भारत को साँस्कृतिक और सहिष्णुता के अग्रदूत की भूमिका में प्रतिष्ठित करने को सदैव तत्पर एक महामानव पूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की अनूठी परिकल्पना को साकार कर भारत के नवोन्मेषी पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी ने उत्तराखंड में विश्व के प्रथम भव्य लेखक गाँव की स्थापना की है उस लेखक गाँव की अनवरत यात्रा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय आरम्भ हुआ। आज भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) और उत्तराखंड के देहरादून में स्थित ‘लेखक गाँव’ (स्पर्श हिमालयन लेखक गाँव) के बीच सद्भावना समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी की भारत को अद्भुत देन लेखक गाँव उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पास स्थित है। इसका उद्देश्य देश-विदेश के लेखकों को एक ऐसा शांत वातावरण देना है जहां वे स्वतंत्र रूप से लेखन और चिंतन कर सकें lइस समझौते के मुख्य उद्देश्य इस साझेदारी का मुख्य लक्ष्य कला, साहित्य, संस्कृति और भाषा का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना है। इसके तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण और नवाचार संपृक्त आयोजन सुनिश्चित होंगे :
साहित्यिक आदान-प्रदान: दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक कार्यक्रमों, लेखक सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे।सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा : इस समझौता ज्ञापन का एक महत्वपूर्ण अभीष्ट लेखक गाँव’ को एक ऐसे वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना भी है जहां दुनिया भर के लेखक, शोधकर्ता और कलाकार आकर अपनी रचनात्मकता को निखार सकें।
अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन : आगामी समय में ‘लेखक गाँव’ में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लेखक सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, जहाँ दुनिया भर के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार, कवि और चिंतक एक मंच पर जुटेंगे।
अनुवाद और शोध कार्यशालाएं : भारतीय भाषाओं के साहित्य को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए विशेष अनुवाद प्रोजेक्ट्स और शोध कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी, जिससे क्षेत्रीय व हिंदी साहित्य का विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो सके तथा शोधकर्ता की शोध के प्रति रुचि बढ़ेगी l
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और शोध परियोजनाएँ: दोनों संस्थान मिलकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत और लोक विद्याओं पर संयुक्त अनुसंधान (Joint Research) शुरू कर रहे हैं।
पांडुलिपि संरक्षण: उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों में बिखरी पड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों (Manuscripts) को खोजने, उनके डिजिटलीकरण और उनके संरक्षण के लिए IGNCA के विशेषज्ञ ‘लेखक गाँव’ के सहयोग से विशेष अभियान चलाएंगे।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान: IGNCA और लेखक गाँव संयुक्त रूप से लोक नृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक शिल्प और नाट्य उत्सवों का आयोजन करेंगे।
युवा प्रतिभाओं के लिए रेजिडेंसी प्रोग्राम: देश-विदेश के उभरते हुए लेखकों, शोधकर्ताओं और कलाकारों के लिए ‘रेजिडेंसी प्रोग्राम’ शुरू किए जा रहे हैं, जहाँ वे निश्चित समय के लिए रहकर ‘लेखक गाँव’ के शांत वातावरण में अपनी रचनात्मक परियोजनाओं को पूरा कर सकेंगे।
संयुक्त प्रकाशन : शोध पत्रिकाओं और पुस्तकों का विमोचन: अनुसंधान के जो भी परिणाम या निष्कर्ष सामने आएंगे, उन्हें IGNCA और ‘लेखक गाँव’ के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तकों, मोनोग्राफ और शोध-पत्रिकाओं के रूप में प्रकाशित किया जाएगा l
लेखक गाँव द्वारा आयोजित इन सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बिंदु ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के तहत भारतीय संस्कृति, साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और कलात्मक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करना है।
- प्रोफेसर डॉ किरण खन्ना
अघ्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग
डीएवी कॉलेज अमृतसर, पंजाब
