1- अपनी अनुपस्थिति से
अपनी अनुपस्थिति से
उपस्थित रहा
तुम्हारे ज़श्न में
और तुम्हें
लज्जित होने से
बचा पाया ।
अपने मौन से
भेज पाया
अपनी शुभकामनाएं
तुम्हारे लिए
प्रेम के कुछ अक्षत
तुम्हारी ज़िद्द को
बिना तोड़े ।
इसतरह
मिलता रहता हूँ
बिना मिले
कई सालों से
और
निभाता हूँ
कभी तुमसे
किया हुआ वादा ।
2 – क्योंकि वह जानता था
वह प्रश्न
किसी दर्द से गुजरे बिना
निरर्थकता की प्रतिष्ठा के लिए
अंत तक तटस्थ था ।
किसी भी सत्य को
वह झुठला सकता था
क्योंकि वह जानता था
कि सत्य
गढ़े जाते हैं
अनुभवों के आकाश में
दृष्टि की
कलम से ।
लेकिन उसकी तटस्थता
उसकी मज़बूरी थी
कोई आत्मबल नहीं
ये वो लोग हैं
जो झाँककर
अनुमान लगाते हैं
और चले जाते हैं
तटस्थ रूप में ।
3- लौटना
अगर लौट आऊँ
तुम्हारे पास
तो उपहार में
तुम्हें तकलीफ़ें दूँगा
फ़िर तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर में
मेरा मौन होगा
मेरा लौटना
क्या तुम्हारे लिये
यातनापूर्ण होगा ?
फ़िर
न लौटूँ तो !
बिडम्बना !!
मैं यातना और बिडम्बना के बीच
तुम्हें बचाना चाहता हूँ ।
तुम थोड़ी संभावनाएं तलाशो
वो खिड़की खोल दो जिससे
सुबह की धूप आती है
और वह छोटी काली बिंदी
लगाया करो
कि अच्छी लगोगी।

