होमलघुकथाडॉ. गरिमा भाटी की लघुकथा - वो फूलों-सी महकती एक लड़की लघुकथा डॉ. गरिमा भाटी की लघुकथा – वो फूलों-सी महकती एक लड़की By Editor March 22, 2026 0 79 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp वो फूलों–सी महकती एक लड़की… लेकिन उसकी ज़िंदगी की सच्चाई उस महक से बिल्कुल अलग थी। इन दिनों उसकी मजबूरी थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ रहे, जिसके शरीर से ही नहीं, उसकी आत्मा से भी एक अजीब–सी सड़ांध आती थी। यह सड़ांध केवल गंध नहीं थी, बल्कि एक ऐसा वातावरण था जिसमें उसका मन, उसका अस्तित्व धीरे–धीरे घुटने लगता था। जब भी वह आदमी अपने बदबू से भरे शरीर के साथ उसे छूता, तो उसे ऐसा लगता जैसे वह गंध उसके अपने शरीर में भी उतर आई हो। वह स्पर्श प्रेम का नहीं, एक बोझ का एहसास देता था। और उसका चुम्बन… जो अक्सर उसकी इच्छा के विरुद्ध होता, उसे भीतर तक जड़वत कर देता। जैसे किसी ने उसकी चेतना को ही थाम लिया हो। वह कई–कई घंटों तक चुप बैठी रहती। अपने ही शरीर से आती उस गंध के साथ खुद को धीरे–धीरे सड़ते हुए महसूस करती। कभी–कभी उसकी आँखों से आँसू बिना आवाज़ के बहते रहते। वह रोती भी थी… लंबे समय तक, बिना किसी के जाने। जब उस गंध को सह पाना उसके लिए असंभव हो जाता, तो वह उठकर बाथरूम चली जाती। देर तक पानी के नीचे खड़ी रहती, जैसे पानी केवल उसके शरीर को नहीं, बल्कि उस एहसास को भी धो देगा जो उसकी आत्मा पर चिपक गया था। उसकी ड्रेसिंग टेबल पर महँगे इत्र की कई शीशियाँ सजी रहती थीं। न जाने कितने तरह के इत्र, पाउडर और खुशबुएँ वह अपने ऊपर लगा लेती, जैसे किसी अदृश्य सड़ांध को ढँकने की कोशिश कर रही हो। वह चाहती थी कि दुनिया को कभी पता न चले कि उसके भीतर क्या सड़ रहा है। लोग जब उसके पास से गुजरते तो कहते, “कितनी महकती है… जैसे फूलों की खुशबू हो।” उन्हें सचमुच वही दिखाई देता था। एक फूल–सी महकती लड़की। लेकिन उन फूलों के नीचे छिपी हुई सड़ांध… वह केवल वही देख पाती थी। डॉ. गरिमा भाटी फ़रीदाबाद, हरियाणा Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसौम्या पाण्डेय “पूर्ति” की कलम से – अनुभव का प्रवाह है “दीप जला रखना तुम”अगला लेखदिलीप कुमार का व्यंग्य – संपूर्ण समाधान Editor RELATED ARTICLES लघुकथा डॉ. रमेश यादव की लघुकथाएँ March 8, 2026 लघुकथा आलोक शुक्ला की लघुकथा – आख़िरी देखभाल March 8, 2026 लघुकथा फागुन पर कल्पना मनोरम की पांच लघुकथाएं February 22, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest वामा अन्तरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर 2026 – (एक रिपोर्ट) March 22, 2026 सूर्यकांत शर्मा की कविता – युद्ध March 22, 2026 डॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – इलाज का टेंडर March 22, 2026 दिलीप कुमार का व्यंग्य – संपूर्ण समाधान March 22, 2026 और अधिक लोड करें