हिंदी साहित्य में कहानी केवल एक विधा नहीं, बल्कि समाज की नब्ज़ पकड़ने वाली सबसे जीवंत अभिव्यक्ति हैI कहानी उस आम मनुष्य की आवाज़ है जो बड़े शब्दों या परिष्कृत भाषणों में नहीं, बल्कि सरल अनुभूतियों में अपना संसार रचता हैI ऐसे समय में, जब त्वरित साहित्य और सतही अभिव्यक्तियाँ तेज़ी से फैल रही हैं, कहानी की गहराई को पहचानने और उसे उचित मंच देने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैI यही उद्देश्य कथा-सम्मानों को सार्थक बनाता हैI
कथा-सम्मान किसी लेखक को केवल पुरस्कार देने का औपचारिक माध्यम नहीं, बल्कि उसकी रचनात्मक साधना को मान्यता प्रदान करने का महत्वपूर्ण तरीका हैI एक कहानीकार अपने परिवेश, अपने अनुभवों और समाज की धड़कनों को महसूस कर उन्हें शब्दों में ढालता हैI उसकी रचना तब ही पूर्ण होती है जब वह पाठक के हृदय तक पहुँचकर उसे कुछ सोचने और कभी-कभी बदलने पर मजबूर करेI जब ऐसी रचना को सम्मान मिलता है, तो यह लेखक के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है और साहित्यिक समुदाय के लिए एक नई दिशा का संकेतI
सम्मान मिलने से वे कहानियाँ भी पाठकों के सामने आती हैं जो अक्सर मुख्यधारा में अनसुनी रह जाती हैंI गाँव-कस्बों की दुनिया, हाशिये पर खड़े पात्रों की पीड़ा, स्त्री-अनुभव, बुज़ुर्गों की संवेदनाएँ, बच्चों के डर और छोटे-से शहर की बदलती तस्वीरेंI कथा-सम्मान इन आवाज़ों को राष्ट्रीय साहित्यिक परिदृश्य में स्थान दिलाते हैंI इससे न केवल साहित्य समृद्ध होता है, बल्कि पाठकों का दृष्टिकोण भी विस्तृत होता हैI
इसी संदर्भ में ‘पुरवाई’ पत्रिका का योगदान उल्लेखनीय हैI ‘पुरवाई’ एक सक्रिय, गंभीर और विश्वसनीय ऑनलाइन साहित्यिक मंच है, जहाँ हिंदी लेखन की नई दिशाएँ, नए प्रयोग और नई आवाज़ें खुले मन से स्वीकार की जाती हैंI यहाँ कहानी, कविता, लेख, समीक्षा जैसे विविध रूपों को अत्यंत सजगता और गुणवत्ता के साथ प्रस्तुत किया जाता हैI संपादकीय टीम हर रचना को मौलिकता, भाषा-शैली, भावनात्मक गहराई और प्रस्तुति के आधार पर परखती है, जिससे पाठकों तक केवल सर्वोत्तम सामग्री पहुँचती हैI
‘पुरवाई’ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह समकालीन और उभरते हुए रचनाकारों को समान अवसर प्रदान करती हैI नए लेखक अक्सर इस आशंका में रहते हैं कि उनकी बात सुनी जाएगी या नहींI पुरवाई इस आशंका को दूर करते हुए उन्हें एक सम्मानजनक मंच देती हैI यही कारण है कि कई नए लेखकों ने अपनी साहित्यिक पहचान की शुरुआत इसी मंच से की हैI
इसी साहित्यिक दृष्टि और प्रतिबद्धता से जन्मा है ‘पुरवाई कथा-सम्मान’… एक ऐसा सम्मान जो केवल कहानी के सौंदर्य को नहीं, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव और साहित्यिक गुणवत्ता को भी महत्व देता हैI 2019 से आरंभ हुए इस सम्मान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हैI
बहुत से मित्रों ने ‘पुरवाई कथा-सम्मान’ की प्रक्रिया को जानने की उत्सुकता दिखाई है। इसकी चयन-प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, और पुरवाई टीम पूरे वर्ष इसे ईमानदारी से संचालित करती है। जिन कहानियों को पाठकों ने सबसे अधिक पसंद किया, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही संपादकीय मंडल हर महीने की श्रेष्ठ कहानी चुनकर वर्ष भर की कुछ कहानियों की सूची बनाता है। बाद में इन्हीं कहानियों में से वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कहानी का चयन किया जाता है।
यहां एक बात अपने पाठकों को अवश्य बताना चाहेंगे कि वर्ष भर की चुनिंदा बारह कहानियों को ‘पुरवाई कथामाला’ के नाम से पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित भी किया जाता है। इस मुहिम में हमारे साथ इंडिया नेटबुक्स के डॉ. संजीव कुमार भी जुड़े हैं।
इसके बाद ‘पुरवाई मंडल’ एक पैनल बनाता हैं जिनको कहानियां पढ़वाई जाती हैंI सभी कहानियां अपने आप में श्रेष्ठ होती हैंI संपादकीय मंडल ओर पैनल से कहानियां मुख्य संपादक तक पहुंचती हैं और फिर चयन होता हैं वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कहानी काI हो सकता है पाठकों को इनमें से कोई अन्य कहानी अधिक पसंद आए, पर हम अपने निर्धारित मानदंडों का कठोरता से पालन करते हैं। चयन के दौरान कहानी की मौलिकता, कल्पनाशीलता, भावनात्मक गहराई, पात्रों की सच्चाई, भाषा का प्रवाह, वर्तनी, शैली और कहानी की समकालीन प्रासंगिकता इन सब पर समान रूप से ध्यान दिया जाता है। इसीलिए पुरवाई कथा-सम्मान विश्वसनीय और सम्मानित माना जाता है।
