Monday, May 25, 2026
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डॉ गीता द्विवेदी के दोहे

जीवन देता है सबक, सही समय अनुसार,
मोह भंग कर आपका, रचता यह संसार।
बड़े बड़ो की बानी यह, मत कर अन्धा प्यार,
छाह भी अपनी न रहे, जो ढले धूप व्यवहार।
अपना साथ निभा मनवा, दिन रैन सुमिर रघुनंदन,
वर्ना घुट कर रह जाएगा, न सुनेगा कोई कृन्दन।
उनसे तू बचता रहे, जो करे तुझे कमज़ोर,
अपनी ताकत बन सदा, वर्ना टूट जाएगी डोर।
मत रह किसी के आसरे, राम सहारा सबका,
सांस आस दी उसने तो, करेगा नइया पार।
रिश्तों को जी भर जिएँ, बढ़े प्यार मनुहार।
हाट नहीं बिकते मिले, लाख करो व्यापार।
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