Sunday, April 19, 2026
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संपादकीय – पहलगाम शहीदों को लंदन में श्रद्धांजलि

भारत के राजनीतिक दल और सोशल मीडिया पर बार-बार एक सवाल उठाया जा रहा है कि सुरक्षा में चूक कैसे हो गई? पुरवाई संपादक मंडल ने इस बारे में गहराई से विचार किया तो हमने पाया कि विश्व में एक भी देश ऐसा नहीं है जहाँ आतंकवादी हमलों से बचने का कोई ऐसा मॉडल हो, जिसको आतंकवादी कभी तोड़ न पाएं। यहाँ तक कि इज़राइल में भी हमास के आतंकवादी घुसपैठ कर गए।

22 अप्रैल 2025 का मनहूस दिन ऐसा दिल दहला देने वाला समाचार लेकर आया कि हर भारतवासी और भारतवंशी के साथ-साथ पूरा विश्व स्तब्ध रह गया। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में सीमा-पार के आतंकियों ने 26 भारतीयों की गोलियों से नृशंस हत्या कर डाली। उनका कसूर यही था कि वे हिन्दू थे और कलमा पढ़ना नहीं जानते थे। 

गुरुवार 24 अप्रैल की शाम लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में मृतक पर्यटकों के सम्मान में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस शोक सभा में उच्चायुक्त महामहिम श्री विक्रम दोरायस्वामी के अतिरिक्त ब्रिटेन की उप-विदेश मंत्री सुश्री कैथरीन वेस्ट, सांसद बॉब ब्लैकमैन, भारत के राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन, महाराष्ट्र राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री श्री संजय पांडुरंग शिरसाट, बैरोनेस वर्मा, ब्रिटिश सरकार के सांसद एवं लॉर्ड्स श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित रहें। कथा यूके और पुरवाई पत्रिका की ओर से मैंने स्वयं वहाँ श्रद्धासुमन अर्पित किए। वरिष्ठ हिंदी पत्रकार एवं सिनेमा विशेषज्ञ ललित मोहन जोशी, कवि-गीतकार डॉ. ज्ञान शर्मा एवं आशीष मिश्रा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
‘पुरवाई’ पत्रिका की जम्मू-कश्मीर प्रतिनिधि डॉ. मुक्ति शर्मा से जब हमने बातचीत की, तो उन्होंने अपने शब्दों में हमें बताया कि, “22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला मानवता पर एक भीषण प्रहार था। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध बाइसरन घाटी में चार आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्ममता से हत्या कर दी और 17 को घायल कर दिया। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने पीड़ितों को धार्मिक आयतें पढ़ने को मजबूर किया और न मानने पर उन्हें गोली से मार दिया गया। यह दिल दहला देने वाला दृश्य कश्मीर की वादियों को खून से रंग गया।”
“हमले की जिम्मेदारी ‘कश्मीर रेजिस्टेंस’ नामक संगठन ने ली, जिसे भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बताया है। घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध सीमित कर दिए, सिंधु जल संधि निलंबित करते हुए, सीमा पर कड़े सुरक्षा प्रबंध बढ़ा दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह ने इस हमले की तीव्र निंदा करते हुए आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई का संकल्प लिया।”
दरअसल ऐसा पहली बार हुआ है कि पहलगाम में सीमा-पार से आए आतंकवादियों ने ऐसी भयंकर वारदात को अंजाम दिया है। इस क्षेत्र को तुलनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित माना जाता रहा है। यहाँ एक बात बताने लायक है कि इस इलाके में पक्की सड़क नहीं है। कश्मीर के घोड़ा सवारी कराने वाले वाहकों ने सरकार पर काफ़ी दबाव डाला है कि यदि यहाँ सड़क बन गई, तो उनका पूरा धंधा चौपट हो जाएगा। शायद इसीलिए सुरक्षाकर्मियों को घटना स्थल तक पहुँचने में अधिक समय लगा होगा।  