इस सम्मान का रूप भी आधुनिक है इसे ऑनलाइन प्रदान किया जाता है, ताकि देश-दुनिया के किसी भी कोने में बैठे लेखक तक यह सम्मान पहुँच सके। जहाँ रचनाकार, पाठक और साहित्य-प्रेमी एक साथ मिलकर कहानी की यात्रा और उसके प्रभाव पर विचार करते हैंIसम्मान राशि, सम्मानपत्र और सम्मानित कहानी पर विशेष ऑनलाइन चर्चा ये सब इस प्रक्रिया को और भी अर्थपूर्ण बनाते हैं। यह केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि एक बड़ी साहित्यिक बातचीत का अवसर है।
पहला ‘पुरवाई कथा-सम्मान’ दिव्या विजय को मिलाI इसके बाद यह सम्मान विनीता परमार, श्रद्धा थवाईत और हंसादीप जैसी रचनाकारों की उत्कृष्ट कहानियों को प्राप्त हुआI अब यह सम्मान अंजू शर्मा और सविता पाठक को प्रदान किया जा रहा है, जो यह सिद्ध करता है कि पुरवाई न केवल निरंतर गुणवत्ता को महत्व देती है, बल्कि विषयों की विविधता,नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाती हैI जहाँ रचनाकार, पाठक और साहित्य-प्रेमी एक साथ मिलकर कहानी की यात्रा और उसके प्रभाव पर विचार करते हैंI
हमारी संरक्षक आदरणीय ज़किया ज़ुबैरी जी ने एक सवाल भी उठाया है कि क्या ‘पुरवाई’ के लिये केवल महिला लेखक ही रचनाएं भेजते हैं? पुरुष लेखकों को अब तक यह सम्मान क्यों नहीं मिला? हम यह बात साफ़ कर देना चाहेंगे कि यह पुरस्कार केवल कहानी की गुणवत्ता पर दिये जाते हैं। लेखक के जेंडर का इस प्रक्रिया में कहीं कोई ख़्याल नहीं रखा जाता।
आज जब कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का दर्पण बन चुकी हैं, ऐसे में कथा-सम्मान जैसी पहल हिंदी साहित्य को और अधिक जीवंत, संवेदनशील और व्यापक बनाती हैं। ‘पुरवाई’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक निरंतर जागरूक साहित्यिक आंदोलन है जो यह विश्वास दिलाता है कि एक अच्छी कहानी हमेशा पढ़ी जाती है और उसे सम्मान अवश्य मिलता हैI
सुस्पष्ट जानकारी और इंदु शर्मा पुरस्कार के समग्र रूप को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत करता यह आलेख , नए पुराने और भावी सम्मान विजेताओं के मन और आत्मा में उतरता सा प्रतीत होता है।
हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो
पढ़कर बहुत अच्छा लगा।
आपने कहानी विधा की महत्ता को बेहतरीन तरीके से परिभाषित ही नहीं किया है बल्कि चयन की निर्दोष व निष्पक्ष प्रक्रिया को समूह में स्पष्ट कर सभी सदस्यों की शंकाओं का(अगर रही होंगी) समाधान भी किया।
चयन प्रक्रिया के आधार की उत्सुकता प्रायः सभी के मन में रहती है।
दोनों ही कहानियों को हमने पढ़ा।
सुनीता पाठक जी की कहानी हमारी पढ़ी हुई थी हमने देखा उसमें हमारी टिप्पणी भी है।
अंजू शर्मा जी को हमने नहीं पढ़ा था, लेकिन इस विषय के दर्द से हम पहले से भी परिचित थे।
क्योंकि कई बार यहाँ मथुरा से ब्रज से रासलीला मंडली आई । मंचन होता था ।उन बच्चों से हमने बात की।
कई बार वे लोग साल- साल भर घर नहीं पहुँच पाते थे। पढ़ाई -लिखाई तो बहुत दूर की बात थी जो जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता रही।
इसमें कोई दो मत नहीं की दोनों ही विषय बिल्कुल नवीन थे।
इस कहानी का आना बहुत जरूरी भी था। यह एक ऐसा विषय था जो लगभग अछूता था।
थर्ड जेंडर न होते हुए भी
इनकी पीड़ा लगभग इसी तरह की है।
दोनों कहानीकारों को बहुत-बहुत बधाई।
निष्पक्ष और साफ चयन प्रक्रिया के लिए पुरवाई परिवार धन्यवाद का पात्र है।
कहानीकारों के प्रोत्साहन के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
एक बार पुनः पुरवाई परिवार को बहुत-बहुत बधाई।
चयन प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी पुरवाई पटल पर प्रस्तुत करने के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया।
पुरवाई कथा सम्मान के साथ साथ आप ने समाज,संवेदना, साहित्य और कथा कहानी पर बहुत गहरी समझ जगाने वाली बातें की हैं…..आपकी पोस्ट पढ़ते हुए महसूस होता है कि हिंदी कहानी और हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता समय के साथ साथ बदलते हुए हालात और चुनौतियों की भी चर्चा कर रही है…!
