होमकवितानलिनी सिंह की कविता - तुम्हें सारी रात पढ़ती रहूँ कविता नलिनी सिंह की कविता – तुम्हें सारी रात पढ़ती रहूँ By नलिनी सिंह January 9, 2022 0 254 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp तनहाई के शदीद जाड़े में हाशिम के कलाम की धूनी पर हाथ तापने को जी चाहता है: हाथ के जल जाने की हद तक…!! ताकि; जलते हुए हाथ की रोशनी में – तुम्हारी… तस्वीर में, मैं तुम्हें सारी रात पढ़ती रहूं…! तुम्हारे जागने तक…!!! Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखइंदु बारौठ की लघुकथा – नए युग की सावित्रीअगला लेखदेवी नागरानी की तीन ग़ज़लें नलिनी सिंहनलिनी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. संपर्क - 90040 01454 RELATED ARTICLES कविता पद्मा मिश्रा की दो कविताएँ April 5, 2026 कविता अंतरीपा ठाकुर मुखर्जी की कविताएँ April 5, 2026 कविता हूबनाथ पांडेय की कविता – ईश्वर और विज्ञान April 4, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संपादकीय – बा…बा… ब्लैक शीप…! April 11, 2026 डॉ. जमुना कृष्णराज की पुस्तक ‘अव्वैयार की अमृतवाणी’ का लोकार्पण। April 5, 2026 पुस्तक-समीक्षा – मेरे भगत सिंह – डॉ. शिवजी श्रीवास्तव April 5, 2026 गणेश शंकर विद्यार्थी के द्विशताब्दी वर्ष एवं हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर पर सप्रे संग्रहालय में कार्यक्रम April 5, 2026 और अधिक लोड करें