Sunday, May 31, 2026
होमकहानीरेणु गुप्ता की कहानी -एक रात में दो दो चाँद खिले  

रेणु गुप्ता की कहानी -एक रात में दो दो चाँद खिले  

“पाखी, तू मेरी बहुत प्यारी बहन है न?” लास्ट स्टेज के बोन कैंसर से ग्रस्त परु,पाखी की आइडेंटिकल जुड़वां बहन ने उससे पूछा।

“हाँ परु, यह भी कोई पूछने की बात है?”

“तो प्रौमिस कर, मैं तुझ से जो मांगूँगी, वो तू मुझे देगी।”

“मांग न परु, तू जो मांगेगी मैं तुझे वही दूँगी।”

“अगर नहीं दिया तो?”

“आज तक तूने जो मांगा मैंने तुझे वह दिया है। कभी तुझे किसी बात के लिए मना किया मैंने आज तक?”

“नहीं।”

“तो फिर आज इतनी हिचकिचाहट क्यों?”

“बस डरती हूँ, तूने मना कर दिया तो मेरा दिल टूट जाएगा।”

“अरे, अब बस भी कर यार। इत्ती नौटंकी मत कर मेरी ड्रामा क्वीन। सीधे मुद्दे पर आ।”

“पाखी, मैंने अभी तक यह बात किसी को नहीं बताई, आज पहली बार यह मैं तुझ से शेयर कर रही हूँ। जब से तेरी शादी तय हुई है, मैं अपनी शादी के बारे में सोच रही हूँ।”

परु की यह बात सुन घोर आश्चर्य से पाखी का मुंह खुला का खुला रह गया। क्या? शादी? तेरी शादी? सब कुछ जानते बूझते?”

“हाँ, मेरी शादी लेकिन मुझे किसी लड़के से शादी नहीं करनी। वैसे भी मुझसे शादी कौन करेगा? मुझे अपने आप से शादी करनी है। बस शादी का अनुभव लेना है, अपनी शादी का फ़ील लेना है। हल्दी, मेहँदी, फेरे जैसी सारी रस्मों का एक्सपीरिएन्स लेना है।”

“परु, ये तू क्या कह रही है मेरी बहना? मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा। बिना लड़के के शादी? यह सब कैसे पॉसिबल होगा?”

“क्यूँ? इसमें पॉसिबल नहीं होने वाली क्या बात है? जैसे तू दुल्हन बनेगी, तेरी हल्दी होगी, मेहँदी होगी, तेरे फेरे होंगे, वैसे ही मेरी भी सारी रस्में हो जाएंगी।”

“परु, परु, तू समझ नहीं रही, मेरी शादी का दिन मेरा अपना खास दिन होगा… मेरी ज़िंदगी का यादगार दिन। उस दिन अगर तू भी दुल्हन बन गई तो वो दिन मेरा दिन कैसे होगा? नहीं, नहीं, यह कुछ ठीक नहीं लग रहा।”

“पाखी प्लीज़, तू मेरी ज़िंदगी की आखिरी इच्छा पूरी नहीं करेगी? अब तो डॉक्टर्स ने भी जवाब दे दिया है। मेरे पास गिने चुने दिन हैं। मेरी आत्मा अतृप्त रह जाएगी अगर तूने मेरी यह विश पूरी नहीं की।” यह कहते कहते परु की आँखों में आँसू डबडबा आए थे।

तभी पाखी ने परु के आँसू पोंछते हुए उसे कलेजे से लगा लिया, “परु डीयर, तू समझ नहीं रही। अगर ऐन मेरी शादी के दिन मेरे साथ तू भी दुल्हन बनी, तो तुझे दुल्हन वेश में देख कर मम्मा, पापा और दादी को बहुत अफसोस होगा। वे तुझे देख देख कर दुखी होंगे कि तेरा घर नहीं बस सका। तेरी बीमारी की वजह से दुखी होंगे। सब मेहमान, यहाँ तक कि मौसी, मामा, बूआ, चाचा कोई मेरी शादी की खुशी खुल कर नहीं मना पाएगा। सबका ध्यान तुझ में ही अटका रह जाएगा। समझ रही है न परु, मैं क्या कहना चाह रही हूँ।”

“पाखी, तू मेरी बात नहीं समझ रही। तू जानती है न हम आइडेंटिकल ट्विन्स हैं और हम दोनों का थॉट प्रोसेस कई बार एक सा होता है।”

