Friday, April 17, 2026
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सुरंग – कान्ता रॉय

“माँ, आप तो चित्रा के बारे में जानती है सब कुछ, तो अब किस बात का संशय है?” अभि के कहते ही उसने चित्रा की ओर देखा।
“हाँ, बहुत खूबसूरत है। इसमें मुझे मेरी खोई बेटी नजर आती है।” और भावातिरेक में बह गई।
“आँटी, मै चाय बना लाऊँ?”
“नहीं, रहने दो, मै बना लाती हूँ!”
“आप तो रोज बनाती है।आज मै बना लाती हूँ?”
मन भँवर में फँसा हुआ था। क्या करें, होने दे जो होने वाला है। दायित्व-विहीन हो जाये। बेटे के व्याह का सपना, बहू की पीली हथेली, वर्षों से बहू आँखों के सामने नाचती थी। स्वप्न पूरा होने के लिए आज सामने हैै। इजाज़त उसे देनी होगी।
“अभि, तू ऐसा कर, बाज़ार से कुछ मीठा ले आ।” अचानक जैसे कुछ सूझ गया।
“आँटी, रहने दीजिये ना! ”
उसके हाथों को धीरे से दबा दिया। “जाने दे उसे, पढ़-लिख कर इतना बड़ा बन गया लेकिन अक्ल नाम का नहीं! जा, मीठा लेकर आ!”

वह झुँझलाकर सीढ़ियों की तरफ निकल गया।
“मै जानती हूँ कि तुम दोनों स्कूल के दिनों से दोस्त हो| ”
“जी, आँटी ”
“कितना जान पाई हो अभि को अब तक? ”
“अभि ? वे एक बहुत अच्छे इंसान है। ”
“सही कह रही हो। आजकल के लड़को के मुकाबले वह बहुत अच्छा है । शराब- सिगरेट कुछ नहीं पीता, आज तक कभी किसी लड़की को भी नहीं छेड़ा है।”
“जी , आँटी , मै उनसे बहुत प्यार करती हूँ|”
“हाँ , तुम दोनों की नौकरी भी अच्छी है|”
“जी, इसलिए तो हमारे विचार भी मिलते है|”
“हाँ ,तुम दोनों के विचार मिलते तो है लेकिन एक बात है उसकी …|”
“क्या आँटी ,कौन सी बात?”
“तुम उसके साथ विधिवत विवाह करो ,यह मेरा सपना था लेकिन मै नहीं चाहती हूँ कि तुम उससे बँध कर रहो । क्या तुम लिव – इन में नहीं रह सकती उसके साथ?”
“क्याs! आपने यह क्यों कहा , ऐसा तो आज तक किसी माँ ने नहीं कहा होगा ” वह भयभीत-सी हो उठी। मानो सांप सूंघ गया था !
“सुनो, उसकी हाथ उठाने की आदत है । वह बात – बात पर, मुझ पर अक्सर हाथ उठा लेता है। माँ हूँ, सहना मेरी क़िस्मत है लेकिन तुम् ….!”
“क्या कह रही है आप ? लेकिन वे तो आपसे बहुत प्यार करते है|”
“हाँ, वो प्यार भी बहुत करता है मुझे! इसलिए तो तुमसे कहती हूँ .. ” कहते ही अचानक से पसली की हड्डियों में फिर से दर्द जाग उठा।


कान्ता राॅयकान्ता राॅय

जन्म दिनांक- २० जूलाई, १९६९ जन्म स्थान- कोलकाता
शिक्षा- बी. ए.
लेखन की विधाएँ-लघुकथा, कहानी, गीत-गज़ल-कविता और आलोचना

सचिव: लघुकथा शोध-केंद्र भोपाल, मध्यप्रदेश

हिंदी लेखिका संघ, मध्यप्रदेश (वेवसाईट विभाग की जिम्मेदारी)

ट्रस्टी- श्री कृष्णकृपा मालती महावर बसंत परमार्थ न्यास।

सामाचार सम्पादक: सत्य की मशाल (राष्ट्रीय मासिक पत्रिका)

संस्थापक : अपना प्रकाशन


पुस्तक प्रकाशन :
घाट पर ठहराव कहाँ (एकल लघुकथा संग्रह),
पथ का चुनाव (एकल लघुकथा संग्रह),
आस्तित्व की यात्रा (प्रेस में)

सम्पादक:
चलें नीड़ की ओर (लघुकथा संकलन)
सोपान-4 (काव्य संकलन),
सहोदरी लघुकथा-(लघुकथा संकलन)
सीप में समुद्र-(लघुकथा संकलन)
बालमन की लघुकथा (लघुकथा संकलन)

भारत की प्रतिनिधि महिला लघुकथाकार(प्रकाशाधीन)

अतिथि संपादक-दृष्टि, लघुकथा पत्रिका, महिला लघुकथाकारों का अंक।

अतिथि संपादक -साहित्य कलश

एकल लघुकथा-पाठ : निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल।

आकाशवाणी भोपाल से कहानी, लघुकथाएँ प्रसारित, दूरदर्शन से कविताओं का प्रसारण.


लघुकथा कार्यशाला :

1. ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल फिल्म सिटी नोयडा, उ.प्र. में लघुकथा वर्कशॉप का आयोजन किया।

2. हिन्दी लेखिका संघ मध्यप्रदेश भोपाल में 2016 में

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1 टिप्पणी

  1. बंधन में बंधने से पहले एक दूसरे को जानना समझना बहुत जरुरी है।
    समाधान परक सार्थक रचना।

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