उदास लड़की ने उसे देखते हुए कहा। लड़का मन ही मन बहुत ही असमंजस में था कि वह उसकी कहानी सुनने के लिए रुके या चला जाए?
“सुनो, उस जाते हुए आदमी की परछाईं तुम्हें दिख रही है न?” दूर लैम्पपोस्ट के किनारे चलते हुए किसी अजनबी की ओर इशारा कर लड़की ने पूछा।
“हाँ” उस तरफ देखते हुए उसने बेमन से जवाब दिया।
बारिश अब धीरे- धीरे कम हो चली थी । बरसाती पतंगे लैम्पपोस्ट के लाइट के चारों ओर ऐसे परिक्रमा कर रहे थे जैसे धरती घूम रही हो अपनी धुरी पर ।
“उसकी परछाईं जितनी ही लम्बी है मेरी कहानी।” लड़की बात को आगे बढ़ाती हुई बोली।
उड़ते हुए पतंगे भी थोड़ी देर को जैसे चौंक गए और अपने उड़ने की तय परिधि को तोड़ते हुए उसके आस-पास आ मंडराने लगे। शायद उन्हें भी कहानी सुननी हो।
लड़का उस आदमी को देख रहा था जो अपनी परछाईं लिए दूर जाते -जाते उसकी आँखों से अब लगभग गुम हो चुका था। वह मन -ही- मन खुश हो उठा चलो, अच्छा है , चला गया। अब कहानी नहीं सुननी पड़ेगी। तभी उसकी मूर्खता उस पर खीझ उठी ।उस अजनबी के जाने या रुकने से इस लड़की को क्या मतलब ? इसे सुनानी है तो सुनाएगी ही। उसका मन अंदर ही अंदर झल्ला रहा था।
“हाँ, बोलो न सुन रहा हूँ मैं ।”लेकिन अंदर ही अंदर उबाल आ रहा था कि बताओ , कौन हो तुम, यहाँ क्या कर रही हो , इस बरसात में गीले कपड़े में क्यों बैठी हो और इस भीड़- भरे पूरे शहर में मैं ही तुम्हें मिला जिसे तुम अपनी जाने कौन -सी कहानी सुनाना चाहती हो?यही सब जानने के लिए ही तो इस बारिश वाली ठंड में यहाँ मैं आया हूँ।”लेकिन ऊपर से वह शांत बना रहा। पर उसे अब ऊब होने लगी थी।
उसकी ओर देखती हुई लड़की बोली, ” तो जाओ न, कौन सा मैं तुम्हें रोक रही हूँ । तुम भी उदास बैठे थे और मैं भी, इसलिए तुम्हारी चुप्पी तोड़नी चाही।वैसे भी बारिश रुक गयी है। इस शेड के नीचे कब तक हम रुक सकते हैं ।लोग कहीं शक की नजर से न देखने लगें।” कह ,मुस्कुरा उठी लड़की ।जैसे उसके अंदर की सारी बातें सुन ली हो।
लड़के ने इतनी देर में पहली बार नज़र भर कर देखा उसे। मुस्कुराती हुई बहुत खूबसूरत लग रही थी साँवली इकहरे बदन की वो लड़की।
“चले जाओ।” जितना छोटा वाक्य था उतना ही समझना कठिन हो रहा था लड़के के लिए कि सच में चला जाऊँ या कुछ देर और रुक जाऊँ।
सुनसान- सी सड़क ,शुरुआती जाड़े की बारिश और दो अजनबी, जो बारिश से बचने के लिए एक खामोश टपरी के नीचे आ मिले थे। पानी के छीटों से वह थोड़ी भींग भी चुकी ,थी पर उसे घर जाने की कोई जल्दी नहीं दिख रही थी न ही सुनसान हो चली सड़क पर एक अजनबी लड़के से वह डर रही थी । ऐसी ही उस अजीब लड़की को कहानी सुनानी थी।
लड़का असमंजस में पड़ गया कुछ दिनों बाद ही उसकी परीक्षा थी ,ऐसे में उसके पास बीमार होने का कोई ऑप्शन भी नहीं था।
उसने संकोच के साथ कहा, ” ऐसा करो तुम मेरे साथ चलो पास ही मेरा लॉज है ,वहीं हम पूरी बात करेंगे।”
“तो तुम मुझे इस मौसम में अपने लॉज में ले जाना चाहते हो ?” चेहरे की रेखाएँ ,भीगा कपड़ा, मुँह से निकलते शब्द, जैसे सभी एक साथ पूछ बैठे ,पर आँखे जाने कहाँ देख रही थीं , शायद दूर लॉज के उस कमरे को ढूँढ़ रही थी जहाँ चलने का अभी- अभी उसे निमंत्रण मिला था।
लड़का सहसा सहम- सा गया ।मुँह से अचानक निकली बात का उसे एहसास हुआ कि बारिश से भींगी ठंड और अँधेरी होती रात में किसी अनजान लड़की को लॉज में चलने को कहने का क्या अर्थ हो सकता है!
