होमकविताफागुन विशेष : महिमा श्री की कविता - अनुबंधों के दिन हैं... कविता फागुन विशेष : महिमा श्री की कविता – अनुबंधों के दिन हैं आये By Editor March 23, 2019 0 322 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp महिमा श्री अनुबंधों के दिन हैं आये रंगों के दिन हैं आये भूल के अपने राग-द्वेष को गलबहियों के दिन हैं आये तू क्यों रुठा-रुठा सा है क्या कुछ टूटा-टूटा सा है। नाहक इतना शोक मनाये ! पतझड़ के दिन गये बावरें चमन का हर रंग बुला रहा है। टेसू फिर खिला खिला रहा है। नीला—पीला रंग–रंगीला फागुन लगता छैल-छबीला आ.. अंतरघट तक तुझे भीगो दूं ! हिय के सारे संताप मैं हर लूँ शिव सा चलो हम धूनी रमाये प्रीत के रंग में यूं रंग जाये अनुबंधों के दिन हैं आये फागुन है सबसे नशीला कहाँ मौसम ऐसा सजीला धर्म-जाति के भेद भुलाये अंनुबंधों के दिन हैं आये इंद्रधनुषी सपनों का मेला पंचम सुर में गाये कोकिला कुह कुह कर सब कह जाये अनुबंधो के दिन हैं आये.. Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखडॉ. सविता सिंह की कहानी – ईर्ष्याअगला लेखशैलेश शुक्ला की तीन कविताएँ Editor RELATED ARTICLES कविता डॉ. अनुराधा पांडेय की कविता March 8, 2026 कविता संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’ की कविता – रिश्ते March 8, 2026 कविता डॉ. मोहसिन ख़ान की कविता – आदमी का आदमी के हाथों मारे जाना March 8, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest नैवेद्य पुरोहित की कलम से – शिवना साहित्य समागम 2026 सीहोर से लौटकर March 8, 2026 छाया सक्सेना प्रभु की कलम से – पुस्तक समीक्षा : भारती की काव्यमाला March 8, 2026 आचार्य अभिनव योगी का लेख – वन्दे मातरम् की 150 वर्षीय यात्रा March 8, 2026 डॉ. अनुराधा पांडेय की कविता March 8, 2026 और अधिक लोड करें