Sunday, June 16, 2024
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सूर्यकांत शर्मा की कलम से ‘रानी और रॉकी की प्रेम कहानी’ की समीक्षा

आज का ग्लोकल से ग्लोबल होते-किशोर,युवा और आम जन,अब लीक से हटकर कुछ ऐसा देखना चाहते हैं।जिसे वह सच्चाई से जोड़ सके।कोरोना जैसी महामारी के पंजे से मुक्त पर कुप्रभाव ग्रसित,जनमानस अब कॉमेडी के पुट से जीवन को और बेहतर तरीके से जीना चाहता है।
रानी और रॉकी की कहानी फिल्म ऐसी ही है।यह फिल्म पारिवारिक कॉमेडी ड्रामा श्रेणी में आती है।
 करण जौहर जैसे मशहूर निर्देशक से निर्देशित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पहली बड़ी  दस फिल्मों में शुमार हो गई है।फिल्म की कहानी इशिता मोइत्रा शशांक खेतान और सुमित रॉय की तिकड़ी ने लिखी है।एक सौ  साथ करोड़ की लागत से बनी और अठारह करोड़ की मार्केटिंग लागत से बनी यह फिल्म पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है। फिल्म पूरे पौने तीन घंटे दर्शक को कॉमेडी, चुटीले संवाद और बेहतर अभिनीत फिल्म में  बांधे रखने में सक्षम है।
बीते ज़माने के मशहूर स्टार और बॉलीवुड के पहले ही मैन धर्मेंद्र और शबाना आज़मी अपने अपने रोल में जमें हैं और बीच बीच में रोमांस का झोंका और गति दोनों देते हैं।पुराने फिल्मी गानों की मादकता मस्ती का तड़का।फिर उसे नए गानों की तड़क भड़क के साथ कॉकटेल बना कर परोसा है।सदाबहार फिल्मी गाना -अभी ना जाओ छोड़ कर ,के दिल अभी भरा नहीं,,,साहिर लुधियानवी साहाब की भीनी भीनी याद की खुशबू को बार बार और कई बार बिखेरता और महकाता है।
रणवीर सिंह और आलिया भट्ट बतौर नायक नायिका के रूप में एक बेहतर अभिनीत युगल में जमें हैं और दर्शकों को हंसाने और मस्ती कराने में सफल रहे हैं।धर्मेंद्र और शबाना आजमी को विवाह के उपरांत प्रेमी प्रेमिका के रूप में पेश किया गया है।यह बताता है कि अब फिल्मकार और दर्शक दोनों इस सच्चाई से वाकिफ होकर इसे परदे पर देखना चाहते है और साथ ही साथ यह प्रश्न भी खड़ा करते है कि शादी दो परिवारों और दो व्यक्तियों का मिलन है और परिवार एक प्रेम संबंध के कारण बिखेरने नहीं चाहिएं।
कॉमेडी और वो भी हल्की फुल्की इस फिल्म में केंद्र है।फिल्म के एक और शानदार स्टार जया भादुड़ी एक मजबूत बिजनेस वूमेन और कड़क दादी के रूप में बहुत सजीव अभिनय किया है और फिल्म को एक विशेषता देती हुई प्रतीत होती हैं।आज के केंद्र में आए मुद्दे जैसे जेंडर इक्वालिटी यानी लैंगिक समानता,विभिन्न कल्चर, परिवेश,मान्यताओं को दर्शाती और सामंजस्य बैठाने की नज़ीर यानी सजीव उदाहरण पेश करती फिल्म है।
फिल्म एक उद्देश्यपूर्ण ढंग से आगे बढ़ती है।फिल्म के गाने भी कर्णप्रिय हैं।थिएटर यानी रंगमंच कलाकार भी इस फिल्म में बहुतायत में हैं और फिल्म में रोचकता और कॉमेडी को वैल्यू एडिशन यानी हँसाते नज़र आते हैं।
       पंजाबी-बांग्ला कल्चर की खूबियों-कमियों के सम्मिश्रण को बखूबी पेश किया है।फिल्म के पहले भाग बेहद तेज गति मौज मस्ती गीतों से लबरेज़ है तो मध्यांतर यानी  इंटरमिशन  के बाद फिल्म संजीदा होकर अपने उद्देश्य की ओर बढ़ती है।फिल्म की फोटोग्राफी बेहद उम्दा है और मानुष नंदन की प्रतिष्ठा के अनुरूप है।
     प्रीतम का संगीत और गानों की जुगलबंदी लोगों की जुबान पर चढ़ने के लिए सरस और सुरीली है।फिल्म की शूटिंग नई दिल्ली,मुंबई के अलावा जम्मू-कश्मीर में हुई है।
विपरीत स्वभाव वाले रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की जोड़ी की केमिस्ट्री बहुत ही दर्शनीय बन पड़ी है।कथा में तीन महीने नायक और नायिका का एक दूसरे के घर में रहना,एक सृजन का आयाम पेश करता है और फिल्म को यथार्थ के धरातल पर उतार कर सच्चाई और रोचकता का पुट देने में बेहद सफल है।
फिल्म के कलाकारों में टोटा रॉय चौधरी, चूर्णी गांगुली,आमिर बशीर और क्षीति जोग है।
पात्रों के अंतर्द्वंद्व और फिर एक दूसरे  की परिस्थितियों को समझ कर सामंजस्य बिठा कर एक साथ मिल बैठ कर संवाद करने की महत्त्वता को उजागर करती,यह फिल्म एक सुखांत अंदाज़ में अपने दर्शकों को तारोताजा कर पुनः वास्तविक दुनिया में भेजती है।
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