“हाँ, तो उसमें क्या नई बात है? वो तो हम बचपन से एक्सपीरिएन्स करते आ रहे हैं।”

“अरे तू कब से इतनी डंब हो गई? मेरा कहने का मतलब है घर में जो इतने दिनों से तेरी शादी की बात चल रही है, उससे मेरे मन में भी अपनी शादी की इच्छा जागने लगी है। कुछ दिनों से दिन रात मैं अपनी शादी के बारे में सोचती रहती हूँ। मेरे मन में बस एक ही खयाल बार बार आता है कि तेरी शादी हो रही है लेकिन मैं इस स्वीट एक्सपीरिएन्स को मिस कर दूँगी। मुझे ओबसेशन हो गया है अपनी शादी का। क्यूँ आखिर क्यूँ मैं इस खूबसूरत अनुभव से वंचित रहूँ? मैं बेशक किसी लड़के से शादी ना करूँ, लेकिन खुद अपने आप से तो कर ही सकती हूँ। है कि नहीं? अरे बाबा यह सेल्फ़्गैमी का कौंसेप्ट तो है ही न। तो बस मैंने सोच लिया, मैं खुद अपने आप से शादी करूंगी।”

“ठीक है, ठीक है, सोचते हैं इस बारे में। मम्मा पापा से भी बात करनी होगी न इस के लिए।”

“मम्मा पापा को मनाने का काम तेरा। अगर उन्होंने मुझे मना कर दिया तो मेरा दिल टूट जाएगा।”

“ओके… ओके… परु। मैं प्रौमिस नहीं करती लेकिन मैं उन दोनों से बात जरूर करूंगी। मैं सोच रही हूँ, तू मेरी शादी से एक दिन पहले अगर यह शादी करे तो मैं भी तेरी शादी पूरी तरह से एंजॉय कर पाऊँगी।”

“नहीं नहीं, मुझे शादी में पूरे मेहमान, खाना पीना, चहल पहल चाहिए। दो दो दिन शादी का पूरा तामझाम करने पर दुगुना खर्च होगा। पापा वैसे ही तेरी शादी ऑफिस से क़र्ज़ा लेकर कर रहे हैं। यह पॉसिबल नहीं होगा।”

“उफ़, यह तो मैंने सोचा ही नहीं था। खैर चल मैं कुछ सोचती हूँ।”

तभी पाखी परु के दो फ्रेंड्स, मनय और अरूप  उनके घर आगए। दोनों उसके पड़ौसी थे। एक ही यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए थे।

पाखी ने उन दोनों को परु की खुद अपने आप से शादी करने की इच्छा के बारे में बताया।

परु की इस इच्छा के बारे में सुन उस वक्त तो अरूप ने पाखी से कुछ नहीं कहा, लेकिन घर लौट कर वह सोच में पड़ गया था।

रात गहराने लगी थी, लेकिन आज नींद अरूप की आँखों का रास्ता भूल बैठी थी।

अपने सामने लगी दीवार घड़ी की टिक-टिक के साथ वह कब विगत की यादों के भंवर में डूबने-उतराने लगा था, उसे एहसास नहीं हुआ था।

उसे आज भी अच्छी तरह से याद है, वो होली का दिन था। वे अपनी दोस्तों के साथ रंगों में भीगा हुआ अपनी गली के नुक्कड़ पर खड़ा हुआ था कि तभी परु सामने अपने घर के बगीचे में साफ़ सुथरी सफ़ेद रंग के कपड़ों में दिखाई दी थी। तभी उसकी कुछ सहेलियाँ उसे रंग लगाने पहुँच गई थीं और कुछ ही देर में वे सब डांस करने लगी थीं। उसे भान न हुआ था, चंग की मधुर थाप पर थिरकती सतरंगे अबीर-गुलाल से लिपी-पुती शोख अल्हड़ परु उसके मन के शीशे में कब उतर गई थी।

उसे उस पर क्रश हो आया था और महीनों तक उसकी बिंदास नृत्य करती, मंद-मंद मुस्कुराती मोहिनी मूरत उसके ज़ेहन में मानो फ्रीज़ रही थी।

परु उसकी ही यूनिवर्सिटी में उसी के साथ एमएससी फ़ाइनल ईयर में थी। वो यदा-कदा उसके सामने पड़ जाती और उसकी इच्छा होती वो उससे अपने प्रेम का इज़हार करे, लेकिन हर बार उसका संकोची स्वभाव उसके आड़े आ जाता और वह उससे कुछ भी न कह पाता।