वह तो परीक्षाओं में लगातार मिल रही असफलता के कारण भावशून्य-सा, सही-गलत की परिधि की परिभाषा से दूर, अपने भीतर के द्वंद से लड़ रहा था। किंतु अपने कहे शब्दों का अर्थ समझने के बाद दुख और उदासी उसके चेहरे से ढलक कर हृदय को छूती हुई नीचे गिरने ही वाली थी कि लड़की ने समझदारी दिखाते हुए अपनी आँखों को लॉज के कमरे से हटा , झट से उसे थाम लिया। फिर शांत स्वर में पूछा, “तुम किसी बात से परेशान हो।”
“हूँ “,कह लड़का सोचने लगा ,इसे कैसे पता चला। क्या मेरे चेहरे पर मेरी कहानी लिखी है?
लड़की उसी तरह शांत खड़ी रही,फिर बोली , “कोई भी समझ सकता है।तुम्हारे चेहरे पर ढेर सारी नदियाँ बह रही हैं जो ऊपर से तो शांत है लेकिन अंदर ही अंदर उनमें उथल-पुथल मची हुई है।”
“सुनो, क्या तुम फेस -रीडर हो?”लड़का ने तरल शब्दों में पूछा।
“नहीं !” दरअसल मैं नहीं जानती मैं कौन हूँ ? इसीलिए कहानी सुना कर पूछना चाहती हूँ , इन सारे पात्रों में मैं कौन हूँ?मुझे लगता है, कहीं खो गयी हूँ मैं। क्या तुम मुझे ढूँढ़ दोगे?”लड़की खोई-खोई सी बोली।
लड़का अब हतप्रभ हो गया था।
मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे , कहीं इसे कोई मानसिक रोग तो नहीं ? क्यों मैं इन लफड़ों में फँसा हूँ।
लड़की की आँखें अभी भी वहीं देख रही थीं जहाँ से अपनी परछाईं लिए वो आदमी धीरे- धीरे शून्य में बदल गया था।
समय बीतते देख परीक्षा के भूत ने उसे डाँट लगाई ,तो लड़का बहुत ही आग्रह से बोला ,”सुनो कुछ ही दिनों में मेरी परीक्षा होने वाली है ।शायद यह मेरी अंतिम परीक्षा हो ,क्योंकि परीक्षाओं के लिए मेरी उम्र -सीमा खत्म हो गयी है अगर इस बार भी असफल हो गया तो…?बिना कहे ही आगे के शब्द सब कुछ कह गए। तुम अपना नम्बर दे दो, फ्री होते ही तुम्हें फोन करके तुम्हारी सारी बातें सुनूँगा।”एक बेचैनी भर आईं थी उसकी आवाज़ में।
” पर, मेरे पास तो कोई नम्बर नहीं, चलो तुम्हारे लॉज में ही चलती हूँ वैसे भी इस वक्त तुम्हें मेरी जरूरत है ।”शब्दों में विश्वास के साथ एक ठहराव भी था।
लड़के ने आश्चर्य से पूछा ” सच में चलोगी ?”
” हाँ ।”
और वे चल पड़े ।उनके साथ ही धुँधले, रक्तिम में हल्की काली रोशनाई की शॉल डाले , शाम भी पीछे-पीछे चल पड़ी।
लैम्पपोस्ट की रोशनी में नहाते पतंगे भी दूर तक उनके साथ तैरते रहे।
लंबी होती परछाइयों में कहानी लम्बी होती रही।जब छोटी होती परछाईं ,तो सिमट जातीं कहानियाँ।
कहानियों की पटरी लाँघते-लाँघते अंततः वे लॉज पहुँच गए।लड़का जैसे भूल चुका था खुद को ।उसे लगा जैसे वह इस लड़की के साथ वर्षों से चल रहा हो ,जैसे पूरी दुनिया की परिक्रमा कर अपनी गृहस्थी में लौटा हो।
शाम वहीं दरवाजे पर ठिठक कर खड़ी हो गयी , क्योंकि अंदर कमरे में रात अपने पूरे वजूद के साथ फैली थी।
लड़के ने अपने मोबाइल की टॉर्च को ऑन कर कमरे की लाइट जलाई और क्षणभर में ही सफेद रोशनी से कमरा जी उठा।रोशनी के आने से नाराज अंधेरा वहीं चौकी के नीचे छिप गया।
कमरे में एक चौकी, एक कुर्सी गैस स्टोव ,कुछ बर्तन , ढेर सारी किताबें और नोट्स बिखरे थे जिनके पन्ने-पन्ने बता रहे थे इन्हें जाने कितनी बार पढ़ा गया है।दीवारों पर चारों ओर
उसके बनाये जरूरी नोट्स , विभिन्न परीक्षाओं के डेट्स और अनगिनत फार्मूले टँगे थे। जाने क्यों लड़की की आँखें भींग गयी पर लड़का न देख ले इसलिए झट से उसे अपने दुपट्टे से पोंछ लिया।” बिना दूध वाली चाय पीओगी “चेहरे पर दूध नहीं होने का अफसोस तो नहीं था किंतु जाने क्या था जो उसे बहुत उदास बना रहा था।
लड़की उसे सहज करती हुई बोली ,” मुझे तो काली चाय बहुत पसंद है। जब मैं पढ़ती थी तो पूरी रात यही मेरा साथ देती थी।”
“तुम भी पढ़ती हो…क्या किसी परीक्षा की तैयारी कर रही हो या कॉलेज में हो।” एक साथ ही वह ढेर सारे प्रश्न पूछ बैठा।
” नहीं , अब नहीं पढ़ती। ” आँखे जाने क्यों बुझ गयी थीं लड़की की। अच्छा ,मेरी छोड़ो , तुम बताओ क्या- क्या पढ़ते हो ?”
