Saturday, April 18, 2026
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  रेणुका अस्थाना की कहानी- हाथी

“ बाबा, हाथी बहुत गन्दा होता है ना …अपनी बहुत सारी छोटी बड़ी गाड़ियों को एक दूसरे पर चढ़ाते , गिरते , टकराते रोहित ने बालू से पूछा जो डॉक्टर कार्तिक की लॉन की क्यारियों में गुलदाउदी के पौधे लगा रहा था।

“नहीं बाबू , कौन बोला आपसे …. हाथी काहे वास्ते गन्दा होता है ?”  हाथ में पकड़े पौधों को बहुत ही कोमलता से मिट्टी में रोपता बालू मुस्कुराया था।

“ वो सबको मरता है पटक – पटक कर।“ रोहित ने अपनी गाड़ियों को एक दुसरे पर पटकते हुए समझाया।” कल पापा आपको और माँ को बता तो रहे थे की एक रात सब्जी वाले चौराहे पर हाथी ने एक आदमी मारा था। दौड़ा – दौड़ा कर …. बड़े से पीर के नीचे …रोहित ने गाड़ी के साथ अपने शब्दों को भी खींचा था। बालू बच्चे को सुनता चुपचाप पौधा लगाता रहा। बच्चा गाड़ियों को चलाता ,भिडाता अपने में खुश होता रहा।

दोनों चुप थे , अपनी अपनी दुनियां में।

“ बाबा,  हाथी सबको क्यों मारता है?” अपनी साड़ी गाड़ियों को झूले पर फेंक बालू के पास बैठता बच्चा फिर अपने प्रश्न के साथ लौट आया। बालू के बगल में बैठ उसने क्यारी से निकाली मिट्टी को मुट्ठी में भर लिया।

“ हाथी क्या सबको मारेगा बाबू …खिन्नता से उसने क्यारी की लाल मिट्टी  को देखा था।“ साला एक आदमी मारा तो इतना चिल्ला चिल्ली (शोर शराबा)जब बहुतै हाथी मरे तब कुछ नहीं ? अजबै बिधान है ठाकुर … अपने आप में बोलता , बालू ने हाथ में पकड़े गुलदाउदी के पौधे के टुकड़े कर मिट्टी में गाड़ दिया।

“ क्या बोले बाबा … क्या बोले आप ?” रोहित मिट्टी फेंक बालू के और  पास खिसक आया।

“ कुछ नहीं बाबू , तुम जा के खेलो। देखो , उंहा सारी गाडी उलटी पड़ी है।”

“ नहीं , मैं नहीं जाऊँगा। पहले आप बताइए आप क्या बोले ? “

“हम बोल रहा था कि हाथी काहे वास्ते कोई को मारेगा। उ बेचारा तो खुदै भूख से मर रहा है …

“ तो खाना क्यों नही खाता?”

“जानते हो बाबा मेरी बुक में लिखा है – हाथी गन्ना खाता है। हरी हरी पत्तियाँ …

“ मिट्टी से उठो बाबू।” बालू ने रोहित को मिट्टी से उठाते हुए कहा। चलो इहां से। ई सब बात अभी तुम्हारे समझ में नहीं आने वाली।बच्चा हो तुम..बच्चा , समझे।” रोहित के कपड़े से मिट्टी झाड बालू ने उसे फिर से झूले पर बैठा दिया। “ तुम अब यहीं से बात करो नहीं तो ई साफ़ साफ़ कपड़ा गन्दा हो जाएगा फिर मम्मी मरेगा।”

“ बाबा , आपने हाथी देखा है।”

बालू के चेहरे पर बच्चों सी चमक उभर आई “ हाँ बाबू , देखा है।हाथी .. हाथी का बच्चा सब देखा है … पूरा परिवार। बहुत अच्छा लगता है जब अपने छोटे – छोटे बच्चन को बड़ा – बड़ा हाथी चारो ओर से घेर कर झुण्ड में ले चलता है। बहुत छोटे बच्चा को तो अपने पैर के बीच में ले चलता है… बालू ने गले में लपेटा अंगौछा निकाल कर बीच में डाल कर चल कर दिखाया| रोहित हंसने लगा।

“वाह रे ठाकुर …अहा रे ठाकुर की लीला”

 

  •  रेणुका अस्थाना, भिवाड़ी , राजस्थान, 9982448126

 

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