Wednesday, February 11, 2026
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कपिल कुमार की ग़ज़लें

1
चाँदनी गुमसुम-सी हो, सहमी हुई- सी रात हो
झिलमिलाती रोशनी में तारों की बारात हो
नाचती हों बदलियाँ , ज़ाहिर दिलों की बात हो
हों हँसी अठखेलियाँ, यूँ इश्क़ की शुरूआत हो
दिल के एहसासात को हम शायरी में कह उठे
रात भर गज़लों की,नज़्मों की ही बस बरसात हो
थरथराते लब करें इज़हार तुमसे प्यार का
उम्र भर भूले न दिल , इक ऐसी मुलाक़ात हो
और कुछ चाहे न हो मुझपे , मगर मेरे ख़ुदा !
हर किसी के वास्ते ही प्यार की सौग़ात हो
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2
मौसमे – नौ – बहार अच्छा था
सच में पहला वो प्यार अच्छा था
अब मिले तो कशिश ने दम तोड़ा
इससे तो इन्तिज़ार अच्छा था
दोस्त बनकर वो दूर जा बैठा
दुश्मनों में शुमार अच्छा था
याद रहती नहीं थी अपनी भी
इश्क़ का वो ख़ुमार अच्छा था
दिल की चाहत ने ख़ुदकुशी कर ली
इससे तो बेक़रार अच्छा था
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3
आपकी सादगी है बहुत पुरअसर
आपको लग न जाए किसी की नज़र
कामयाबी पे इतना न इतराइये
रंग जल्दी ही जाता है इसका उतर
चढ़के सर बोलती है सफलता यहाँ
जब ये उतरे तो लगता है जाएँगे मर
गम किसी से बिछड़ने का है इक अज़ाब
ये है वो रात जिसकी नहीं कोई सहर
आप औरों की खबरें तो रखेंगे क्या
आपको तो ख़ुद अपनी नहीं है ख़बर
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कपिल कुमार
बेल्जियम
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1 टिप्पणी

  1. तीनों गजल बेहद उम्दा
    बेहतरीन एक से।बढ़कर एक शेर
    Aap औरों की रखेंगे खबर क्या
    आपको तो अपनी ही नहीं है खबर

    दिल की चाहत में खुदकुशी करके
    इससे तो बेकरार अच्छा था

    और कुछ ना हो चाहे मुझ पर ए खुदा
    हर किसी के लिए मगर प्यार की सौगात हो

    आपकी गजल सहज सरल मगर भाव गहरे होते हेंकपिल सर बधाई

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