पर तुम्हें मुझसे क्या जानना ?तुम्हें तो अपनी कोई रहस्यमयी कहानी सुनानी है , वही सुनाओ।
कई दिनों से उदास लड़का अब धीरे- धीरे चहकने लगा था ।
लड़की चुपचाप उसे देखती रही।
“हाँ, हाँ ,पूरी रात मैं तुम्हारी ही कहानी सुनूँगा।” लड़का पहली बार खिलखिलाया था।
“क्या तुम्हें पता है ?तुम्हारी हँसी बहुत खूबसूरत है ।ऐसे ही हँसते रहो ।”लड़की उसे जी भर देखती हुई बोली।
अचानक से कही इस बात से लड़का थोड़ा असहज हो गया ।झेंपते हुए कहा ,”ऐसा पहली बार किसी लड़की ने कहा है।”
लड़की उसे देखते हुए बोली ” अब इतराओ मत। मुझे बताओ तुम क्या -पढ़ते हो जरा मैं भी तुम्हारा टेस्ट ले लूँ।”
“क्या तुम भी पीसीएस की तैयारी करती हो ?” पूरे उत्साह से पूछा उसने।
“अभी तो बताया था ,अब नहीं करती पर मुझे पूरी उम्मीद है, मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ।”
लड़का नोट बुक , प्रीवियस ईयर के प्रश्न- पत्र निकाल लाया। फिर दोनों डिस्कशन करने लगे।
इतिहास की बातें, भूगोल की बातें ,करेंट अफेयर्स की बातें, आगामी परीक्षा की रणनीति के बारे में।
पूरी रात वे परीक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते रहे।
कई बार किसी कहानी ने उनके बीच अपनी जगह बनानी भी चाही ,तो दोनों उसे नजरअंदाज कर पूरी लगन और उत्साह से पढ़ते रहे। इस बीच अनगिनत कहानियाँ जन्मीं जरूर पर अपनी उपेक्षा होते देख अंकुरित होने के पहले ही मुरझा गईं।
सुबह की मीठी महक आने तक लड़का बिल्कुल खिल चुका था , जैसे किसी ने निराशा के गहरे सागर से निकाल , आत्मविश्वास के शिखर पर बैठा दिया हो, जहाँ सूरज की नारंगी आभा उसके मस्तिष्क को चूमने को लालायित हो।
अचानक फरिश्ते -सी लड़की उठी और जाने लगी।
लड़का बेचैन हो कर बोला ,” अभी तो बाहर अंधेरा ही है कुछ देर बाद जाना ।”
लड़की बोली ,” अब नहीं रुक सकती , मुझे रोशनी होने के पहले जाना होगा ।”
“पर कुछ तो बता कर जाओ तुम कहाँ रहती हो ? कौन हो ? अगर मिलना हो तो कैसे मिलेंगे?”
“अब क्या करोगे मुझसे मिल कर ,अब मैं नहीं मिलूंगी ।”
” ऐसा क्यों बोल रही हो कहीं तो रहती होगी ?”
