सृष्टि के निर्माण में
गर्माहट की आवश्यकता है
बर्फ पिघली नदी बनी
धीरे-धीरे हिमालय से उतर
धारा से मिली
मानव ने विकास किया
बुद्धि से इतिहास रचा
शास्त्र पढ़े फिर शस्त्र का
आधुनिक निर्माण हुआ
मैं का तत्व सर्वोपरि है
मैं को कायम रखने के लिए
शस्त्र युद्ध का आधार बना
शास्त्र को हम
आधार न बना सके
शास्त्र से बने हुए
शस्त्र को हम आधार बना
विध्वंस का चक्र चला रहे
इतिहास गवाह है
जब-जब मनुष्य सक्षम हुआ है
तब तब विनाश चरम पर पहुंच
सृष्टि को ध्वस्त किया है
रामायण महाभारत के युद्ध से
हम क्या सीखे
फिर भी हमने 1914, 1939
में दो विश्व युद्ध देखे
दो युद्धों में शस्त्र की ताकत से
विकसित देशों ने विश्व पर राज किया
हिरोशिमा नागासाकी बर्बाद हुए
फिर उसका उद्धार भी किया
अब तीसरे विश्व युद्ध की
आहट हो रही है
भय है कि अब युद्ध चरम पर हुआ
तो क्या कोई उद्धार करने के लायक
बचेगा भी या नहीं…
अच्छी और सच्ची रचना।
हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो।
हार्दिक आभार