1- मैं मोहब्बत हूं
किसी की दौलत नहीं हूं मैं मोहब्बत हूं !
कोई अमानत नहीं हूं सबकी इज्जत हूं !!
जन गण मन में रही सदा,रिहाइश मेरी ,
शांति प्रेम एकता की है फरमाइश मेरी !
यूं हिंदुस्तान की मैं सनातनी शरीयत हूं !
किसी की दौलत नहीं हूं मैं मोहब्बत हूं !!
जाति-धर्म कौम में  वतन यूं  न बांटिये ,
गुल खिलें खिले रहें चमन यूं न काटिये!
किसी की कल्पना नहीं  मैं हकीकत हूं !
किसी की दौलत नहीं हूं मैं मोहब्बत हूं !!
छद्मवेश में मिलते लोग गुम है मानवता ,
लील रही इंसानियत को बढ़ती दानवता !
एक इंसा  हूं  मैं खुद की शख्सियत हूं !
किसी की दौलत नहीं हूं मैं मोहब्बत हूं  !!
2- सुन लो पाक अंतिम यह संदेश हमारा
कान खोल कर सुन लो पाक अंतिम ये संदेश हमारा !
कभी न हारेगा चूहों से   ये बब्बर शेरों का देश हमारा !!
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई है कौम जाति व धर्म अनेक ,
भिन्न भले है सबका मजहब मगर एक परिवेश हमारा !
अरमान है देश का ये कश्मीर भारत का स्वाभिमान है ,
छेड़ो मत भारतीय सेना को   याद करो आवेश हमारा !
आका आतंकियों के पालक अब रोको अपने आतंक ,
याद करो सन इकहत्तर हश्र वही होगा तेरा वो दोबारा !
कश्मीर की ओर न नजर करो जनता ये ललकार रही ,
नहीं तुम गर समझोगे तो मिट जाएगा निशान तुम्हारा !
कश्मीर के जर्रे-जर्रे से यूं  आती है आवाज़ इन्क्लाबी ,
हम भारतवासी एक हैं  सदा एक रहेगा ये देश हमारा !
आज हिमालय की चोटी से हर सैनिक हुंकार भर रहा ,
कश्मीर की रट लगाए अगर तो ले लेंगे लाहौर तुम्हारा !
गीदड़ जैसी मौत मिलेगी हर आतंकी  को कश्मीर में ,
भारत का मस्तक कश्मीर टंका भाल परहै ये सितारा !
कान खोल कर सुन लो पाक अंतिम ये संदेश हमारा !
कभी न हारेगा  चूहों से बब्बर शेरों का ये देश हमारा !
डॉ. तारा सिंह अंशुल
विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मानों से नवाजी़ गयी वरिष्ठ कवयित्री , लेखिका , कथाकार , समीक्षक , आर्टिकल लेखिका। आकाशवाणी व दूरदर्शन गोरखपुर , लखनऊ एवं दिल्ली में काव्य पाठ , परिचर्चा में सहभागिता। सामाजिक मुद्दे व महिला एवं बाल विकास के मुद्दों पर वार्ता, कविताएं व कहानियां एवं आलेख, देश विदेश के विभिन्न पत्रिकाओं एवं अखबारों में निरन्तर प्रकाशित। संपर्क - tarasinghcdpo@gmail.com

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