Sunday, October 18, 2026
होमकविताब्रज श्रीवास्तव की तीन कविताएं

ब्रज श्रीवास्तव की तीन कविताएं

1. हमारे शहर में ख़बर

बहुत-सी सुहानी बातें हैं
हमारे शहर में,
हर शहर की तरह
इतिहास के गौरव में रंगी हुई।
और कुछ अप्रिय प्रसंग भी,
जो समय की धूल में नहीं दबते।
माँ जब अख़बार पढ़ती है,
बदलते रहते हैं
उसके चेहरे के भाव
कभी मंदिर से घंटा चोरी हो गया,
कभी पत्नी ने पति को मार डाला,
कभी किसी ट्रक ने
एक बच्चे को कुचल दिया।

हमारे शहर में
कुछ अच्छी खबरें भी हैं
एक कवि गोष्ठी हुई,
नशे से दूरी की रैली निकली,
एक कोचिंग के दस बच्चों ने
नीट की परीक्षा पास कर ली।

फिर एक खबर आती है
पाँच दिन की दुधमुंही बेटी को
झाड़ियों में फेंक गए उसके अपने।
और इससे भी अधिक निर्मम यह कि साल में
ऐसे बीस प्रकरण दर्ज हुए।

हमारे शहर में
मानवता के उदाहरण भी मिलते हैं,
लेकिन वे भी ढँप नहीं पाते
बुराई के इन
काले अध्यायों को।

2. विदिशा

यह शहर रोज़ाना जाग जाता है जल्दी
और देखता है अपना चेहरा समय के आइने में

वह इतना पुराना कि लगभग अनादि और
नया इतना जितना कि ये मिनट
वह धड़क रहा है धरती के हृदय में
या वह रक्त की गर्म बूँद है संसार के शरीर में जैसे

वह पार कर रहा है सदियों की परतें
धीरे-से बढ़ाता है अपना पाँव
अगली सीढ़ी की ओर
पीछे छूट जाते उसके पद चिह्न

जो गश्त दे रहे हैं यहाँ वे भी पहुँचते आगे
स्मृति का छोटा हिस्सा बनकर

उन्हें मालूम नहीं होता उनके हाथ में
कुछ तीलियाँ होती हैं
अंधेरे में रखे वाद्यों की ओर निगाह पहुँचती है
जिनके जल उठने पर

वे तामीर करते हैं मुस्कराते हुए घर
पिघला कर जड़ प्लास्टिक को
जैसे उजागर करते हैं विचार के तार

वे अनजाने में अपनी आयु के बांस पर
एहसास कर रहे होते हैं पकी गांठ के क्रम
संभव है वे शामिल हों उन रसायनों में

जो बूँद बनाते हैं रक्त की
ऐसी बूँद जो संसार की रगों में
बह रही है लगातार

3. सांची

बार बार सांची जाता हूं मैं विदिशा से
जैसे विदिशा ही जाता हो सांची के लिए
मैं एक जिले की सरहद पार करके
जाता हूं

सदियों को पार करके जाता हूं मैं
इक्कीसवीं सदी से नीचे उतर कर
पहुंचता हूं ईसा पूर्व

गुजरते हुए देखता हूं इतने युद्ध
इतने पंथ,इतने धर्म
फिर ध्यान में बैठी एक मूरत से
पूछता हूं
तथागत कैसे हुआ जाता है एक रात में

चकित करने वाले शिल्प
को और स्तूपों के सौंदर्य को देखते हुए
चकित होने के लिए
मैं साँची बार बार जाना चाहता हूं।

ब्रज श्रीवास्तव

साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन।
प्रकाशित कविता संग्रह:तमाम गुमी हुई चीज़ें, घर के भीतर घर (2013) ऐसे दिन का इंतजार(2016)राग भोपाली,आशाघोष (2020, समय ही ऐसा है (2022), हम गवाह हैं (2023), ऊब (2025), रचना समय पुस्तिका (2026), उड़िया में एक कविता संग्रह -कहानी रे तुमे, कई पत्रिकाओं में संपादन कार्य।
व्यवसाय: स्कूल शिक्षा विभाग में हाईस्कूल प्राचार्य।
पता: L-40, गोदावरी ग्रीन्स, विदिशा।
ईमेल: [email protected]
मोबाइल: 9425034312, 7024134312

 

 

 

RELATED ARTICLES

2 टिप्पणी

  1. ब्रज श्रीवास्तव जी
    सांची का विचार और तथागत का दर्शन ख़ूब लिखा ।
    क्या ही सुंदर शब्द संयोजन है -वाह
    Dr Prabha mishra
    Bhopal

  2. शानदार सृजन। ब्रज श्रीवास्तव जी का कहन अपने समय का दस्तावेज़ भी है और स्मृतियों का सभागार भी!

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest