Wednesday, February 11, 2026
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अनीता सिद्धि की ग़ज़ल

1
पास आने में वक्त लगता है।
दिल लगाने में वक्त लगता है।।
गलतियां रोज लोग करते हैं,
बस गिनाने में वक्त लगता है।
ज़ीस्त से दूर जाने वालों को
भूल जाने में वक्त लगता है।
है कहीं प्यार तो कहीं नफ़रत,
कुछ निभाने में वक्त लगता है।
ग़म उठाये हों मुद्दतों जिसने
मुस्कुराने में वक़्त लगता है
2
अंधेरा ग़म का छटता जा रहा है।
उजाला दिल में भरता जा रहा है।
सभी के हाथ मोबाइल है देखो,
कि बचपन अब बिगड़ता जा रहा है।
गली, मैदान सब सूने से लगते,
अकेलापन जकड़ता जा रहा है।
हमारे गांव देखो रो रहे हैं,
नगर अब इनमें बसता जा रहा है।
युवा झूमे नशे में आज देखो,
रगो में खून घटता जा रहा है
कोई तो काम कर लो आप अच्छा,
कि दिन यूँ ही गुजरता जा रहा है।

अनीता सिद्धि
पटना बिहार
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