“हाँ ,पहले तुम्हारे लॉज के पीछे वाली गली में रहती थी।”
“क्या? तुम यहीं आस -पास रहती हो?” चौंक गया लड़का।
” अब नहीं रहती “
” पर अभी तो मैनें तुम्हारी कहानी भी नहीं सुनी ,अब मुझे सच में जानना है, तुम क्या कहना चाह रही थी ।”
” किसी दिन मेरी कहानी खुद तुम तक आ जायेगी।” -कह कर अपनी ठंडी हथेलियों से उसकी आँखें ढँक कर चली गयी लड़की।
लड़का जैसे गहरी नींद में चला गया , काफी देर बाद उसकी नींद खुली तो लगा ,वर्षों बाद सोया हो।
कुछ दिनों बाद ही उसकी परीक्षा थी।वह नई ऊर्जा , नए उत्साह से तैयारी करने लगा। सारे प्रश्न उसे खूब अच्छी तरह से याद हो रहे थे ,जिन प्रश्नों पर वह घण्टों उलझा रहता था वे मिनटों में सॉल्व हो रहे थे। उसे लड़की की बात याद आ रही थी , ” शांत मन से पढ़ोगे तो सब सरल हो जाएगा ,अशांत मन से साधारण बात भी ठीक से समझ में नहीं आती।”वह कई बार सोचता , ऐसा क्या कर दिया उसने जो मन बिल्कुल शांत हो गया है जो भी पढ़ता हूँ अच्छे से याद भी हो जाता है ।पहले तो उलझते -उलझते लगभग अवसाद की स्थिति में पहुंच गया था।कहीं वह कोई जादूगरनी तो नहीं थी।फिर खुद पर ही हँस कर कहता -“कोई बात नहीं परीक्षा के बाद उसे ढूँढ़ कर उससे जरूर पूछुंगा।”
****
आज परीक्षा हॉल से बाहर आ , लड़का बहुत खुश था ।उसने सारे प्रश्नों को बहुत अच्छे से हल किया था। आज पहली बार लग रहा था मेंस क्लियर होने से उसे अब कोई नहीं रोक सकता।उसके पैरों में जैसे पँख लग गए वह उड़ जाना चाहता था ,बादलों के पार, जहाँ वह लड़की उसके हाथों को थामे जीवन की हर परीक्षा को इसी तरह पार करने में उसकी सहायता करे।
घर आ ,बहुत अच्छे से तैयार हुआ , दिनों बाद शेव किया, सबसे सुंदर शर्ट निकाल कर पहनी ।
आज उसे लड़की को धन्यवाद देने जो जाना था।
उसे याद आया ,पीछे की गली तरफ ही तो अमित रहता है उसी से पूछता हूँ ,शायद उसे कुछ पता हो। उसने उसे फोन कर उस लड़की के बारे में जानना चाहा ।उधर से अमित ने बहुत ही आश्चर्य से पूछा ” तुम्हें भी उसके बारे में पता चल गया ?”
“क्या पता चल गया।” चौंक गया लड़का।
अमित कुछ देर मोबाइल देखता रहा ,फिर पूछा “तुम्हें क्या जानना है ?”
लड़के ने लड़की के बारे में बताते हुए पूछा, ” क्या तू उसे जानता है?”
“हाँ” अमित उसी तरह शांत आवाज में बोला दरअसल कुछ समय पहले एक लड़की रहती थी।वह पीसीएस की तैयारी कर रही थी। बहुत ही तेज थी , साथ ही लोगों को पढ़ाती भी थी ,उसके कितने स्टूडेंट्स आज अच्छी जॉब में हैं।
लड़के को याद आया ,सच में उसके कंसेप्ट कितने क्लियर थे, जो मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आते थे, उसने चुटकियों में समझा दिया था।
” पर मुझे तो कभी नहीं पता चला ।”
“तुम तो कुछ महीने पहले ही यहाँ रहने आये हो ,तुम्हें कैसे पता चलता ?”
अमित उसके बारे में और भी कुछ बताना चाह रहा था तभी खीझ कर लड़के ने कहा , ” तो क्या हुआ, तुम मुझे पहले नहीं बता सकते थे?इतनी अच्छी स्टूडेंट है , मैं उसके साथ तैयारी करता ,तो कब का जॉब कर लेता।”अमित उसे समझाते हुए बोला, “अब वो नहीं है। पर तुम अचानक इतने उतावले क्यों हो रहे हो।”
उतावला शब्द सुनते ही लड़के को लड़की से मुलाकात याद आने लगी। लड़के के दिल की धड़कनें बढ़ने लगी , चारों ओर सतरंगी तितलियाँ उड़ने लगी , दुनिया अचानक से बहुत खूबसूरत हो गयी थी।
उसने बेसब्र हो कर कहा- ” “छोड़ो ,पुरानी बातें ।आज मैं उससे मिलना चाहता हूँ बस तुम जल्दी से उसका पता दो।”
पर अब तुम्हें कैसे समझाऊँ तुम मेरी बात समझ ही नहीं रहे हो मित्र । कितने महीने हो गए बाईपास में चाय की टपरी के
सामने ऐक्सीडेंट में उसकी मौत हो गयी थी।”उदास और भरी आवाज में अमित ने कहा ।
” पर! यह कैसे हो सकता है?
