अनीता सिद्धि की ग़ज़ल
पास आने में वक्त लगता है।
गलतियां रोज लोग करते हैं,
ज़ीस्त से दूर जाने वालों को
है कहीं प्यार तो कहीं नफ़रत,
ग़म उठाये हों मुद्दतों जिसने
अंधेरा ग़म का छटता जा रहा है।
सभी के हाथ मोबाइल है देखो,
गली, मैदान सब सूने से लगते,
हमारे गांव देखो रो रहे हैं,
युवा झूमे नशे में आज देखो,
कोई तो काम कर लो आप अच्छा,
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बहुत सुंदर ग़ज़ल
दोनों ग़ज़ल अच्छी लगीं।बधाई।