Wednesday, February 11, 2026
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गिरीश पंकज की दो बाल कविताएँ

1- तितली रानी
रंग-बिरंगी तितली रानी,
नन्हीं है पर बड़ी सयानी।
हाथ नहीं वह आती है,
फुर से बस उड़ जाती है ।
उसको यूं ही उड़ने दो।
फूलों से तुम जुड़ने दो।
उसकी दुनिया बड़ी सुहानी।
रंग- बिरंगी तितली रानी,
नन्हीं है पर बड़ी सयानी।
दिखती है कितनी प्यारी ।
रंगों की है फुलवारी।
देख के मन खुश हो जाए,
फूलों पर जब मंडराए।
रहने दो आज़ाद उसे,
करने दो तुम मनमानी।
रंग- बिरंगी तितली रानी,
नन्हीं है पर बड़ी सयानी।

 

2- प्रार्थना
हमको मिले यही वरदान।
हमको मिले यही वरदान ।
नेक राह पर चल कर हम सब,
सदा बनें सच्चे इनसान।
हमको मिले यही वरदान।।
मात-पिता अपने निर्माता,
गुरुजन हमको गढ़ते हैं ।
उनके बतलाए पथ पर ही,
हम सब आगे बढ़ते हैं।
जो हैं पूज्य हमारे  उन का,
सदा करें बढ़ कर सम्मान।
हमको मिले यही वरदान।।
दीन- दुखी जन की सेवा में,
रहें सदा हम सब तैयार।
ऊँच-नीच का भेद करें ना,
बाँटें जग को अपना प्यार।
सदकर्मों पर नित्य चलें हम,
और बढ़ाएं अपना ज्ञान।
हमको मिले यही वरदान।
लक्ष्य रहे हरदम ही ऊँचा,
नभ को बढ़ के छू लेंगे।
भले अभाव में हो जीवन,
हँसते-हँसते जी लेंगे।
धन या ज्ञान मिले जो हम को,
करें सदा हम उसका दान ।।
हमको मिले यही वरदान।
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