वह तो कुछ दिनों पहले मेरे साथ थी।”
अमित घबरा गया ,” ऐसे कैसे हो सकता है फिर उसे याद आया पहले भी कुछ लोगों ने कहा था, शाम के वक्त टपरी के पास कोई परछाईं दिखती है।
उसने लड़के को समझाते हुए कहा “तुम शायद किसी और से मिले होगे।पर तुम टपरी की तरफ जाना छोड़ दो । लोग कई तरह की बातें करते हैं ।”
अमित की बातें सुन लड़का सुन्न- सा हो गया । उसके हाथ से मोबाइल छूट वहीं गिर पड़ा जहाँ उस रात वो लड़की बैठ कर उसे पढ़ा रही थी ।
” पर यह कैसे हो सकता है ? वो तो बिल्कुल ठीक थी। लड़के के पूरे शरीर से ठंडा पसीना गिरने लगा। क्या वह परीक्षा में मेरी मदद करने आई थी ? क्या यही कहानी उसे बतानी थी? हजारों प्रश्न उसके दिमाग में कौंध रहे थे जिसका कोई जवाब उसके पास नहीं था।
यह अमित भी न जाने कैसी -कैसी बातें कर रहा है शायद जलता है ।मुझसे और वह नहीं चाहता कि मैं उससे मिलूँ इसीलिए तो कह रहा है मर गयी। छि,ऐसी बातें !बिल्कुल झूठा और मक्कार है अमित।अगर कोई बात होती तो क्या मुझे पहले नहीं बताता।हो सकता है कहीं और चली गयी हो। इसी शहर में कहीं और रहती हो। लोगों को तो बोलने का बहाना चाहिए। सोचते-सोचते वह बेचैनी से कमरे में टहल रहा था कि सहसा उसे याद आया ,उसने लड़की से वादा किया था कि वह उसकी कहानी जरूर सुनेगा ,तो वह अवश्य मेरा इंतजार कर रही होगी।उसे पानी से भीगी लड़की, उसे पढ़ाती लड़की, उसके साथ चलती लड़की दिखने लगी।उसने महसूस किया वह वहीं उसके इंतजार में वर्षों से खड़ी है ।वह भूल गया ,अमित ने अभी क्या कहा था।उसकी आँखें फिर से चमकने लगीं , प्रेम की जाने कितनी धाराएँ उसके हृदय की कोमल शिराओं से फूटने लगीं , कितनी इठलाती नदियाँ उसे अपने आगोश में समेटने लगी थीं। उसका अंग-अंग प्रेम की अधखिली पंखुड़ियों पर थिरकने लगा ।
उसने एक बार फिर से खुद को ठीक किया और लॉज से निकल पड़ा। आज फिर बारिश हो रही थी। ठंडी हवाएं बदन को सिहरा रही थीं।
वह चलता रहा – चलता रहा उसके साथ चलती रहीं अनगिनत कहानियाँ ,आकाश-धरा को जोड़ती धुँधली परछाइयाँ।
प्रेमी जोड़े के मिलन की आस बाँधे पतंगों का झुंड उसके रास्तों पर अपने पंख गिरा , उसका स्वागत करने लगे।
लड़के के बावरे पैर जाने कैसे हवा में तैर रहे थे। वह चल नहीं , उड़ रहा था । बगल से गुजरती हवा ने कहा , “अगर वो सच में अब नहीं होगी तो?”
” तो क्या ? प्रेम मात्र शरीर से थोड़े ही किया जाता है! वो तो शाश्वत है, दो आत्माओं का मिलन है। मैं जानता हूँ , वो आज भी मेरी प्रतीक्षा कर रही होगी मुझे भी तो उसकी कहानी सुननी है। “उसने हवा को हौले से छूते हुए प्यार से समझाया।
दूर धुँधलके में चाय की टपरी नजर आने लगी थी जहाँ किसी की परछाई टहल रही थी जिसके इर्द- गिर्द बैठे थे कहानियों के हजारों पात्र ।उन्होंने आगे बढ़ लड़के का स्वागत किया और इस तरह कायनात ने रची शरीरी – अशरीरी की सीमा से अलग दो आत्माओं के मिलन की अनोखी प्रेम कहानी।
-०-
सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘
रांची, झारखण्ड
सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन
प्रकाशित- तीस पार की नदियाँ ( काव्य संग्रह)
वक्त कहाँ लौट पाता है ( लघुकथा संग्रह)
सीझते हुए सपने (काव्य संग्रह)
नदियों का कोई घर नहीं होता ( हाइकु , हाइबन संग्रह)
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित ईमेल- [email protected] Mo- 7717765690
बिल्कुल एक ही बैठक में, बिना पलक झपके जिज्ञासा और उत्सुकता के साथ आपकी कहानी अपने आप को पढ़ा ले गई। बिल्कुल ही अलग फ्लेवर की कहानी थी। वास्तव में कहानी दिल को छू गई।
वह पी सी एस की तैयारी कर रही थी और बच्चों को पढ़ाती भी थी। इसका मतलब था कि वह स्वयं तो पढ़ कर नौकरी पाना चाहती ही थी लेकिन पढ़ाने के पीछे उसके दो कारण हो सकते थे ;या तो पढ़ाना उसकी जरूरत थी या फिर वह यह चाहती थी कि दूसरे भी उसकी तरह आगे बढ़ें और अच्छी नौकरी करें।
अंत तो कल्पना से परे ही रहा।
जब वह जाने के लिए कहती है तो लड़का बेचैन हो कर बोलता है,” अभी तो बाहर अंधेरा ही है कुछ देर बाद जाना ।”
“पर कुछ तो बता कर जाओ तुम कहाँ रहती हो ? कौन हो ? अगर मिलना हो तो कैसे मिलेंगे?”
