
एक सवाल यह भी है कि ट्रंप जैसे अस्थिर दिमाग़ वाला व्यक्ति अगले ग्यारह दिनों में विश्व के सबसे शक्तिशाली देश का मुखिया बना रहता है तो क्या यह विश्व के लिये ख़तरा तो साबित नहीं होगा। 
अंत में एक मज़ेदार प्रतिक्रिया – भारत के केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा तीन नवंबर को हुए चुनाव के परिणाम में गड़बडी के प्रयासों के तहत अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग में की गई हिंसा के बाद ट्रंप को ‘रिपब्लिकन’ कहलाने का हक नहीं है। इससे हमारी रिपब्लिकन पार्टी की छवि धूमिल हो रही है।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

2 टिप्पणी

  1. सम्पादक पुरवई ,नमन
    जिस घटना ने दुनिया को ध्यानाकर्षित किया उसपर सम्पादकीय
    सारगर्भित है । भारत के विपक्षी दलों की टिप्पणियां चर्चा
    योग्य नहीं इस यथार्थ को कहने हेतु साधुवाद ।
    डॉ प्रभा मिश्रा

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