17 अप्रैल को पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम  मुनीर ने इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों के सम्मेलन को संबोधित किया था। इस सम्मेलन में जनरल मुनीर ने जम कर हिन्दुओं के विरुद्ध विष-वमन किया और टू-नेशन थ्योरी की खूब वकालत की। जनरल मुनीर ने ‘ओवरसीज़ पाकिस्तानी कन्वेंशन 2025’ में कहा कि पाकिस्तान के लोगों को अपने देश की कहानी बच्चों को ज़रूर सुनानी चाहिए, जिससे वे पाकिस्तान की कहानी न भूलें। 
उन्होंने हिंदुओं का ज़िक्र करते हुए कहा, कि “हमारे पूर्वजों ने सोचा कि हम जीवन के हर क्षेत्र में हिंदुओं से अलग हैं… हमारा धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज़ अलग हैं… हमारी संस्कृति अलग हैं और हमारी सोच अलग हैं… हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं… यह दो राष्ट्र के सिद्धांत की नींव थी।” 
जनरल मुनीर ने कहा, “हम दो देश हैं, हम एक देश नहीं हैं. इस देश के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिए हैं। उन्होंने इस देश को बनाने के लिए बहुत ज़्यादा त्याग किया है। हम जानते हैं कि इसकी रक्षा कैसे करनी है।”
जनरल मुनीर ने कश्मीर का ज़िक्र करते हुए कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तानी सेना और सरकार का रुख़ स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “कश्मीर पर हमारा (यानी कि पाकिस्तानी सेना) और सरकार का रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है। हम इसे नहीं भूलेंगे। हम भारत के कब्ज़े के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वाले अपने कश्मीरी भाइयों को नहीं छोड़ेंगे।”
जनरल मुनीर के इस ज़हरीले भाषण के ठीक पाँच दिन बाद पहलगाम में सीमा-पार से आए आतंकवादियों ने 26 हिन्दू पर्यटकों की नृशंस हत्या कर डाली। यह पहला मौक़ा था, जब मारने वालों ने मरने वालों से उनके धर्म के बारे में पूछा… कलमा पढ़ कर सुनाने के लिए कहा और न पढ़ पाने पर उन पर सीधे गोलियाँ चला दीं।  
पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को समर्थन मिल रहा है. इस क्रम में अमेरिका ने बड़ा ऐलान किया है। अमेरिका ने कहा है वह पहलगाम हमले के आतंकियों को दबोचने में भारत की मदद करेगा। इसकी घोषणा ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने की। उन्होंने इस भयावह हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और भारत के लोगों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि-
“हमले के बाद हम भारत के साथ एकजुट हैं, जिसमें पहलगाम में 26 हिंदुओं को निशाना बनाकर मार डाला गया। मेरी प्रार्थनाएं और गहरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया. हम आपके साथ हैं और इस जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को दबोचने में आपका समर्थन करेंगे।” 
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से संपर्क कर गहरी संवेदना और आतंक के खिलाफ सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। 

भारतीय उच्चायोग की श्रद्धांजलि सभा में ब्रिटिश सांसद पद्मश्री बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि ब्रिटेन के सभी राजनीतिक दल भारत सरकार के साथ मिलकर अपना समर्थन व्यक्त करेंगे, चाहे भारत जो भी कदम उठाए, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है, ताकि नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया जा सके।
हैरो पूर्व से कंजर्वेटिव सांसद पद्मश्री बॉब ब्लैकमैन ने इंडिया हाउस में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि हम दुख बाँटने आए हैं। जब आतंकी हमला होता है, तो यह हमला मानवता पर होता है। आतंकवादी हमला लोगों के धर्म के कारण उनके प्रति घृणा को दर्शाता है, और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मैंने हाउस ऑफ कॉमंस में इस मुद्दे को उठाया है।
भारत के राजनीतिक दल और सोशल मीडिया पर बार-बार एक सवाल उठाया जा रहा है कि सुरक्षा में चूक कैसे हो गई? पुरवाई संपादक मंडल ने इस बारे में गहराई से विचार किया तो हमने पाया कि विश्व में एक भी देश ऐसा नहीं है जहाँ आतंकवादी हमलों से बचने का कोई ऐसा मॉडल हो, जिसको आतंकवादी कभी तोड़ न पाएं। यहाँ तक कि इज़राइल में भी हमास के आतंकवादी घुसपैठ कर गए।
यही नहीं, आरोप तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि बिहार चुनावों के मद्देनज़र यह नरसंहार भारत सरकार ने स्वयं करवाया है। कांग्रेस के एक नेता ने तो यह इल्ज़ाम भी लगाया कि हिंदुओं को निशाना बना कर इसलिये मारा क्योंकि मुसलमान डरा हुआ है यह उस डर की प्रतिक्रिया है।
पाकिस्तान ने इस बार पर्यटक सीज़न के उफ़ान पर पर्यटकों पर हमला करके लोकल कश्मीरियों के पेट पर लात मारी है। तमाम होटल, शिकारे, रेस्टॉरेंट आदि ख़ाली हो चुके हैं। इसका असर कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से होगा। इलाक़े के कश्मीरी रो रहे हैं कि इन पाँच-छः महीनों में ही तो वे पर्यटकों से कमाई करते हैं और साल भर घर चलाते हैं। एक ऐसा ही कश्मीरी रो-रो कर कह रहा था कि इससे तो अच्छा था कि आतंकवादी हम सबको ही मार जाते।

