होमग़ज़ल एवं गीतडॉ. सुनील जोगी की ग़ज़ल - बुराई ही अब रहनुमा हो गई... ग़ज़ल एवं गीतफीचर डॉ. सुनील जोगी की ग़ज़ल – बुराई ही अब रहनुमा हो गई है By डॉ. सुनील जोगी May 9, 2021 0 397 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp बताए कोई क्या ख़ता हो गई है कि दुश्मन हमारी हवा हो गई है मरीज़ों के जेबों में पैसे भरे हैं नदारद यहाँ से दवा हो गई है कफ़न तक नहीं रह गया है बदन पर यहां शर्म शायद विदा हो गई है भरोसा नहीं रह गया है किसी का शराफ़त बहुत बदनुमा हो गई है वही सांस जो अब तलक हमक़दम थी वही ज़िन्दगी की सज़ा हो गई है चिता जल चुकी आदमीयत की ‘जोगी’ बुराई ही अब रहनुमा हो गई है । Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसंपादकीय – कोरोना, हिंसा और नहर में बहते सैंकड़ों रेमडेसिवीर इंजेक्शनअगला लेखडॉ. यासमीन मूमल की ग़ज़ल – चाँद तारों को लेकर किधर जाएगा डॉ. सुनील जोगीडॉ. सुनील जोगी हिंदी के लोकप्रिय कवि हैं. 'मुश्किल है अपना मेल प्रिये' इनकी अत्यंत प्रसिद्ध कविता है. संपर्क - [email protected] RELATED ARTICLES साहित्यिक हलचल व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह 2026 – (एक रिपोर्ट) April 5, 2026 साक्षात्कार सृजन के अंतःस्वर : वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद मिश्र के साथ हरि ओम की बातचीत April 5, 2026 ग़ज़ल एवं गीत बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें April 4, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संपादकीय – ना इधर चैन ना उधर… April 25, 2026 गोवर्धन यादव की पांच लघुकथाएँ April 18, 2026 ‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी April 18, 2026 प्रदीप गुप्ता की कविता- चेरी ब्लॉसम April 18, 2026 और अधिक लोड करें