‘ईश्वर और विज्ञान’ अच्छी कविता है आपकी।
मानसिक शांति के लिये इंसान ने ईश्वर का सृजन किया। और जिनके हवाले ईश्वर को किया उन्होंने ही इंसान का जीवन नर्क बना दिया ।
फिर इंसान ने भौतिक सुख सुविधाओं के लिए विज्ञान का सर्जन किया, किंतु दोनों से ही उसे संतोष हासिल ना हुआ।
अति हर चीज की बुरी होती है शक्ति चाहे ईश्वर की हो या विज्ञान की उसकी अतिरिक्तता ने आम जीवन को नरक बना दिया।
कविता व्यंग्य करती है कि वास्तव में ताकत पागलपन में है और सारी इंसानियत वर्तमान में पागलों के हवाले हैं।
वर्तमान पर आक्षेप करती हुई बेहतरीन कविता के लिये आपको बधाई।
आदरणीय पांडेय सर!
‘ईश्वर और विज्ञान’ अच्छी कविता है आपकी।
मानसिक शांति के लिये इंसान ने ईश्वर का सृजन किया। और जिनके हवाले ईश्वर को किया उन्होंने ही इंसान का जीवन नर्क बना दिया ।
फिर इंसान ने भौतिक सुख सुविधाओं के लिए विज्ञान का सर्जन किया, किंतु दोनों से ही उसे संतोष हासिल ना हुआ।
अति हर चीज की बुरी होती है शक्ति चाहे ईश्वर की हो या विज्ञान की उसकी अतिरिक्तता ने आम जीवन को नरक बना दिया।
कविता व्यंग्य करती है कि वास्तव में ताकत पागलपन में है और सारी इंसानियत वर्तमान में पागलों के हवाले हैं।
वर्तमान पर आक्षेप करती हुई बेहतरीन कविता के लिये आपको बधाई।
बहुत अच्छी कविता