स्काई न्यूज़ को दिये गए एक साक्षात्कार में जब येलदा हकीम ने उनसे पूछा, “क्या आप यह मानते हैं कि पाकिस्तान एक लंबे अरसे से आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है और उनको प्रशिक्षण देने के साथ-साथ दहशतगर्द तंज़ीमों को फंडिंग भी करता रहा है। 
तो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने सीधे-सीधे स्वीकार किया कि पाकिस्तान दशकों तक पश्चिमी देशों के लिए दहशतगर्दों को फ़ंडिंग करता रहा है और उन्हें ट्रेनिंग देता रहा है। इस तरह शायद पहली बार पाकिस्तान के किसी मंत्री ने टीवी चैनल पर यह स्वीकार किया है कि पाकिस्तान आतंकवादी पैदा करने की फैक्ट्री है। 
शुक्रवार 25 अप्रैल 2025 को लंदन में पाकिस्तान के दूतावास के बाहर कुछ भारतीय संगठनों ने प्रदर्शन किया और पाकिस्तान विरोधी नारे लगाने के साथ-साथ भारत माता की जय के नारे लगाए। वहीं भारत द्वारा लगाए गए प्रत्येक बैन के जवाब में पाकिस्तान की ओर से भी तमाम बैन लगा दिए गए, जिसमें भारत की उड़ानों के लिए पाकिस्तान की एअर स्पेस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना उल्लेखनीय है। 
अभी क्षेत्र में तनाव है। भारतवासियों एवं भारतवंशियों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगे न होने पाएं। जो पाशविक घटना पहलगाम में हुई है, हर भारतीय को बिना किसी न-नुकूर के उसकी निंदा करनी चाहिए। हमें शोर मचाने की ज़रूरत नहीं है – न सड़कों पर और न ही टीवी चैनलों पर। सरकार को अपना काम करने देना चाहिए।
एक समाचार यह भी मिला है कि जो पाकिस्तानी भारत के अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, उन्हें भी भारत छोड़ने के लिए कह दिया गया है। इस संदर्भ में पुरवाई की सलाह भारत सरकार को यह अवश्य रहेगी, कि जो लोग पहले से इलाज करवा रहे हैं, उन्हें इलाज पूरा होने तक रहने दिया जाए। हाँ, नये मरीज़ों को भले ही मेडिकल वीज़ा देने पर रोक लगा दी जाए। 
(इस संपादकीय लेख के लिये चित्र हमारे मित्र विनीत जौहरी ने उपलब्ध करवाए हैं।)
तेजेन्द्र शर्मा
तेजेन्द्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.
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40 टिप्पणी

  1. पहलगाम में हुई आतंकी नरसंहार हिंसा हत्याओं पर केंद्रित यह संपादकीय साँसों की तरह अपेक्षित था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हैवानियत और क्रूरता की सभी सीमाएं लांघता हुआ वीभत्स कृत्य था। संपादकीय में सभी संबद्ध पक्षों और बिंदुओं की स्थान दिया गया है पर प्रमाणिकता और प्रासंगिकता के आधार पर।
    एक मुद्दा जो विपक्ष के मुखौटे के पीछे शैतानी शक्तियां उछाल रही हैं। वह है सुरक्षा में चूक!!! संपादकीय ने इजरायल और हमास का सटीक उदाहरण औचित्य के आधार पर सभी ऐसी शैतानी शक्तियां को आईना दिखाया है।
    भारतीय नेतृत्व ने इस बार ग़ज़ब का संयम और रणनीतिक कौशल की इस बार अविस्मरणीय नज़ीर और युक्तिसंगत मजबूती दिखाई है और वह हैं सिंधु नदी की कुत्सित संधि को रद्द करना और समूचे विश्व को बताना कि बंदूक से सारे मसले हल नहीं होते हैं।यह साहस भरा अनुशासित अनुशंसित और अवश्यंभावी कदम,हमारी कूटनीति और सोच को उकेरता है कि हम विश्वगुरु क्यों कहलाते थे और क्यों कहलायेंगे।
    संपादकीय ने सही दूर दृष्टि से बात कही है कि हमारे देश में आपसी सौहार्द ना खराब होने पाए। यदि हम ऐसा कर पाए तो यही आतंकी देश जो संभावित जल प्रहार की रणनीति से घुटनों पर आ रहा है इसका प्रमाण पड़ोसी देश के रक्षा मंत्री का विधवा विलाप है जिसमें उन्होंने स्वीकारा है कि हाँ, उनके यहां पर आतंकी संगठनों की नर्सरी और प्रशिक्षित शैतानों की खेप तैयार होती है और इसमें महाशक्तियों का भी नाम उन्होंने साफ साफ लिया है।
    इंग्लैंड जैसे देश में वहां के राजनैतिक और प्रत्येक क्षेत्र की हस्तियों का शामिल होना और उन हत्याओं पर विरोध और शोक प्रकट करना,सच्चाई स्वयं ही बयां करता है।
    संपादकीय का यह मशवरा प्रशंसनीय है कि सरकार को अपना काम करने देना चाहिए।
    जौहरी जी को भी साधुवाद सभी फोटोज को उपलब्ध करवाने हेतु।

