Sunday, August 9, 2026
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गुरदीप सिंह सोहल की पांच रचनाएं  

(1)
मेहनत का फल कब मिलेगा।
इस बात का न इंतजार कर।
धर्म कर्म करते ही जाना है।
अपने प्रयास पे एतबार कर।
लक्ष्य छोटा बड़ा नहीं होता।
इस बात का न आकार कर।
फल प्राप्त करने की चाह में।
बदन पर न अत्याचार कर।
जो भी फल मिलेगा सोहल।
स्वाद खुशी से स्वीकार कर।

(2)
बंद है दरवाजा इंतजार कर।
कभी तो खुलेगा एतबार कर।
दर्शन हो सकते हैं एक दिन।
मन को न अब बेकरार कर।
मेहनत का फल मीठा होगा।
ठण्ड रख सब्र हर बार कर।
आस पर दुनियां कायम है।
ख्वाब देख और साकार कर।
कण कण में रब्ब व्याप्त है।
कुदरत में उसका दीदार कर।
सोहल मन में तस्वीर बना।
पूरी दुनियां को आगार कर।

(3)
मुश्किल शब्द नहीं आते मुझे।
करता हूं मैं आसान कविता।
अपना ज्ञान है अपना ध्यान है।
करता हूं मैं बखान कविता।
समझ मे आ जाए सरलता से।
हो न जाए आसमान कविता।
गागर में सागर हो भाव सबका।
बन जाए गुणों की खान कविता।
मुश्किल शब्द भले नहीं लगते।
कर न पाए जब उड़ान कविता।
सोहल की कविता सरल रहे।
इतने में ही दे दे ज्ञान कविता।

(4)
मुंदरी छोड़ोगे या बाली छोड़ोगे।
वरना अपनी घरवाली छोड़ोगे।
सोना छोड़ोगे या चांदी छोड़ोगे।
बोलो तुम कब कंगाली छोड़ोगे।
दाल छोड़ोगे या सब्जी छोड़ोगे।
कहीं बीच अपनी थाली छोड़ोगे।
बाईक छोड़ोगे या कार छोड़ोगे।
नहीं तो सफर में साली छोड़ोगे।
घी छोड़ोगे या फिर तेल छोड़ोगे।
नाश्ते में चाय की प्याली छोड़ोगे।
अचार छोड़ोगे या चटनी छोड़ोगे।
हर बार महंगाई को गाली छोड़ोगे।
गैस छोड़ोगे या सिलेंडर छोड़ोगे।
रसोई में कढ़ाई काली छोड़ोगे।
मन की बात हो गई है सरकारी।
बहनो अब लबों की लाली छोड़ोगे।
बनवासी होने का मन बनालो।
कभी तो घर की रखवाली छोड़ोगे।
सोहल का जीना दुश्वार हो गया।
आप सब सांसों की पाली छोड़ोगे।

(5)
गली में कुत्ते मौहल्ले में गाय है।
हर जगह हर समय हाय हाय है।
रात भर कुत्ते क्यों रोते रहते हैं?
इस संकट का न कोई उपाय है।
गाय इधर उधर गोबर करती है।
पता नहीं किससे क्या खाय है?
गली गली में चारा मिल रहा है।
घर बैठे जनता पुण्य कमाय है।
गाय सब की नेशनल माता है।
लीडर चुनाव में रट्टा लगाय है।
33 करोड़ देवों का निवास है।
फिर भी बूचड़खानें में कटाय है।
गौशाला हर रोज बन रही है।
गौमाता की पूजा भी कराय है।
चैन से बंदा सो नहीं सकता है।
जब तब दोनो हमको रुलाय है।
सींग फंस जाते हैं जब कहीं भी।
सूझता नहीं कैसै उन्हें भगाय है।
इन सबका कोई समाधान नहीं।
सोहल बरसों से अर्जी लगाय है।

  • गुरदीप सिंह सोहल
    सेवानिवृत्त एएओ, पीडब्ल्यूडी, हनुमानगढ़ जंक्शन, राजस्थान

 

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