देखते-देखते यूनिवर्सिटी में उन सब फ़ाइनल ईयर के छात्रों के फेयरवेल का दिन आ पहुंचा था और वह अपनी इंटर्नशिप के चलते देहली चला गया था।

परु के प्रति उसका प्यार अब एक मीठी सी कसक बन उसके दिल के एक कोने में दफ़न हो गया था।

वह अपना इकतरफा प्रेम इंटर्नशिप, नौकरी के लिए विभिन्न कॉम्पटीशंस की तैयारी की आपाधापी में बिसरा बैठा था।

तभी इस बार अपने शहर लौटने पर उसे अपने दोस्तों से परु की बीमारी के बारे पता चला था और मन ही मन वह अथाह दर्द से भर उठा था।

आज परु की अपने आप से शादी करने की विश ने उसके अंतर्मन में भूचाल ला दिया था। क्या करे, क्या न करे, उसके ज़ेहन में कशमकश चल रही थी।

तभी उसके मन में सोच कौंधी, क्यों न वह परु से शादी कर ले?

वह गहन सोच में डूब गया था। घड़ी की आगे बढ़ती सुइयों के साथ परु, अपनी प्रेयसी के साथ सात जन्मों के बंधन में बंधने का खयाल पुख्ता होता जा रहा था। ‘हाँ वह परु से शादी करेगा। चमत्कार तो आज भी होते ही हैं। क्या पता उसके प्यार की कशिश उसे मौत के मुंह से खींच लाये। उसे नई ज़िंदगी दे दे।’

और उसने संकल्प लिया, चाहे कुछ भी हो जाए। वह परु के साथ शादी हर हाल में करेगा।

रात का एक बज गया था। उसका मन हुआ, वह फ़ौरन अपनी माँ को जाकर यह बात बताए, लेकिन घड़ी में समय देख कर उसने माँ को जगाने का विचार तज दिया और अपने फैसले से सुकूनज़दा हो करवट बदल नींद के आगोश में समा गया।

सुबह उठते ही उसने अपनी परु से विवाह करने की मंशा का खुलासा माँ ने किया, लेकिन इसके लिए माँ का रिएक्शन अनपेक्षित था। इकलौते बेटे के मुंह से एक चंद गिने-चुने दिनों की मेहमान परु से उसकी शादी के ख़याल मात्र से वह दहल उठी थी, लेकिन उनके बेटे से इस शादी को नहीं करने के लाख इसरार के बावजूद बेटे ने अपनी ज़िद नहीं छोड़ी।

कई दिनों तक दोनों माँ बेटे के बीच इस मुद्दे को लेकर अबोला रहा, वो रोई-धोई, लाख गिड़गिड़ाई, उसकी खुशामद की, उन्होंने साम दाम दंड भेद, हर उपाय आजमा लिया, लेकिन अरूप नहीं पिघला और अपनी ज़िद पर कायम रहा। अरूप विधवा माँ का एकमात्र सहारा था और वह उसकी पूरी दुनिया था, सो आखिरकार उसे बेटे की ज़िद के आगे घुटने टेकने पड़े और वह जीत गया।

माँ भरे ह्रदय और नम आँखों से अपने इकलौते बेटे का रिश्ता परु के घर ले  कर गई। अरूप भी उनके साथ गया। परु के माता-पिता ने उन्हें और अरूप को अपना निर्णय बदलने की बाबत लाख समझाने की कोशिश की। उन्हें परु के कैंसर की लास्ट स्टेज को पुष्ट करती उसकी मेडिकल रिपोर्ट्स दिखाईं लेकिन अरूप भी अपनी ज़िद का पक्का था। और अंततोगत्वा परु के माता-पिता को अरूप और परु के विवाह के लिए स्वीकृति देनी पड़ी।

  परु की शादी पाखी की शादी के दिन ही करवाने का निर्णय ले लिया गया।

इस निर्णय से जहां अरूप अकल्पनीय खुशी से सातवें आसमान में था, वहीं पाखी अपने विवाह की रौनक बहन की शादी के वजह से तनिक फीका होने की आशंका से ग्रस्त थी।

आखिरकार दोनों पाखी और परु के विवाह का शुभ दिन आ पहुंचा। विवाह मंडप में दो दो दुल्हनों को देख कर सभी आगंतुक हैरान थे।