    • आपसी सौहार्द बहुत आवश्यक है भाई सूर्यकांत शर्मा जी। जी सरकार को अपना काम करने देना चाहिए।

  2. इस बार का संपादकीय – ‘पहलगाम शहीदों को लंदन में श्रद्धांजलि ‘ 22 अप्रैल 2025 की आतंकी घटना को लेकर लिखा गया है। यह घटना बहुत ही क्रूर और बर्बर है। आतंकियों की हिन्दू लोगों के प्रति यह नफरत इतनी अमानवीय है कि भारत के साथ समूचा विश्व हतप्रभ है। विश्व के लगभग हर देश ने इसकी निंदा की है।
    लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में मृतकों के सम्मान में शोक सभा हुई जिसमें लंदन की उप विदेश मंत्री तथा सांसदों के साथ पुरवाई पत्रिका के संपादक आदरणीय तेजेन्द्र जी भी शामिल रहे। भारत की ऐसी दुखद घड़ी में यह सांत्वना सुकून पहुंचाने वाली है। अमेरिका ,फ्रांस, रूस, इजरायल आदि अन्य देशों ने इसकी निंदा ही नहीं की बल्कि आतंकवाद के खात्मे में सहयोग का आश्वासन भी दिया है।
    पाकिस्तान केवल भारत के लिए ही नहीं वरन् पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है। पाकिस्तान की सीमा से सटे देश ही आजिज नहीं हैं बल्कि इस्लामिक देश भी इसकी हरकतों से परेशान हैं।
    इस घटना ने सभी की आंखें खोल दी है। ये लोग किसी के नहीं हो सकते हैं। किसी के क्या, ये स्वयं अपने देश के नहीं है तो भला ये और किसके हो सकते हैं।दुनिया में इनका कोई विश्वास नहीं करता है। अब तो कोई देश अपने यहां बैठने न देगा।
    इस समय भारत में बराबर बैठकों का दौर जारी है। हमारी सरकार जो भी निर्णय लेगी वह सोच समझकर लेगी। पूरा देश सरकार के साथ खड़ा है। विपक्ष भी सरकार के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
    भारत में हिन्दू बहुसंख्यक हैं। हिन्दुओं पर टारगेट करने पर भी उसने ऐसा कुछ होने नहीं दिया है जिससे कि भारत की एकता में किसी तरह की बाधा पहुंचे। इसमें भारतीयों की परिपक्वता स्पष्ट नजर आ रही है। विश्व की नजर इस पर बनी हुई है।
    भारत में घूमने आए या कुछ दिन रहने आए सारे पाकिस्तानियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया गया है। सरकार ने आदेश में बहुत स्पष्ट कह दिया हैं। इलाज करा रहे पाकिस्तानियों को भी देश छोड़ना होगा। इस स्थिति में पाकी मरीजों का ट्रीटमेंट जारी रहता है या नहीं, यह सरकार को तय करना है। वैसे सरकार पहले देश देखेगी।

    • भाई लखनलाल पाल जी, आपने अपनी विस्तृत टिप्पणी में संपादकीय के हर पहलू को समेट लिया है। हार्दिक आभार।

    • महत्वपूर्ण संपादकीय है सर.. आतंकवाद के इस घृणित , नृशंस अपराध की कड़ी निन्दा करनी चाहिए।

  3. तेजेन्द्र जी!
    अप्रत्याशित एवं बेहद -बेहद निन्दनीय है यह घटना और अकल्पनीय भी। उनके अपने धर्म में भी यह नहीं लिखा होगा जो उन्होंने किया।
    जनरल मुनीर का भाषण भी संभवत आग में घी की तरह है।
    यह बात सही है कि कश्मीरियों के लिए यह बहुत मुश्किल का समय है।
    सारी दुनिया भारत के साथ है यह एक सकारात्मक पहल है भारत के लिये। सारी दुनिया से धार्मिक कट्टरता के नाम पर दहशतगर्ज फैलाने वाले ऐसे हत्यारों को सबक सिखाने के लिए सबका एक होना जरूरी है।
    बहुत समयिक और महत्वपूर्ण जानकारी के साथ है संपादकीय।
    कुछ हैवानों की वजह से मानवता लहूलुहान है।
    सरकार इस अमानवीय कृत्य के प्रतिरोध के लिये कृतसंकल्प है।

