छोड़ बुराई नेक बन, पाप करे शैतान।
स्वर्ग नर्क सब कर्म से, तेरे है इंसान।।
समझ समझ समझा नहीं, समझ नहीं थी यार।
वो तो मेरे पास है, ढूॅंढ रहा बेकार।।
नेता बन मंत्री बनो, डिग्री का क्या काम।।
पढ़े लिखे बेकार सब, घूम रहे गुमनाम।।
ख़त्म सफ़र कब मौत से, आगे भी है और।
सोच जहाॅं की छोड़ दे, वहाॅं बना ले ठौर।।
सबको जाना एक दिन, भला बुरा क्या संत।
रहा सदा कोई नहीं, सबका होगा अंत।।
चल मुसाफिर समय हुआ, रुकना है बेकार।
हुआ आजाद कैद से, टूट गई दीवार।।
हुआ नहीं है कल कभी, मत ले कल का नाम।
जो कुछ है वो आज है, कल का कल क्या काम।।
झूठ झूठ है सच नहीं, सच से जिंदा झूठ।
मिटे झूठ जब सच हटे, जैसे जल कर ठूॅंठ।
क्या सच है क्या झूठ है, समझा बस इक बात
मौत कभी हारी नहीं, सबको देगी मात।।
चमक दमक को देखकर, दुनिया में इंसान।
भूल गया है मौत को, कितना है नादान।।
सच कहना है अब बुरा, कहे यहाॅं सच कौन।
सच के दुश्मन हैं सभी, अच्छा है जो मौन।।
भूल गया है मौत को, लालच से मजबूर।
तन्हा जाना क़ब्र में, फिर भी करे ग़ुरुर।।
मेरी क्या पहचान है, ढूॅंड रहा मैं कौन।
दिखता जो वो मैं नहीं, अंदर कुछ है मौन।।
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
जीते जी का साथ है, मरने पर है भार।
चले सभी इस पार तक, चले नहीं उस पार।।
साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार।।
कुछ दिन का बस खेल है, मौत हॅंसे इक ओर।
बचना मुश्किल मौत से, लाख लगा ले जोर।।
कीड़े खाऍं क़ब्र में, जब तक रहे शरीर।
सोच वहाॅं के दृश्य को, कैसी होगी पीर।।
जिसके दिल में प्यार है, सही वही इंसान।
पत्थर दिल कुछ नफ़रती, घूम रहे शैतान।।
मांस जला हड्डी बची, राख बची शमशान।
भूल गए अपने सभी, कर्म बची पहचान।।
उतरी उम्र ढलान पर, रहा अधूरा ज्ञान।
अंत नहीं है मौत से, आगे का कर ध्यान।।
इतना मत अभिमान कर, कौन यहाॅं है साथ।
सब मरने के बाद में, छूकर धोते हाथ।।
जीवन तो इक वहम है, कर्मों का है खेल।
सच तो है बस मौत ये, दुनिया है इक जेल।।
कर्म सही तो सब सही, पटरी पर है रेल।
बुरा भला कोई नहीं, क़ुदरत का सब खेल।।
आए सब बिन वस्त्र के, लड़ें कफ़न को आज।
साथ वही जाए कफ़न, जाए तख्त न ताज़।।
हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।
सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात।।
आज यहाॅं तो कल वहाॅं, जग में फिरे फ़क़ीर।।
अच्छे दिन के आस में, नैनन बरसे नीर।।
सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।
उसकी दुकान झूठ की, धन्था है मत रूठ।।
सौ में बोले झूठ जो, सवा सौ सुबह शाम।
असली नेता है वही, बाकी का क्या काम।।
फ़रियादी अब कर रहे, क़ातिल से फ़रियाद।
बुज़दिल इतना मत बनो, सब कुछ हो बर्बाद।।
राजा अच्छा है वही, कर जो करे मुआफ़।
भेद-भाव भी मत करे, सही करे इंसाफ़।।
दंड ज़िना-बिल-जब्र का, फाॅंसी मिले कठोर।
मौत डरे जब मौत से, देख मौत का शोर।।
