सोनिया सोनम अक्स की दो ग़ज़लें
इश्क़ से रब्त यूँ भी निभाना पड़ा
रौशनी की ज़रूरत थी इस शहर को
सच तो ये है कभी वो रहा ही नहीं
हाए तक़दीर का ये लिखा, क्या कहें
एक दम दे दी उसने भी अपनी क़सम
इश्क़ का भी भरम रखना था इसलिए
ज़िन्दगी मौत के दरमियां सोनिया
अश्कों का सैलाब दबा कर मत बैठो
मेरे दिल में कुछ कुछ होने लगता है
कोशिश कर के खुद ही अपनी बनाओ जगह
हिम्मत है तो झूट के आगे डट जाओ
ज़ोर पे हैं नफरत की हवाएं दुनिया में
लौट आओ दुनिया-ए-हकीकत में सोनम
सोनिया सोनम अक्स
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आदरणीय सोनिया जी!लेखन के क्षेत्र में गजल के व्याकरण की एबीसीडी से भी हम अनजान हैं लेकिन हाँ भाव को समझने का प्रयास करते हैं। वैसे तो दोनों ही अच्छी हैं पर हमें दूसरी गजल ज्यादा अच्छी लगी।
बहुत-बहुत बधाइयाँ आपको।