  4. आदरणीय नीलिमा जी, आपकी टिप्पणी समग्रता में संपादकीय को समझने में सहायक सिद्ध होगी।

  5. आपने स्थिति को समग्रता से बयां किया है और विवेचना की है। भारतीयों की नज़र भारत सरकार के आगामी कदम पर है।

  6. सरकार ने माना है सुरक्षा चूक हुयी है। और कोई भी सरकार हो, यह होती रही है। मंबई हमला हो( ताज वाला), कारगिल हो। मुहम्मद गोरी के समय भी,जब पृथ्वीराज चौहान ने उसे पहले छोड़ दिया था। बाद में हिन्दू ही मुसलमान बने। मनुष्य को लड़ने के लिए कुछ चाहिए। महाभारत तो एक ही राज परिवार में हो गया था। फिर एक समय आया,” को नृप होय हमें क्या हानि!” अब प्रजातंत्र में वोट का प्रश्न भी है। सीमा तो चीन ,नेपाल से भी हमारी लगती है लेकिन वहाँ ऐसी नृशंस घटनाएं नहीं होती हैं। कुछ तो कारण हैं जिन कारणों से कुछ लोगों की मानवता में भयंकर गिरावट आयी है। पहले केवल सेनायें लड़ती थीं।”शठे शाठ्यम समाचरेत्”-विदुर नीति।

  7. वाकई ये बेहद गलत और दुःखद है, इस पर एक और तथ्य का ध्यान दिलाना चाहूंगा कि भारत का तथाकथित प्रगतिशील समाज कुत्सितपूर्ण तरीके से ये नरेशन चलाने में लगा है कि धर्म पूछ कर हत्याएँ नहीं की गईं फिर उसी सांस में ये भी कह देता है कि एक मुस्लिम भी बचाने में मर गया, ऐसे ही कहता है कि आतंकी का धर्म नहीं होता और उसी सांस में ये भी कह देता है कि मुस्लिमों ने बहुत मदद की। ऐसे विरोधाभाषी तथ्य से खुद ही बेनकाब हो रहा है और जो हुआ उसके भुक्त भोगियों के वीडियो उनको नंगा करने में लगे हैँ। मुझे नहीं लगता कि ये वर्ग कभी कुछ सीख लेगा समय के साथ

  8. आदरणीय तेजेन्द्र जी,

    इस संपादकीय में आपने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में घटित उस नृशंस आतंकवाद का पूरा विवरण अच्छी तरह से दिया है। जिसके बारे में सुनकर पूरा देश दहला हुआ है। और इसे लेकर आपने भारत व अन्य देशों की राजनीतिक गतिविधियों को भी स्पष्ट किया है। इस विस्तृत जानकारी के लिये आपका बहुत धन्यवाद।

    इस बार तो इन आतंकियों ने सारी हदें ही पार कर दीं। धर्म के नाम पर यह इंसान को इंसान नहीं समझते। किसी का कोई भी धर्म हो किन्तु एक धर्म ऐसा है जो सभी के लिए हो और विश्वव्यापी हो। और वह धर्म है इंसानियत। अगर हम इस धर्म को सब धर्मों से सर्वोपरि रखें तो आतंकवाद के भयानक कांड ही न होने पाएं। और धर्म बाद में लेकिन सबसे पहले मानवता ही सबका धर्म होना चाहिए।

    पहलगाम की उन खूबसूरत वादियों में घूमने गये हंसते-मुस्कुराते उन तमाम लोगों को मार दिया गया जिन्हें उन पलों का कोई अंदेशा तक नहीं था। इन आतंकियों ने किसी का सुहाग उजाड़ा, किसी की गोद और किसी के सिर से पिता का साया छीन लिया। क्या इनके मन में दूसरे धर्म के लोगों के प्रति जरा भी सम्मान नहीं?

