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रश्मि लहर की कविता – प्रेम का चंदन ले आओ

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मृत्यु आ जाने से पहले, प्रेम का चंदन ले आओ।
क्षीण बाहें कांपती हैं, नेह आलिंगन ले आओ।।
पट रही है ये धरा अब, मानवी-निश्चेष्ट तन से,
खुल चुकी हैं मुट्ठियां भी, जो बंधी थीं क्षणिक धन से।
टूटती हैं तन शिराएं, सजग अभिनंदन ले आओ।
मृत्यु आ जाने से पहले, प्रेम का चंदन ले आओ।।
पवन में चीखें घुली हैं, घूरती बुझती चिताएं।
जन्म-जन्मांतर के साथी, पर कहां संग मिट भी पाएं।
भ्रमित स्वर-लहरी न भाए, गीत स्पंदन ले आओ।
मृत्यु आ जाने से पहले, प्रेम का चंदन ले आओ।
जागकर मधुरिम सवेरा, दे नहीं ऊर्जा रहा।
दु:ख कतारों में खड़ा, हर पीर को उलझा रहा।
जन्म लें कुछ नव-कथाएं, जागृति नंदन ले आओ।
मृत्यु आ जाने से पहले, प्रेम का चंदन ले आओ।

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