विद्या सिंहकविता, कहानी, समीक्षा स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।'चंद्रिका बाबू की गुमटी' कहानी संग्रह तथा नरेश मेहता का साहित्य एक अनुशीलन समीक्षात्मक पुस्तक प्रकाशित। विभिन्न संकलन में सहयोगी लेखन।
पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एमकेपी कॉलेज देहरादून।
शिवानी के उपन्यास की बहुत ही सार्थक समीक्षा आपके द्वारा की गयी है
प्रिय विद्या जी आपने महान लेखिका शिवानी जी के लेखन पर एक वृहद दृष्टि समग्र रूप से डाली है उनके पिता अंग्रेजी के लेखक एवं वे स्वयं शांति निकेतन में उनकी शिक्षा का प्रभाव उनके लेखन में आया है, शिवानी के साहित्य में समाज, देश को उन्नति प्रदान करने का प्रयास दिखाई देता है उनका स्वयं का कहना है की लेखक का साहित्य समाज की संस्कृति और मूल्यों के संवर्धन करने वाला यथार्थ धरातल पर लिखा होना चाहिए
शिवानी जी ने स्त्रियों की विभिन्न समस्याओं पर अपनी कलम चलाई है चाहे विधवा, पारितक्य,या समाज से अलग जीवन जीती वेश्याएं हो , स्त्रियों के हर तरह के शोषण जीवन पर उन्होंने कहानी उपन्यास लिखे हैं
यह बात सही है कि उन्हें उनके लेखन के अनुसार पुरस्कार नहीं मिल पाया, फिर भी साहित्य में शिवानी एक आला दर्जे की साहित्यकार के रूप में अंकित हैं
प्रियविद्या जी आपने शिवानी जी पर उत्तम समग्र लेख लिखा है साधुवाद ।