    ऐसा करने से इन आतंकियों को क्या हासिल हुआ? इन्होंने न केवल कई परिवारों को जीवन भर का दर्द और आँसू दिये बल्कि अपने हाथों अपना भी भविष्य बर्बाद कर लिया। अब क्या ये लोग अपने गुनाहों के लिये सरकार के हाथों से बच सकेंगे। अपने दुष्कर्मों की इन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। ऐसी सजा जो सभी आतंकियों को ऐसा सबक सिखाये कि वह सही रास्ते पर आ जायें। और आगे से आतंकवादियों का नामो निशान मिट जाये।

    न फलती-फूलती है
    वह जमीं कभी
    जहाँ आतंक है जारी।

    इन दुराचारियों ने
    कश्मीर के टूरिज्म व
    वहां के स्थाई लोगों के
    पेट पर ऐसी लात मारी
    जो उन पर ही पड़ी भारी
    अब न जायेंगे लोग वहां
    करने को घुड़सवारी
    तब भूखे रहेंगे वहां लोग
    जब न मिलेगी रोजगारी।

    न फलती-फूलती है
    वह जमीं कभी
    जहाँ आतंक है जारी।

    -शन्नो अग्रवाल

    • शन्नो जी आप विश्व में कहीं भी रहें, पुरवाई के संपादकीय पर आपकी नज़र हमेशा रहती है। इस कवितामयी टिप्पणी के लिये दिली शुक्रिया।

  9. यह बहुत ही दिल को तोड़ने वाली त्रासदी है। मेरी बार-बार आंखें नम हो जाती है उस बच्ची का सोचकर जिसकी अभी शादी को मात्र 6 दिन हुए थे और एक के मात्र दो महीने। एक नई ज़िंदगी की शुरुआत हुई थी — सपनों से भरा एक नया सफर शुरू ही हुआ था, और इतनी जल्दी वो सब …… बहुत ही भयावाह।

  10. आदरणीय संपादक महोदय, काश्मीर में हुई नृशंस घटना के लिए पूरे विश्व साहित नीदरलैंड, सूरीनाम के भारतीय प्रवासियों ने ही नहीं बल्कि डच सरकार व भारतीय संगठनों ने भी अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं । पाकिस्तानी यूरोप में नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम जहाँ भी रहते हैं वह अपने को कभी भी खुलकर पाकिस्तानी नहीं बताते । वह कहते हैं हम पंजाब से हैं । उन्हें यह बहुत अच्छी तरह से पता है यदि उन्होंने अपना सच बताया तो इसका असर उनकी नौकरी व कारोबार पर पड़ेगा । मेरा कहने का अर्थ यह है कि उन्होंने कोई काम ऐसा नहीं किया जिसके कारण यह गर्व से सबके सामने कह सकें हाँ हम पाकिस्तानी हैं । उस पर पहलगाव की घटना में पूरे विश्व में उनका नाम स्याह अंक्षरों में लिख दिया । भारतीय सरकार से इससे भी पहले से रही चूके होती रहीं हैं । इस संपादकीय में मुख्य रूप से आपने आंतकवाद की समस्या पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी को सावधान तो किया ही है साथ ही मानवता निभाते हुए सरकार को बिमारी के निदान के लिए आए पाकिस्तानी लोगों के इलाज को बरकरार रखने का सुझाव भी दिया है । यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी उदारता है जो हमें दूसरों से अलग बनाती है । पुनः एक समसामयिक विषय पर संपादकीय लिखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    • ऋतु जी, आपने अपने अनुभव साझा करके संपादकीय को और नये पहलू प्रदान किये हैं। हार्दिक आभार।

  11. Your Editorial of today is a vital piece of information of the Pehalgam incident as well as a significant reference to various terrorist attacks all the world over,specially during these turbulent times where so many other countries too face such barbaric terrorist activities.
    This particular Pehalgam incident brings it close to this kind of horror and deservedly needs updating n reflection.
    Thanks for making this your subject for your Editorial of this week.
    Warm regards
    Deepak Sharma

  12. सादर प्रणाम भाई,
    आज का संपादकीय वैचारिक, चिंतन और मानवीयता के धरातल पर बेहद सफल और सारगर्भित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।आपका संपादकीय घटनाओं की जिस सूक्ष्म दृष्टि से पड़ताल करता है वह सराहनीय है। मै तो आपका संपादकीय पढकर ही घटना की सच्चाई और विश्वसनीयता को परती हूं।मुझे राजनीतिक बातें समझ नहीं आती।पहलगांव में घटी घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। अभी ही तो.शांति बहाल हुई थी,लोगों ने केसरघाटी के सौंदर्य को एक बार फिर निहारने का मन बनाया,वहां पर्यटकों का आना जाना बढा था,लेकिन अचानक ये घटना पूरे विश्व को चौंका गई। धर्म पूछकर गोली मार देना ,कलमा पढने का दबाव बनाना, सचमुच गबत सिद्ध करता है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता।यहां तो आतंक धर्म का सहारा लेकर आया।आक्रोश, प्रतिहिंसा की ज्वाला भडका गया।आपकी उम्मीदें बनी रहें,,हम रहें या न रहें बस देश यह जिंदा रहे।आपने लिखा सादर प्रणाम भाई,
    आज का संपादकीय वैचारिक, चिंतन और मानवीयता के धरातल पर बेहद सफल और सारगर्भित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।आपका संपादकीय घटना ओं की जिस सूक्ष्म दृष्टि से पड़ताल करता है वह सराहनीय है।