“अब क्या करोगे मुझसे मिल कर ,अब मैं नहीं मिलूंगी ।”
यहाँ भी इस बात की कल्पना नहीं कर पाये कि वास्तविकता क्या हो सकती है।
अगर किसी की एक्सीडेंटल अकाल मृत्यु होती है, या किसी भी कारण से कोई असमय मर जाता है और उसकी तीव्र इच्छाएँ उसके मन में ही रह जाती है तो ,जैसा हमने सुना है कि आत्मा की मुक्ति नहीं हो पाती।
संभवतः यही कारण रहा हो लड़की की व्याकुलता का।इत्तेफाक से ही दोनों का मिलना हुआ रात के समय तब तक लड़के को उसके बारे में कुछ पता नहीं था।
लेकिन अंत बेहद खूबसूरत है लड़की उसके साथ उसके लॉज में गई उसने उसको पढ़ाया भी और उसको पढ़ाया हुआ उसे इतना अच्छे से समझ में आ गया कि कई बार के अथक परिश्रम से भी उसे परीक्षा में वह सफलता नहीं मिली पर उसके पढ़ाने के बाद सब कुछ उसे इतना क्लियर हो गया कि उसका रिजल्ट उसके पक्ष में रहा।
वह खुशी की असीम स्थिति से गुजर रहा था और उसे वह लड़की याद आ रही थी जिसके कारण व सफल हुआ। वह अपनी उस खुशी को उसके साथ सेलिब्रेट करना चाहता था जिसकी बदौलत यह संभव हुआ। और जब पता चला कि वह तो काफी पहले ही मर चुकी थी एक एक्सीडेंट में। यह उसके लिए अविश्वसनीय था। अचानक ही उसे महसूस हुआ कि शायद उसे उस लड़की से प्रेम हो गया है।
वह उस जगह लौट कर जाता भी है जहाँ उससे पहली मुलाकात हुई थी। एक परछाई थी वहाँ ,वह महसूस भी करता है पर अब वह असलियत जान गया था, लेकिन तब भी उसके प्रेम में कोई कमी नहीं थी। आत्माओं का यह निश्छल प्रेम इसी तरह होता है शायद।
अभी तक दिमाग में उस कहानी का नशा है। कहानी पूरी पढ़ लेने के बाद लिखने से पहले एक बार फिर से हमने उसे कहानी को पढ़ा। बहुत कुछ और भी लिखने का मन है लेकिन इतना ही बहुत।
एक लाजवाब कहानी के लिए आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ।
बिल्कुल एक ही बैठक में, बिना पलक झपके जिज्ञासा और उत्सुकता के साथ आपकी कहानी अपने आप को पढ़ा ले गई। बिल्कुल ही अलग फ्लेवर की कहानी थी। वास्तव में कहानी दिल को छू गई।
वह पी सी एस की तैयारी कर रही थी और बच्चों को पढ़ाती भी थी। इसका मतलब था कि वह स्वयं तो पढ़ कर नौकरी पाना चाहती ही थी लेकिन पढ़ाने के पीछे उसके दो कारण हो सकते थे ;या तो पढ़ाना उसकी जरूरत थी या फिर वह यह चाहती थी कि दूसरे भी उसकी तरह आगे बढ़ें और अच्छी नौकरी करें।
अंत तो कल्पना से परे ही रहा।
जब वह जाने के लिए कहती है तो लड़का बेचैन हो कर बोलता है,” अभी तो बाहर अंधेरा ही है कुछ देर बाद जाना ।”
लड़की बोली ,” अब नहीं रुक सकती , मुझे रोशनी होने के पहले जाना होगा ।”
“पर कुछ तो बता कर जाओ तुम कहाँ रहती हो ? कौन हो ? अगर मिलना हो तो कैसे मिलेंगे?”