जैसे जैसे मेहमानों को परु के दूल्हे के बारे में पता चल रहा था, सभी के मुंह से परु और अरूप के लिए दुआएँ निकल रही थीं।

सभी अरूप के परु के प्रति जज्बे के सामने नतमस्तक थे।

दोनों बहनों की हल्दी की रस्म राजी-खुशी हुई। वाकायदा घर की सुहागिन महिलाओं ने हंसी खुशी पाखी और परु की  हल्दी की रस्म करी। हल्दी के उपरांत दोनों दुल्हनों को मेहंदी लगी। खूब हर्षोल्लास से नाच गाना हुआ।

परु को हल्दी चढ़ाते और उतारते वक़्त परु के पेरेंट्स, दादी और सभी संबंधियों की आँखें नम थीं, यह सोच कर कि न जाने परु अब कितने और दिनों की मेहमान है?

अगले दिन दोनों दुल्हनें सोलह शृंगार  और गहनों में लगभग एक से घाघरे चोली में एक ही मंडप में बैठी बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

दोनों दुल्हनें अपने अपने दूल्हे के साथ बेहद जंच रही थीं।

पहले पाखी और परु की वरमाला हुई और फिर फेरे संपन्न हुए।

परु पाखी के माता पिता ने कलेजे पर पत्थर रख दोनों को विदा किया।

आज परु की सुहाग रात है।

अरूप ने सुहाग सेज पर बैठी परु से कहा, “परु, आज में इतना खुश हूँ, इतना खुश हूँ कि बता नहीं सकता। तुमने मेरी ज़िंदगी में आकर मेरी दिली तमन्ना पूरी कर दी। थैंक यू परु, थैंक यू सो सो मच,” कहते हुए अरूप ने उसके मेहंदी रचे हाथों को चूम लिया।

“थैंक्स तो मुझे कहना चाहिए, तुमने मुझ जैसी बीमार, मौत के मुंह में जाती लड़की के साथ अपनी ज़िंदगी की डोर बांधी। मुझसे शादी करके मुझे बेइंतिहा खुशी दी,” परु ने उससे भीगी आँखों और आद्र स्वर में कहा।

“परु, तुम्हें मेरी कसम जो तुमने ये मरने-मराने की मनहूस बातें कीं कभी। तुम्हें हमेशा पॉज़िटिव रहना है। पॉज़िटिव सोचना है। ज़िंदगी के सफ़र में मेरी हमराह बनना है। ज़िंदगी की आखिरी सांस तक मेरे साथ रहना है।” अरूप ने परु के चेहरे पर बह आए खारे मोतियों को चूमते हुए उसे अपनी बाँहों में कसते हुए कहा।

दूर कहीं गीत बज रहा था, “एक रात में दो दो चाँद खिले, एक घूंघट में एक बदली में।”

दोनों परु और अरूप प्रणय रस की झर झर चांदनी में आकंठ भीग उठे।

  • रेणु गुप्ता
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका (वॉरेन अकादमी, जयपुर) तथा स्वतंत्र लेखिका हैं। एम.ए. (अंग्रेज़ी), बी.एड. एवं सी.लिब. शिक्षित रेणु गुप्ता कहानी, लेख, लघुकथा, व्यंग्य, ब्लॉग, उपन्यास व वेब सीरीज़ जैसी विविध विधाओं में सक्रिय हैं। उनके प्रमुख प्रकाशित कार्यों में लघुकथा संकलन ‘आधा है चंद्रमा’ (2023), उपन्यास ‘अंजुरी भर नेह’ (2024), कहानी संकलन ‘कैसी पहेली ज़िंदगानी’ (2025) तथा ई-बुक ‘एहसास–ए–जुनून’ शामिल हैं। लगभग तीन सौ रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं एवं वेब पोर्टलों पर प्रकाशित/प्रसारित हो चुकी हैं, जिनमें आकाशवाणी से प्रसारण भी शामिल है। साहित्य क्षेत्र में उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें हिन्दी गौरव सम्मान, लघुकथा श्री सम्मान, कादंबरी सम्मान सहित विभिन्न साहित्यिक पुरस्कार उल्लेखनीय हैं।

पता- जी-2, प्लॉट नंबर-61, रघु विहार, महारानी फार्म, दुर्गापुरा, जयपुर-302018, (राजस्थान)
E mail I D- [email protected]
फ़ोन नंबर-9024579762

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest