ब्रिटेन में गणेश उत्सव बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। अगर देखें तो पिछले दो दशक से ऐसे आयोजन भारतीय मूल के लोगों में बहुत लोकप्रिय हुए है विशेषकर मेनचेस्टर, लेस्टर, बिर्मिंघम, लंदन, ग्लास्गो आदि शहरों में। लोग सार्वजनिक रूप से तो मनाते ही हैं बल्कि बड़ी मात्रा में वे अपने घरों में भी गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना करते हैं जिसके माध्यम से परिवार व मित्रगण एक दुसरे के घर आते जाते हैं, एक प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनता है।
लन्दन के बिलकुल नज़दीक एक शहर है स्लाओ (Slough) , यहाँ का गणेश महोत्सव बहुत लोकप्रिय है। स्लाओ मित्र मंडल नाम की संस्था 2010 से लगातार गणेश उत्सव का कार्यक्रम करती आ रही है और उनका उद्देश्य ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय में अपनी कला एवं संस्कृति को बनाये रखना है। वे ये कार्य्रक्रम हिन्दू कल्चरल सोसाइटी के साथ मिलकर करते है।

इसबार भी यह विशाल व भव्य आयोजन 16 सितंबर से 23 सितम्बर तक आयोजित किया गया जिसमें लन्दन, रेडिंग, न्यूबरी, ऑक्सफ़ोर्ड आदि शहरों से लोग सपरिवार सम्मिलित हुए। इस वर्ष यहाँ गणेश महोत्सव को महाभारत में श्री कृष्ण द्वारा दिये गये गीता उपदेश की रूप रेखा में किया गया, जिसमें मूसक को अर्जुन के रथ वाहन करते दिखाया गया।
मंदिर प्रांगण में अपने इष्टदेव गणेश की वैभवपूर्ण मूर्ती देखकर लोग स्वतः सुन्दर मनोभाव में खो जाते और गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से पंडाल गूँज उठता। पूरे पांच दिन तक भारतीयता और भारतीय संस्कृति की झलक बनी रही।
प्रतिदिन सुबह, दोपहर शाम भक्तों का भारतीय परिधान में आगमन रहा, वे अपने गणेशा के दर्शन और उनके प्रति श्रद्धा, प्रेम उड़ेलते रहे।

सायं काल में पंडाल की छठा और भी बढ़ जाती थी जब बच्चे से लेकर हर आयु वर्ग, समुदाय या परिवेश के लोग गणेशा के सामने अपनी कला, नृत्य और संस्कृति को प्रदर्शित करते। बच्चों से हर रोज़ श्लोक, भजन, ड्रॉइंग प्रतिस्पर्धा, डांस (बॉलीवुड या क्लासिकल), टैलेंट शो और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कारों का भी प्रबंध किया गया। रुचिकर बात यह थी की हर संध्या आरती के बाद हज़ारों भक्तों को स्वादिष्ट भोजन कराया गया।