इस सफल लेखन के लिए आपको और पुरवाई टीम को भी हार्दिक बधाई…..
कृपया पंजाब के हिंदी साहित्य को पुरवाई टीम से जोड़िये….
आदरणीय तेजेन्द्र शर्मा जी, नीलिमा शर्मा जी और पूरी पुरवाई टीम को पुरवाई कथा सम्मान के पारदर्शी एवं निष्पक्ष निर्णय हेतु हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं,,,,,
सुस्पष्ट जानकारी और इंदु शर्मा पुरस्कार के समग्र रूप को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत करता यह आलेख , नए पुराने और भावी सम्मान विजेताओं के मन और आत्मा में उतरता सा प्रतीत होता है।
हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो
नमस्ते जी, यह इंदु कथा सम्मान नहीं, पुरवाई कथा सम्मान है.
आभार
विस्तृत, स्पष्ट और समस्त जिज्ञासाओं का समाधान करता आलेख। बधाई नीलिमा जी।
शुक्रिया आपका
आदरणीय नीलिमा जी!
पढ़कर बहुत अच्छा लगा।
आपने कहानी विधा की महत्ता को बेहतरीन तरीके से परिभाषित ही नहीं किया है बल्कि चयन की निर्दोष व निष्पक्ष प्रक्रिया को समूह में स्पष्ट कर सभी सदस्यों की शंकाओं का(अगर रही होंगी) समाधान भी किया।
चयन प्रक्रिया के आधार की उत्सुकता प्रायः सभी के मन में रहती है।
दोनों ही कहानियों को हमने पढ़ा।
सुनीता पाठक जी की कहानी हमारी पढ़ी हुई थी हमने देखा उसमें हमारी टिप्पणी भी है।
अंजू शर्मा जी को हमने नहीं पढ़ा था, लेकिन इस विषय के दर्द से हम पहले से भी परिचित थे।
क्योंकि कई बार यहाँ मथुरा से ब्रज से रासलीला मंडली आई । मंचन होता था ।उन बच्चों से हमने बात की।
कई बार वे लोग साल- साल भर घर नहीं पहुँच पाते थे। पढ़ाई -लिखाई तो बहुत दूर की बात थी जो जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता रही।
इसमें कोई दो मत नहीं की दोनों ही विषय बिल्कुल नवीन थे।
इस कहानी का आना बहुत जरूरी भी था। यह एक ऐसा विषय था जो लगभग अछूता था।
थर्ड जेंडर न होते हुए भी
इनकी पीड़ा लगभग इसी तरह की है।
दोनों कहानीकारों को बहुत-बहुत बधाई।
निष्पक्ष और साफ चयन प्रक्रिया के लिए पुरवाई परिवार धन्यवाद का पात्र है।
कहानीकारों के प्रोत्साहन के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
एक बार पुनः पुरवाई परिवार को बहुत-बहुत बधाई।
चयन प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी पुरवाई पटल पर प्रस्तुत करने के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया।
पुरवाई कथा सम्मान के बाबत आपने बहुत सही जानकारियां दी। बहुत अच्छा लिखा है।
पुरवाई कथा सम्मान के साथ साथ आप ने समाज,संवेदना, साहित्य और कथा कहानी पर बहुत गहरी समझ जगाने वाली बातें की हैं…..आपकी पोस्ट पढ़ते हुए महसूस होता है कि हिंदी कहानी और हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता समय के साथ साथ बदलते हुए हालात और चुनौतियों की भी चर्चा कर रही है…!
इस सफल लेखन के लिए आपको और पुरवाई टीम को भी हार्दिक बधाई…..
कृपया पंजाब के हिंदी साहित्य को पुरवाई टीम से जोड़िये….
एक बार फिर हार्दिक बधाई स्वीकार करें…!
रेक्टर कथूरिया, इस सार्थक एवं सारगर्भित टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद। हमारा ई-मेल आईडी है – [email protected]
आप पंजाब के लेखकों तक पहुंचाने में हमारी सहायता करें।
आदरणीय तेजेन्द्र शर्मा जी, नीलिमा शर्मा जी और पूरी पुरवाई टीम को पुरवाई कथा सम्मान के पारदर्शी एवं निष्पक्ष निर्णय हेतु हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं,,,,,