“अब क्या करोगे मुझसे मिल कर ,अब मैं नहीं मिलूंगी ।”
यहाँ भी इस बात की कल्पना नहीं कर पाये कि वास्तविकता क्या हो सकती है।
अगर किसी की एक्सीडेंटल अकाल मृत्यु होती है, या किसी भी कारण से कोई असमय मर जाता है और उसकी तीव्र इच्छाएँ उसके मन में ही रह जाती है तो ,जैसा हमने सुना है कि आत्मा की मुक्ति नहीं हो पाती।
संभवतः यही कारण रहा हो लड़की की व्याकुलता का।इत्तेफाक से ही दोनों का मिलना हुआ रात के समय तब तक लड़के को उसके बारे में कुछ पता नहीं था।
लेकिन अंत बेहद खूबसूरत है लड़की उसके साथ उसके लॉज में गई उसने उसको पढ़ाया भी और उसको पढ़ाया हुआ उसे इतना अच्छे से समझ में आ गया कि कई बार के अथक तो से भी उसे परीक्षा में वह सफलता नहीं मिली पर उसके पढ़ाने के बाद सब कुछ उसे इतना क्लियर हो गया कि उसका रिजल्ट उसके पक्ष में रहा।
वह खुशी की असीम स्थिति से गुजर रहा था और उसे वह लड़की याद आ रही थी जिसके कारण व सफल हुआ। वह अपनी उस खुशी को उसके साथ सेलिब्रेट करना चाहता था जिसकी बदौलत यह संभव हुआ। और जब पता चला कि वह तो काफी पहले ही मर चुकी थी एक एक्सीडेंट में। यह उसके लिए अविश्वसनीय था। अचानक ही उसे महसूस हुआ कि शायद उसे उस लड़की से प्रेम हो गया है।
वह उस जगह लौट कर जाता भी है जहाँ उससे पहली मुलाकात हुई थी। एक परछाई थी वहाँ ,वह महसूस भी करता है पर अब वह असलियत जान गया था, लेकिन तब भी उसके प्रेम में कोई कमी नहीं थी। आत्माओं का यह निश्छल प्रेम इसी तरह होता है शायद।
अभी तक दिमाग में उस कहानी का नशा है। कहानी पूरी पढ़ लेने के बाद लिखने से पहले एक बार फिर से हमने उसे कहानी को पढ़ा। बहुत कुछ और भी लिखने का मन है लेकिन इतना ही बहुत।
एक लाजवाब कहानी के लिए आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ
खुबसूरत कहानी, अंत तक बांधे रखती है ।
बहुत-बहुत धन्यवाद
बहुत आभार आपका
सत्या बहुत अच्छी कहानी।
बहुत- बहुत धन्यवाद दी
आदरणीय सत्य शर्मा ‘कीर्ति’ जी!
बिल्कुल एक ही बैठक में, बिना पलक झपके जिज्ञासा और उत्सुकता के साथ आपकी कहानी अपने आप को पढ़ा ले गई। बिल्कुल ही अलग फ्लेवर की कहानी थी। वास्तव में कहानी दिल को छू गई।
वह पी सी एस की तैयारी कर रही थी और बच्चों को पढ़ाती भी थी। इसका मतलब था कि वह स्वयं तो पढ़ कर नौकरी पाना चाहती ही थी लेकिन पढ़ाने के पीछे उसके दो कारण हो सकते थे ;या तो पढ़ाना उसकी जरूरत थी या फिर वह यह चाहती थी कि दूसरे भी उसकी तरह आगे बढ़ें और अच्छी नौकरी करें।
अंत तो कल्पना से परे ही रहा।
जब वह जाने के लिए कहती है तो लड़का बेचैन हो कर बोलता है,” अभी तो बाहर अंधेरा ही है कुछ देर बाद जाना ।”
“पर कुछ तो बता कर जाओ तुम कहाँ रहती हो ? कौन हो ? अगर मिलना हो तो कैसे मिलेंगे?”
“अब क्या करोगे मुझसे मिल कर ,अब मैं नहीं मिलूंगी ।”
यहाँ भी इस बात की कल्पना नहीं कर पाये कि वास्तविकता क्या हो सकती है।
अगर किसी की एक्सीडेंटल अकाल मृत्यु होती है, या किसी भी कारण से कोई असमय मर जाता है और उसकी तीव्र इच्छाएँ उसके मन में ही रह जाती है तो ,जैसा हमने सुना है कि आत्मा की मुक्ति नहीं हो पाती।
संभवतः यही कारण रहा हो लड़की की व्याकुलता का।इत्तेफाक से ही दोनों का मिलना हुआ रात के समय तब तक लड़के को उसके बारे में कुछ पता नहीं था।
लेकिन अंत बेहद खूबसूरत है लड़की उसके साथ उसके लॉज में गई उसने उसको पढ़ाया भी और उसको पढ़ाया हुआ उसे इतना अच्छे से समझ में आ गया कि कई बार के अथक परिश्रम से भी उसे परीक्षा में वह सफलता नहीं मिली पर उसके पढ़ाने के बाद सब कुछ उसे इतना क्लियर हो गया कि उसका रिजल्ट उसके पक्ष में रहा।
वह खुशी की असीम स्थिति से गुजर रहा था और उसे वह लड़की याद आ रही थी जिसके कारण व सफल हुआ। वह अपनी उस खुशी को उसके साथ सेलिब्रेट करना चाहता था जिसकी बदौलत यह संभव हुआ। और जब पता चला कि वह तो काफी पहले ही मर चुकी थी एक एक्सीडेंट में। यह उसके लिए अविश्वसनीय था। अचानक ही उसे महसूस हुआ कि शायद उसे उस लड़की से प्रेम हो गया है।
वह उस जगह लौट कर जाता भी है जहाँ उससे पहली मुलाकात हुई थी। एक परछाई थी वहाँ ,वह महसूस भी करता है पर अब वह असलियत जान गया था, लेकिन तब भी उसके प्रेम में कोई कमी नहीं थी। आत्माओं का यह निश्छल प्रेम इसी तरह होता है शायद।
अभी तक दिमाग में उस कहानी का नशा है। कहानी पूरी पढ़ लेने के बाद लिखने से पहले एक बार फिर से हमने उसे कहानी को पढ़ा। बहुत कुछ और भी लिखने का मन है लेकिन इतना ही बहुत।
एक लाजवाब कहानी के लिए आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ।
कुछ सुधार के साथ पुनः संप्रेषित –
आदरणीय सत्य शर्मा ‘कीर्ति’ जी!
