Wednesday, June 12, 2024
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डीएवी कॉलेज (पंजाब) में ‘नयी शिक्षा नीति: भारतीय भाषाएं *संरक्षण और संवर्धन* विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

भारतीय शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित व क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाने और आज की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 लागू की है, जो राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। 
इसी परिप्रेक्ष्य में डीएवी कालेज अमृतसर पंजाब के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग और केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के संयुक्त तत्वावधान में 29 नवंबर मंगलवार को *नई शिक्षा नीति 2020 : हिंदी और भारतीय भाषाएं संरक्षण और संवर्धन* विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कालेज प्राचार्य डॉ अमरदीप गुप्ता के निर्देशन में आयोजित इस संगोष्ठी का संयोजन अध्यक्ष हिंदी विभाग डॉ किरण खन्ना ने किया। 

इस संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ हरमोहिंदर सिंह बेदी ने की जबकि केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के उपाध्यक्ष श्री अनिल जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में और प्रोफेसर बीना शर्मा निदेशक केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा ने विशिष्ट वक्ता के रूप में भारत भर से इस संगोष्ठी में उपस्थित समस्त बुद्धिजीवी वर्ग को संबोधित किया। 
श्री अनिल जोशी नयी शिक्षा नीति को *गेम चेंजर* बताते हुए इसे दिशा बदलने वाली नीति बताया जिसके केन्द्र में भारतीय भाषाओं को रखा गया है। नयी शिक्षा नीति के अन्तर्गत 25 इंजिनियरिंग कॉलेजों में इन्जिनियरिंग की परीक्षा और पाठ्यक्रम हिंदी और आठ अन्य भारतीय भाषाओं में आरंभ करने की सूचना देते हुए श्री अनिल जोशी ने बताया कि इंजिनियरिंग के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए लगभग 250 पुस्तकें हिन्दी और अन्य आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करवाई गई है । मध्य प्रदेश में मेडिकल की परीक्षा का माध्यम हिन्दी में होना एक भाषा री परिवर्तन का सूचक है जो धारा के विपरीत बहने का साहस है..

प्रोफेसर बीना शर्मा ने कहा कि भाषा जीवन शैली होती है जो देशज शब्दों के प्रयोग से पनपती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का संवर्धन इन्हीं शब्दों के प्रयोग से संभव है। बीना शर्मा ने सरकार की *एक भारत श्रेष्ठ भारत* योजना के अन्तर्गत विद्यार्थियों को पर्यटन , संगीत, खेलकूद से जोड़ा कर भारतीय भाषाओं को सिखाने की बात कही। बीना शर्मा ने यह भी कहा कि भाषा सदैव सेतु का कार्य करती है और यह व्यवहार में प्रयोग करने से पनपती है । उनके है अनुसार नयी शिक्षा नीति हमारे घरों से विलुप्त होती जा रही भाषाओं को समेटने का प्रयास है। 
कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ हरमोहिंदर सिंह बेदी जी ने कहा कि नयी शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति को भारतीय भाषाओं के संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित करने का एक सार्थक प्रयास है । उन्होंने आर्य समाज को पराधीन भारत में भी सभी भाषाओं और विशेषतः हिंदी के संवर्धन में विशेष योगदान दिया।। प्राचार्य डॉ अमरदीप गुप्ता ने कहा कि भाषा के माध्यम से ही कोई भी समाज और व्यक्ति सशक्त होते हैं और भारतीय भाषाओं में वैश्विक स्तर पर सभी विषयों में ज्ञान प्रदान करने का सामर्थ्य है। प्राचीन काल से ही भारत अपने वेदों पुराणों और आध्यात्मिक ग्रंथों के माध्यम से विश्व गुरु रहा है तो अपनी भाषाओं के बल पर ही रहा है। 

डॉ किरण खन्ना ने केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उनके लघु बजट व्यय संगोष्ठी के अन्तर्गत वित्तीय आश्वासन से इस संगोष्ठी का अमृतसर में महाविद्यालय स्तर पर पहली बार आयोजित करने का श्रेय डीएवी कॉलेज अमृतसर के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग को मिल रहा है। 
दो समानांतर तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ विनोद तनेजा जी और डॉ राकेश प्रेम जी ने की इन सत्रों में चण्डीगढ़ से डॉ स्नेह खन्ना, जालंधर से डॉ ज्योति गोगिया,होशियार पुर से डॉ दीपक, डॉ नीलू शर्मा, नवांशहर से प्रिंसिपल डॉ रमेश कुमारी, फिरोज पुर कैंट से प्रिंसिपल डॉ सीमा अरोड़ा, दीनानगर से डॉ समीर, डॉ सोनिया, खन्ना से डॉ चमकौर सिंह अमृतसर से डॉ अतुला भास्कर, डॉ दीप्ति, डॉ संजय मैडम रजनी बाला, रंजु सचदेवा, अंजु बाला, डॉ लवलीन, डॉ बाबशा, डॉ बलराम यादव ,डॉ मोहित ,मैडम अपर्णा इत्यादि ने उच्च शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर शोध पत्र पढ़े और निष्कर्ष दिए।

सम्मान सत्र की अध्यक्षता भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित भाषा विज्ञान के प्रतिष्ठित विद्वान पांडे डॉ शशि भूषण शीतांशु जी ने की। डॉ शीतांशु जी ने लार्ड मैकाले की कुत्सित शिक्षा नीति और तत्कालीन प्रबंधन के द्वारा उसके क्रियान्वयन से भारत में पनपे भाषायी प्रदूषण और सांस्कृतिक ह्रास पर प्रकाश डालते हुए नयी शिक्षा नीति को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी और प्रज्ञा पुरुष डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा भारत को दिया गया क्रांतिकारी और भाषायी संवर्धक कदम बताया। उन्होंने इस नयी शिक्षा नीति को संस्कृति और सभ्यता के ,आचरण और व्यवहार के बारीक से अन्तर को समझाने वाली कहा।
मंच संचालन डॉ अनुराधा शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ डेजी शर्मा,डॉ रजनी खन्ना, डॉ कुलदीप आर्या , डॉ सुरिंदर कुमार, डॉ नीरज, डॉ मनप्रीत, डॉ नीरू गुप्ता डॉ जीवन, मैडम मीनू, डॉ शिल्पी मैडम रिचा मैडम सविता इत्यादि उपस्थित रहे।
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