1 – मेरा किस्सा कुछ और है
कुछ मसलें हैं, कुछ दुश्वारियाँ हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
जिस लम्स पर सुक़ून टिका है
उसी से सारी परेशानियां हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
कभी पाकर तुझको खोना
कभी खोकर तुझको पाना
बहुत गहरी नज़दीकियां हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
तेरा लहज़ा , तेरी फ़िक्र
तेरी बातों में अक़्सर मेरा ज़िक़्र
मुझ पर तेरी मेहरबानियां हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
तूने इस ख़ाक़सार को नवाज़ा
मोहब्बत की और बुत बनाया
ये तमाम तेरी क़दरदानियां
मेरा किस्सा कुछ और है ।
मैं खिज़ां में सूखा एक ग़ुल ही तो हूँ
आख़िर महकूं भी तो कब तक
ग़ुलदान को दरीचे में सजा रखा
तेरी आँख़ों की रानाइयाँ हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
यक़बयक़ सोते – सोते जाग  जाना
और जागते जागते सो जाना
इसी कशमकश में इश्क़ की गहराइयाँ हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
तू बड़ा रहमों – क़रीम है
ज़माने में बेहद अज़ीम है
मानो जैसे सुबहे -नसीम है
इधर शाम की तन्हाईयाँ हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
कुछ मसलें हैं ,कुछ दुश्वारियाँ हैं
मेरा किस्सा कुछ और है।
जिस लम्स पर सुक़ून टिका है
उसी से सारी परेशानियां हैं
मेरा किस्सा कुछ और है ।
2 – सोना चाहती हूं
****
अब सोना चाहती हूं
एक ऐसी गहरी नींद …!
जिसमें कोई ख़्वाब ,
भूले से भी मेरा पीछा न कर सके ।
हंसी वादियां
मंदिर की घंटियां
हंस के जोड़े
बादलों की रिमझिम फुहार
खलिहानों के बैल
मेड़ का पानी
गेहूं की बालियां
मंजरियों की महक
पहाड़ों से पिघलता बर्फ़
शिकारे की नीली रौशनी वाला लालटेन
चिनार
पारिजात
कहवा
कहीं से भी मुझे आवाज़ न दे…….
****.
अब सोना चाहती हूं
एक ऐसी गहरी नींद …..!
जिसमें कोई रब्त,
चाहकर भी मेरा हाथ न थामे ।
कोई किस्सा
कोई हिस्सा
कोई छुअन
कोई जलन
कोई शबनम
कोई मुस्कान
कोई ज़ख्म
कोई ठिठोली
कोई आंसू
कोई साथ
कोई पास
कोई हौंसला
कोई भरोसा
कहीं से कोई आवाज़ न दे ……
****
अब सोना चाहती हूं
एक ऐसी गहरी नींद ..!
जिसमें कोई साज,
कभी न छेड़ सके प्रीत की  सरगम ।
मेरी नज़्म
प्यालियाँ
मोज़े
कनटोपे
मेरी घड़ियां
मेरी कलम
पार्क का वो पीला बेंच
गली का मोड़
दरख़्त की छांव
गाड़ी की स्टेयरिंग
चाबियों का छल्ला
आराम कुर्सी
बारंदे का कोना
आसमान का टुकड़ा
कहीं से कोई आवाज़ न दे ….
क्योंकि
तवील -सी इन तमाम रातों का बोझ
अब  मेरी पलकें उठाने में नाकाफ़ी हैं …..

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