कुछ लोग
चाँद की तरह होते हैं
जिन्हें देखकर ही
सुकून मिलता है
जिनके साथ रहकर
कुछ कहने कुछ सुनने की ज़रूरत
नहीं होती
जिनकी मौजूदगी
ठंडक का एहसास दिलाती है
कुछ पल के लिये ही सही
दिल में जलते हुए अंगारों को
शांत कर देती है
हाँ, चाँद की तरह होते हैं कुछ लोग जिनसे
बे-वज्’ह, बे-मतलब का
कोई रिश्ता होता है
जिनसे कोई उम्मीद कोई तलब नहीं होती
फिर भी
अनजानी सी उम्मीदों को
पूरा कर जाते हैं
दिल को कुछ सुकून, कुछ राहत दे जाते हैं।


*अनुराधा अत्रि की कविता – चाँद से कुछ लोग*
अनुराधा जी!
आपकी कविता बहुत-बहुत अच्छी लगी। वास्तव में जीवन में कुछ लोग ऐसे ही होते हैं,”चाँद की तरह” दूर रहते हैं और जिन्हें दूर से देखकर भी सुकून मिलता है। जिनकी मौजूदगी ठंडक देती है
कुछ लोग
चाँद की तरह होते हैं
जिन्हें देखकर ही
सुकून मिलता है
जिनके साथ रहकर
कुछ कहने कुछ सुनने की ज़रूरत
नहीं होती
जिनकी मौजूदगी
ठंडक का एहसास दिलाती है।
कविता छोटी जरूरी है, लेकिन बहुत प्यारी और महत्वपूर्ण है।
बहुत-बहुत बधाई आपको इस कविता के लिये ।
नीलिमा जी बहुत बहुत धन्यवाद