सूरज अपनी नव-किरणों से
बिखरा देता जग में लाली ।
बूँदों के मोती बिखराकर
बादल फैलाता हरियाली ।।
धरती के उपकार असीमित
सबको दाना पानी देती ।
अपने आंचल के आश्रय में
सबके सारे दुःख हर लेती ।।
उपवन सदा सुगंध लुटाकर
सबकी सांसें सुरभित करता ।
खग-कुल मिलकर गीत सुनाता
सबके मन में खुशियां भरता ।।
हम भी परहित करना सीखें,
मिलकर सब पर नेह लुटायें ।
औरों के दुःख दर्द मिटाकर
इस धरती को स्वर्ग बनायें ।।