Monday, April 20, 2026
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हूबनाथ पांडेय की कविता – ईश्वर और विज्ञान

मानव ने
ईश्वर बनाया
ईश्वर की कहानियां गढ़ीं
किताबें और मूर्तियां गढ़ीं
और अपनी ज़िंदगी
ईश्वर के हवाले कर दी
फिर ईश्वर
जिनके हवाले था
उन्होंने मनुष्य का
जीना दूभर कर दिया
फिर मनुष्य ने
विज्ञान बनाया
प्रौद्योगिकी गढ़ीं
फिर सुविधाएं बढ़ीं
मनुष्य ने
अपनी बची हुई ज़िंदगी
विज्ञान के हवाले कर दी
विज्ञान जिनके हवाले था
ईश्वर जिनके हवाले था
दोनों ने मिलकर
इन्सान का जीवन
नर्क कर दिया
जबकि वे भी
इन्सान ही थे
फ़र्क सिर्फ़ इतना था
कि वे जान गए थे
कि न ईश्वर में शक्ति है
न विज्ञान में
शक्ति
सिर्फ़ पागलपन में है
अब पूरी इन्सानियत
पागलों के हवाले हैं
और ख़ुद को
कोस रही है
कि आखिर उसने
क्यों गढ़ा ईश्वर!
क्यों बनाया विज्ञान!!

हूबनाथ पांडेय, मुंबई
मोबाइल – +91 99690 16973
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2 टिप्पणी

  1. आदरणीय पांडेय सर!

    ‘ईश्वर और विज्ञान’ अच्छी कविता है आपकी।
    मानसिक शांति के लिये इंसान ने ईश्वर का सृजन किया। और जिनके हवाले ईश्वर को किया उन्होंने ही इंसान का जीवन नर्क बना दिया ।
    फिर इंसान ने भौतिक सुख सुविधाओं के लिए विज्ञान का सर्जन किया, किंतु दोनों से ही उसे संतोष हासिल ना हुआ।
    अति हर चीज की बुरी होती है शक्ति चाहे ईश्वर की हो या विज्ञान की उसकी अतिरिक्तता ने आम जीवन को नरक बना दिया।
    कविता व्यंग्य करती है कि वास्तव में ताकत पागलपन में है और सारी इंसानियत वर्तमान में पागलों के हवाले हैं।
    वर्तमान पर आक्षेप करती हुई बेहतरीन कविता के लिये आपको बधाई।

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