होमकवितामधु मेहता 'साथी' की कविता कविता मधु मेहता ‘साथी’ की कविता By Editor June 14, 2020 0 329 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp मधु मेहता ‘साथी’ आज तुम्हारे आने का यह ख़ौफ़ सभी के दिल में है कुदरत का यह आक्रोश अपने पूरे सुर में है । यह दौर, एक भयानक सन्नाटे का दौर है हर कोई आज क़ैद अपने घर में है। ज़िन्दगी की भाग दौड़ बस एक इशारे मे थम गई, मानवता आज अपने आप दिलों से जुड़ गई। घर में बैठे सब दुनिया के बारे मे सोच रहे, दीपक जला रहे और मिलकर ताली बजा रहे । मौत से न खिलवाड़ करो ज़िन्दगी को ज़िन्दगी रहने दो । बस करो अब बस करो इन्सान को ज़िन्दा रहने दो । Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखमधु अरोड़ा की कहानी – ‘….और दिन सार्थक हुआ’अगला लेखडॉ. तारा सिंह ‘अंशुल’ की कविता : मास आषाढ़ में पड़े फुहार Editor RELATED ARTICLES कविता गुरदीप सिंह सोहल की पांच रचनाएं August 8, 2026 कविता सन्तोष खन्ना की कविता ‘तलाश’ August 8, 2026 कविता डॉ नीलिमा पाण्डेय रचित गीतिका August 8, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 1, 2024 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संगीत वीडियो ‘मन जन गण मन गाएगा’ लोकार्पित August 8, 2026 ज्योत्सना सिंह की लघुकथा- मैनहोल August 8, 2026 भारत में आरक्षण व्यवस्था: ऐतिहासिक आवश्यकता, समकालीन चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा August 8, 2026 गुरदीप सिंह सोहल की पांच रचनाएं August 8, 2026 और अधिक लोड करें