    • प्रिय पद्मा हमारा प्रयास रहता है कि समस्या को सभी पहलुओं से समझें और अपने पाठकों तक पहुंचाएं। आपका समर्थन हमारे लिये महत्वपूर्ण है।

  13. आदरणीय प्रिय तेजेंद्र जी पहलगाम पर हुई ताजा तरीन आतंकवादी हमले की घटना पर आपका संपादकीय बेहद उल्लेखनीय है, लोग कहते थे कि कलयुग आएगा तब कोई किसी का ना अपना होगा ना पराया, आदमी स्वयं के लिए कुछ भी करेगा,मानवता नष्ट हो जाएगी ,चारो तरफ त्राहि त्राहि होगी ,आए दिन समाचारों में आस पास में देश विदेश में अमानवीय ,लोमहर्षक हृदय विदारक कर देने वाली घटनाये ये घोषणा कर रही हैं कि घोर कलयुग आ ही गया है,
    संपूर्ण विश्व इस कृत्य की भर्त्सना कर रहा है यूके कथा पुरवाई की तरफ से आपकी प्रतिक्रिया के साथ संपादकीय इस बात का द्योतक है,मानवता को शर्मसार करने वाली घटना
    घटी है , कहते हैं,लहू का रंग सभी का एक होता है तो क्या इन आतंकवादियों की कोई मां ,बहन पत्नी,बच्चे दोस्त, पिता जैसे रिश्ता नहीं होता ? या उन्हें कोई दर्द नहीं होता ?
    बड़े ही अफसोस की बात है की पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्वयं अपने वक्तव्य में कहा है कि आतंकवादियों को ट्रेनिंग दी जाती रही है, इस बात को कबूल करना ,सभी देशों को गौर करना चाहिए और एकजुट होकर इस पर कार्यवाही करने की हिदायत भी देनी चाहिए।
    ताकि मानवजीवन इसी अकाल मृत्यु से निर्भय हो सके।
    संपादकीय में एक जगह भारत के विपक्ष द्वारा यह भी कहा गया कि यह बिहार के आगामी चुनावों
    के लिए बनाई भूमिका है
    यह भी हो तो भि घोर कलयुग
    उम्मीद हे भारत सरकार युद्ध को छोड़कर कुछ सटीक निर्णय लेगी
    युद्ध सर्वथा हानिकारक हुए हैं ,हमारे सामने कई उदाहरण अभी भी चल रहे हैं,
    अभी 26 निर्दोष आतंक के शिकार हुए
    युद्ध में हजारों लाखों निर्दोष सैनिक जो एक दूसरे को जानते भी नहीं
    देश के नाम पर
    सभी रिश्तों का कत्ल हो जाता है
    हम सब भारतवासी धैर्यपूर्वक रहें कोई भड़काऊ कविता लेख भाषणबाजी न करे, मैं सोशल मीडिया पर अभी देख रही हूं कई कई संभाषण मार डालेंगे काट डालेंगे ,दुश्मनों को खत्म कर दो नाम निशान मिटा दो दुश्मनों को भून डालो ,

    अरे लिखने वाले भाषण देने वालों तुम्हारे घर से कितने बेटे, बेटियां सेना में भर्ती हुए हैं ? पहले ये बताओ ?

    मित्रों पड़ोसियों का ख्याल रखें ।
    सरकार पर विश्व के सभी पुरोधाओं पर विश्वास रखें
    कोई राह तो जरूर होगी जो मानवता की मंजिल पर पहुंचती होगी
    प्रिय तेजेंद्र सर इस संपादकीय के लिए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आपको साधुवाद
    कुंती हरिराम झांसी

    • कुन्ती जी आपने बहुत वाजिब सवाल पूछे हैं। आपकी सार्थक टिप्पणी महत्वपूर्ण है।

  14. पहलगाम की घटना दिल दहला देने वाली है, बहुत आक्रोश भर गया है मन में ….आपने सही कहा कि इस समय शोर करने से बेहतर है सरकार को कड़े कदम उठाने में हम सब सहायक हो…

  15. तजेंद्र सर ने अपने संपादकीय में पहलगाव मे हुए नरसंहार घटना का वर्णन बहुत ही संजीदगी के साथ किया है । संपादकीय पढ़ते ही यह दुखद घटना आंखों के सामने साक्षात आ जाती है । तेजेंद्र सर ने बहुत ही ज्वलंत मुद्दे को अपने संपादकीय का विषय बनाया ,इसके लिए मैं सर को साधुवाद देती हूं

