Friday, June 21, 2024
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डॉ. स्वाति सिंह की कविता – सत्य

एक धोबी के प्रश्न से,

सीता मैली हो नहीं सकती।

किसी के मन के मैल को  सीता, धो नहीं सकती।

सीता सत्य है, सीता सत है,

यह विश्वास खो नहीं सकती।

सीता राम है, राममय है,

अपना वर्चस्व खो नही सकती।

अजी, सलाखों के अंदर गैलेलीयो को रखने से

पृथ्वी का आकार बदल नहीं सकता,

पृथ्वी गोल है, इसमें कुछ बदल हो नहीं सकता।

सूली पर चढ़ाने से

यीशु का, ईश कम नहीं हो सकता।

मानव का मसीहा अमर है,

गौरव, उसका कम हो नहीं सकता।

सत्य सत्य है

अंधेरा होने से उसका उजाला,

कम हो नहीं सकता।

धुंध में कुंद हो नहीं सकता

उजाला रोशनी खो नहीं सकता।

हां, सत्य परेशान हो सकता है,

पराजित हो नहीं सकता।

डॉ. स्वाति सिंह
डॉ. स्वाति सिंह
संपर्क - bhartiya.swati@gmail.com
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