बिल्कुल एक ही बैठक में, बिना पलक झपके जिज्ञासा और उत्सुकता के साथ आपकी कहानी अपने आप को पढ़ा ले गई। बिल्कुल ही अलग फ्लेवर की कहानी थी। वास्तव में कहानी दिल को छू गई।
वह पी सी एस की तैयारी कर रही थी और बच्चों को पढ़ाती भी थी। इसका मतलब था कि वह स्वयं तो पढ़ कर नौकरी पाना चाहती ही थी लेकिन पढ़ाने के पीछे उसके दो कारण हो सकते थे ;या तो पढ़ाना उसकी जरूरत थी या फिर वह यह चाहती थी कि दूसरे भी उसकी तरह आगे बढ़ें और अच्छी नौकरी करें।
अंत तो कल्पना से परे ही रहा।
जब वह जाने के लिए कहती है तो लड़का बेचैन हो कर बोलता है,” अभी तो बाहर अंधेरा ही है कुछ देर बाद जाना ।”
लड़की बोली ,” अब नहीं रुक सकती , मुझे रोशनी होने के पहले जाना होगा ।”
“पर कुछ तो बता कर जाओ तुम कहाँ रहती हो ? कौन हो ? अगर मिलना हो तो कैसे मिलेंगे?”
“अब क्या करोगे मुझसे मिल कर ,अब मैं नहीं मिलूंगी ।”
यहाँ भी इस बात की कल्पना नहीं कर पाये कि वास्तविकता क्या हो सकती है।
अगर किसी की एक्सीडेंटल अकाल मृत्यु होती है, या किसी भी कारण से कोई असमय मर जाता है और उसकी तीव्र इच्छाएँ उसके मन में ही रह जाती है तो ,जैसा हमने सुना है कि आत्मा की मुक्ति नहीं हो पाती।
संभवतः यही कारण रहा हो लड़की की व्याकुलता का।इत्तेफाक से ही दोनों का मिलना हुआ रात के समय तब तक लड़के को उसके बारे में कुछ पता नहीं था।
लेकिन अंत बेहद खूबसूरत है लड़की उसके साथ उसके लॉज में गई उसने उसको पढ़ाया भी और उसको पढ़ाया हुआ उसे इतना अच्छे से समझ में आ गया कि कई बार के अथक तो से भी उसे परीक्षा में वह सफलता नहीं मिली पर उसके पढ़ाने के बाद सब कुछ उसे इतना क्लियर हो गया कि उसका रिजल्ट उसके पक्ष में रहा।
वह खुशी की असीम स्थिति से गुजर रहा था और उसे वह लड़की याद आ रही थी जिसके कारण व सफल हुआ। वह अपनी उस खुशी को उसके साथ सेलिब्रेट करना चाहता था जिसकी बदौलत यह संभव हुआ। और जब पता चला कि वह तो काफी पहले ही मर चुकी थी एक एक्सीडेंट में। यह उसके लिए अविश्वसनीय था। अचानक ही उसे महसूस हुआ कि शायद उसे उस लड़की से प्रेम हो गया है।
वह उस जगह लौट कर जाता भी है जहाँ उससे पहली मुलाकात हुई थी। एक परछाई थी वहाँ ,वह महसूस भी करता है पर अब वह असलियत जान गया था, लेकिन तब भी उसके प्रेम में कोई कमी नहीं थी। आत्माओं का यह निश्छल प्रेम इसी तरह होता है शायद।
अभी तक दिमाग में उस कहानी का नशा है। कहानी पूरी पढ़ लेने के बाद लिखने से पहले एक बार फिर से हमने उसे कहानी को पढ़ा। बहुत कुछ और भी लिखने का मन है लेकिन इतना ही बहुत।
एक लाजवाब कहानी के लिए आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ
इतनी अच्छी टिप्पणी के लिए मैं हृदय से आपका धन्यवाद करती हूँ।
आपने पढ़ी ,आपको पसंद आया इससे ज्यादा किसी लेखक के लिए क्या पुरस्कार हो सकता है ।
बहुत आभार आपका
बहुत-बहुत शुक्रिया आपका यह!आपने टिप्पणी पर संज्ञान लिया!
कथ्य और शैली दोनों ही अप्रतिम । सत्या शर्मा जी आपने बहुत रोचक कहानी बुनी है । बहुत बहुत बधाई ।