  16. समसामयिक आलेख होते हैं आपके सदा। अब इस मुद्दे पर इतना कहा सुना जा चुका है कि मैं क्या ही कहूँ। पर दो सवाल मेरे मन में आते ही हैं कि ये सुरक्षा में चूक नहीं तो क्या है? और इतने महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर कोई भी मेडीकल या आपातकालीन प्रबन्ध न होना लापरवाही नहीं तो क्या है। हम अपनी भूलों की समीक्षा नहीं करेंगे तो हालात को सुधारेंगे कैसे?
    एक बात और जैसे हम अपने देवताओं की हर ग़लत बात के लिये कोई न कोई कहानी गढ़ लेते हैं वही यहाँ भी हो रहा है।
    आम लोग इन बातों से त्रस्त हैं। पाकिस्तान को अब सबक असल में सिखाना चाहिये पर उसके पीछे चीन का हाथ है और चीन जो करता है चुपचाप करता है उछल कूद नहीं मचाता।

    • ज्योत्स्ना जी, आप ने इस कंपलेक्स मुद्दे पर सही सवाल उठाए हैं। भूलों की समीक्षा करना अति आवश्यक है।

  17. पहलगाम में हुई घटना बेहद दर्दनाक, विचलित करने वाली है। धर्म पूछकर, कलमा न पढ़ पाने पर उनकी पत्नी और बच्चों के सामने ऐसी नृशंस घटना कल्पना से भी परे है पर हुई तो है। शायद ही कोई संवेदनशील इंसान इस घटना के पश्चात् चैन की नींद so पाया होगा। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ एक कौम की वह जिहादी मानसिकता है जिसके अनुसार इस धरती पर सिर्फ उन्हें ही रहने का अधिकार है।
    द्वि राष्ट्र का सिद्धांत देकर इस जिहादी मानसिकता को जिन्ना ने परोसा तथा उसके बाद की पीढ़ियों ने इसे पुष्पित एवं पल्लवित ही किया। इसका उदाहरण पाकिस्तानी जरनल आसिम मुनीर का हाल में दिया भाषण है।

    इस मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करना इसलिए संभव नहीं हुआ क्योंकि भारत के राजनेताओं ने प्रारम्भ से ही गंगा जमुनी तहजीब की बात की तथा इसे बनाये रखने की हर संभव कोशिश की है। प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह ने तो संसद में ही कहा था कि भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है।

    अल्पसंख्यक…ये अल्पसंख्यक कहाँ हैं कई प्रदेशों में ये बहु संख्यक हैं फिर भी इनका अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त नहीं किया आखिर क्यों?

    मोदी जी के आने पर परिस्थितियां बदली हैं। शायद इसी बौखलाहट का परिणाम है पहलगाम अटैक। हमें अगर इस मानसिकता को रोकना है तो पहले भारत में जगह-जगह बने इन पाकिस्तानी पॉकेट और इन जेहादी मानसिकता वालों पर लगाम कसनी होगी लेकिन क्या ऐसा हो पायेगा? वोट के लिए कुछ राजनेता अपने देश की अस्मिता से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं। इसका उदाहरण ममता बनर्जी हैं और केंद्र सुप्रीम कोर्ट (विधायिका के हर फैसले का परिक्षण) करने के कारण इतना लाचार है कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन भी नहीं लगा सकता…

    • सुधा जी मुद्दा काफ़ी उलझा हुआ है। इसका समाधान ढूंढना आसान नहीं होगा। इसे वैश्विक स्तर पर खोजना होगा।

  18. प्रिय तेजेन्दर, संपादकीय बहुत विशेष एवं महत्वपूर्ण।मृतक मित्रों को विनम्र श्रद्धांजलि।

  19. सभी तरह के हालात देखते हुये आपका संपादकीय संजीदा, संतुलित और सारगर्भित है। साधुवाद!

  20. यह संभव ही नहीं था कि पुरवाई इतने नाज़ुक, संवेदनशील विषय पर चुप रह पाती।
    यह सभी के लिए कष्ट पूर्ण है।बहुत सही कहा आपने कि सर्कार को अपना काम करने दें।
    सबसे अच्छी बात जो मुझे लगी, उस मानवीयता की कि जिनका इलाज चल रहा है कृपया उसे पूरा होने दें बेशक नए लोगों पर रोक लगा दी जाए।
    बहुत बहुत बधाई व अभिनंदन आपको, एक मनुष्य होने के नाते आपने बहुत सही भावना स्पष्टता से साझा की है।

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