शीर्षक : ” बेबस मानव”
छंद : सरसी छंद
विधा : गीत
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।
बेलगाम होकर मत दौड़ें, थामें निज रफ़्तार।
बदल गये हैं सब पैमाने, परिवर्तित है सोच।
आत्म चेतना पर अब ताले, जड़ता बिन संकोच।
छद्मवेश नित धारण करके, वह करता व्यापार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।1
छूना चाहे नव ऊंचाई, ऊँची लगा छलाँग।
सर्व संपदा मिले तभी भी, पूर्ण न होती माँग।
इच्छा पूर्ति हेतु धरती से, करता नित व्यभिचार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।2
संसाधन का दोहन करके, फिर भी मिटे न भूख।
वसुधा बंजर जंगल गायब, कूप रहें अब सूख।
मायाजाल प्रगति का बेढब, प्रकृति हुई लाचार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।2
नित्य करे खिलवाड़ नियति से, बतला कर विज्ञान।
अविष्कार कर के वह नूतन, नित्य बघारे शान।
बदला लेती कभी प्रकृति तब, मचता हाहाकार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।3
त्राहि-त्राहि मानवता करती, आया एक विषाणु।
बहुत सूक्ष्म संरचना इसकी जैसे हो परमाणु।
नहीं दवा इसकी बन पायी, शस्त्र हुए बेकार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।4
संयम से जीना अब सीखे, जो सुख का आधार।
कठिन समय मानव के आगे, कर ले तनिक विचार।
शीर्षक: कोरोना योद्धा
आधार छंद : मत्तगयंद सवैया
विधा : सवैया
युध्द बड़ा लड़ देश रहा, सरकार कहे वह पालन करिये
आप रहें अनुशासित संग, सभी जन को अनुशासित करिये।
हाथ न लें विधि को अपने बिन चूक सभी परिपालन कर लें।
लोग रहें घर में अपने सहयोग प्रशासन के सँग करिये।।1
मानव का मन चंचल है कर लें वश में निज के हित सारे।
लोग नहीं निकले यदि बाहर धूर्त विषाणु मरे बिन मारे।
गर्व करें अपने सब ऊपर निम्न नहीं हम भारत वासी।
जीत मिले जब यत्न करें मिल और कॅरोना’ उसी पल हारे।।2
डॉक्टर काम करें दिल से दिन रात न देख करें बस सेवा।
पत्थर फेंक रहे कुछ दुष्ट मिले जिनको सब से नित मेवा।
जान गँवा करते वह पालन धर्म चिकित्सक का बिन सोचे।
देश कृतज्ञ रहे उनका प्रगटे बन ज्योँ जन के हित देवा।।3
काम करें दिन रात जवान बने वह ही सबके रखवाले।
दंड भी दे अरु भोजन भी जब वक्त पड़े तब जान बचा ले।
पत्थर मध्य नहीं डिगते पग रक्षक वो बन आज खड़ा है।
आज सलाम करें उनको नित स्थिति प्राण पे’ खेल सँभाले।।4
प्रवीण त्रिपाठी भारतीय सेना में कर्नल हैं. साथ ही काव्य-सृजन में अभी अभिरुचि रखते हैं. संपर्क - tripathipravin.5075@gmail.com

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