Saturday, May 18, 2024
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डॉ मुक्ति शर्मा की कविता – नया साल

भूलकर पुराने गम
लगाएं नए साल को गले हम।
शायद छट जाएं दुखों के बादल
हम नहाएं खुशियों की फुहारों में
गिले-शिकवे मिटाकर कुछ नया
करने की सोचें।
दिमाग से सारे जहर को पोंछें।
नए साल पर कुछ हटकर सोचें।
क्यों ना..
इंसानियत की लौ जगाएं।
इस धरा को पवित्र बनाएं।
बुराइयों से दूर भागें
बुजुर्गों से प्रेम पाएं।
माता-पिता का साथ ना छोड़ें
यह संकल्प कर आगे बढ़ते जाएं।
भूलकर पुराने गम
नए साल को गले लगाएं हम।
नफरत में क्या रखा है ?
प्रेम ही प्रेम फैलाएं हम।
भूलकर पुराने गम
आओ सब
नए साल को गले लगाएं हम।
डॉ. मुक्ति शर्मा
डॉ. मुक्ति शर्मा
संपर्क - 9797780901
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