हाल ही में संसद के दोनों सत्रों से पारित,नारी वंदन अधिनियम तो अभी लागू होना शेष है,परंतु भारतीय साहित्य संसार में उसकी प्रतिच्छाया दिखलाई पढ़ने लगी है ।30 सितंबर सन 2023 को 13वां श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान, इस बार पहली बार महिला साहित्यकार सुश्री मधु कांकरिया जी को प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर विश्वनाथ त्रिपाठी और मृदुला गर्ग द्वारा एनसीयूआई सीरी फोर्ट के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
मूर्धन्य साहित्यकार स्वर्गीय श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में सन २०११ से यह पुरस्कार दिया जाता रहा है।यह सम्मान प्रतिवर्ष ऐसे साहित्यकार को दिया जाता है,जिन की रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं,सरोकारों आकांक्षाओं,संघर्षों को मुखरित किया गया हो।यूं भी यह पुरस्कार उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख संस्था इफको द्वारा दिया जाता है और यह संस्थान सहकारिता,कृषि और किसानों के लिए अपनी सतत सेवाओं और राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध है।इफको ने इस पुरस्कार के चयन हेतु एक समिति का गठन पहले से ही किया हुआ है,वर्तमान में जाने माने साहित्यकार प्रोफेसर असगर वजाहत की अध्यक्षता वाली इसी समिति के अन्य सदस्य सर्वश्री मुरली मनोहर प्रसाद सिंह डॉक्टर अनामिका, श्री प्रियदर्शन, श्री रविंद्र त्रिपाठी एवं श्री उत्कर्ष शुक्ला शामिल रहे।

इसी समिति ने निर्णायक मंडल की भूमिका में सुश्री मधु कांकरिया का चयन, हाशिए का समाज,भारत के बदलते यथार्थ पर केंद्रित उनके व्यापक एवं चर्चित साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया।यहपुरस्कार इस से पूर्व बारह अन्य साहित्यकारों को दिया जा चुका है,यथा श्री विद्यासागर नौटियाल श्री शेखर जोशी,श्री संजीव,श्री मिथिलेश्वर,श्री अष्टभुजा शुक्ल,श्री कमला कांत त्रिपाठी,श्री रामदेव धुरंधर,श्री रामधारी सिंह दिवाकर,श्री महेश कटारे,श्री रणेंद्र ,श्री शिव मूर्ति और श्री जय नंदन।सम्मानित साहित्य कार को एक प्रतीक चिन्ह प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपए की राशि का चेक दिया जाता है।
23 मार्च 1957 को कोलकाता में जन्मी मधु कांकरिया जी ने सात उपन्यास और बारह कहानी संग्रह सृजित किए हैं,इन उपन्यासों में पत्ता खोर,सेज पर संस्कृत,सूखते चिनार,ढलती सांझ का सूरज चर्चित रहे हैं।बीतते हुए ,,,और अंत में ईशु, चिड़िया ऐसे मरती है,भरी दोपहरी के अंधेरे,युद्ध और बुद्ध,जलकुंभी,नंदीग्राम के चूहे आदि उनके प्रमुख कहानी संग्रह हैं l बादलों में बारूद नाम से उन्होंने यात्रा वृतांत भी लिखा है।तेलुगू मराठी सहित कई भाषाओं में उनकी रचनाओं के अनुवाद हुए हैं।मानवीय त्रासदी के विविध पहलुओं की बारीक अभिव्यक्ति मधु कांकरिया के रचनाकर्म की विशिष्ट पहचान है।मानव कल्याण की भावना के साथ भी पिछले दो दशकों से लगातार लिख रही हैं। अनेक साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है।

इफको के प्रबंध निदेशक डॉक्टर उदय शंकर अवस्थी ने सुश्री मधु कांकरिया को बधाई देते हुए कहा कि मधु कांकरिया जी गहरी सामाजिक सरोकारों की रचनाकार हैं,उन्होंने वेश्या जीवन से लेकर युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी तक के व्यापक और चिंतनीय विषयों पर कुशलता के साथ अपनी लेखनी को चलाया है।डॉक्टर अवस्थी ने उनकी रचनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अपने कथा संसार में उन्होंने समय के क्रूर यथार्थ को पकड़ने की कोशिश की है। इसको के संयुक्त निदेशक श्री राकेश कपूर ने अपने उद्बोधन ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान के माध्यम से हमारा प्रयास रहता है कि हम ऐसे रचनाकारों को सामने लाएं और उन्हें सम्मानित करें। जिन्होंने खेती किसानी एवं गांव के जीवन को अपनी रचनाओं का विषय बनाया है उन्होंने मधु कांकरिया जी को बधाई देते हुए कहा कि मधु कांकरिया जी का रचनात्मक मां उनके गहरे सामाजिक बोध का प्रमाण है।
सम्मान चयन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर असगर वजाहत में चयन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सम्मान चयन समिति के सदस्य श्री प्रियदर्शन में प्रशस्ति पाठ किया और मधु कांकरिया जी की रचना धर्मिता पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी ने सुश्री मधु कांकरिया को सम्मानित करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके लेखन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि शोध परक लेखन के जरिए समाज के यथार्थ को मुखरित करने का काम जो मधु कांकरिया जी ने किया है वह अन्यत्र दुर्लभ है।डॉक्टर त्रिपाठी ने प्रसिद्ध आलोचक दिवंगत देवीशंकर अवस्थी जी को भी भावपूर्ण अंदाज़ में याद किया,ज्ञात हो कि स्वर्गीय देवीशंकर अवस्थी जी इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर उदय शंकर अवस्थी के बड़े भाई थे और दिल्ली विश्व विद्यालय के रामजस कॉलेज में पढ़ाया करते थे।

