Friday, June 21, 2024
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जयदेव सिंह की कविता

ओ परब्रह्म, ओ कृष्णा
ओ अल्लाह, ओ जीसस!!!
सुना है तू निर्लिप्त है निःस्वार्थ है
फिर तेरी कृति क्यूँ स्वार्थ में संलिप्त है।
तू सत्य है शिव है तू सुंदर है
फिर तेरा बनाया ये विश्व
क्यूँ इतना कुरूप है।
तेरी कृति में कोई कमी तो
हो नहीं सकती,
फिर ये भौंडा सा जगत किसकी उपज है।
पापी पाप किए जाते हैं
भले लोग पिसते है, पिसते चले जाते है।
कहीं लोग सफर कर रहे हैं हवा में
तो कहीं तेरे बंदे चप्पल को तरस रहे हैं
झूठा छोड़ आते है थाली भर होटलों में अमीर
बहुत से तेरे बंदे निवाले को तरस रहे है।
टिप् दे देते है सौ रुपये होटल के बैरे को।
अट्ठन्नी के लिए वो रिक्शेवाले से हुज्जत कर रहे हैं
ओ विधाता ओ दुनिया बनाने वाले तू न्यायी नहीं
ये कैसा न्याय है तेरा लुच्चे लफंगे फल फूल रहे है
जिन्हें है खौफ तेरा वो मर मर के जी रहे है।
दंगे हो कहीं तो गरीब बेचारे मरते है
भड़काने वाले सदनों में,टीवी पर लफ्फाजी करते हैं
क्या सीमा पर किसी नेता के बेटे ने गोली खाई है
नहीं वहाँ तो गरीब सिपाही मरा करते है।
क्या नेताओं की तरह तू भी अंधा और बहरा है
निज स्वार्थ से कलुषित जिनका चेहरा है।
तू तो सर्वज्ञ है ,तेरी आँखों के आगे फिर क्यूँ अंधेरा है
ये विडम्बना है कि तू सजा देता है मरने के बाद
जिंदा दुष्टों पर क्यूँ नहीं तेरा कोई पहरा है ।
ओ मेरे मौला ओ मेरे काजी मरने के बाद सजा का क्या औचित्य है
गुनाह तो करता ये शरीर किन्तु सजा आत्मा क्यूँ भुगतती है
ओ मेरे कृष्णा कुछ तो न्याय कर
दुष्टों को तू यूँ ना माफ कर।
दे सजा गुनाहों की इसी जन्म में तो माने”जेडी”
करे रमेश भुगते सुरेश, तेरा अन्याय है बाकी तू जाने।
जयदेव सिंह
से.नि. अधिशासी अभियंता,
जयपुर
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2 टिप्पणी

  1. कटु सत्य
    धर्म के ज्ञाता और महान लोग बोलते है
    ये तो सब पिछले जन्मों के फल है जैसा कर्म आप पिछले जन्मों में कर के आए हो वो तो भोगने होंगे
    भगवान का ये System निराला ही है जो जीवन भर सही राह पर चले जो दुख पाए और जो बुरे काम करे वो मजे पाए
    वाह भगवान तेरी लीला अपरम पार

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