Friday, April 17, 2026
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गोपाल कौशल की दो बाल कविताएं

फिर बजेंगी स्कूलों की घंटी
चिडिया चूँ – चूँ करती आई
कोयल   गाना  गाती  आई ।
परिंदों का स्वर नभ में गूँजा
रश्मि प्रभा भी मुस्काती आई ।।
मम्मी-पापा सबका यह कहना
घर में रहना , घर पर ही पढ़ना ।
दादी हमें अच्छी बात समझाती
फिर खुलेंगे   स्कूल  धैर्य रखना ।।
घर – घर बनें स्कूल , बजी घंटी
पढ़ने  बैठो  गोलू  – राजू – बंटी ।
पढाई  न  रुकी  हैं ,  न  रुकेंगी
फिर  बजेगी   स्कूलों   में  घंटी ।।
आत्मनिर्भर
जीवन  के  हर  विकट  संकट  को
तारने के लिए बनें हम आत्मनिर्भर  ।
अपनी आत्मशक्ति को इतना  जगाएं
पर्वत को उठाकर बनें हम भी गिरधर ।।
राष्ट्र की  उन्नति  में  देकर योगदान
पा लें हम  खुशहाली  का  शिखर ।
जीवन  में  कभी न  होगी  निराशा
छू लेगें आसमां होकर आत्मनिर्भर ।।
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