मानवीय मूल्यों को बड़ी मार्मिकता से रेखांकित करती है सरिता सुराणा की कहानियाँ 3
“माँ की ममता” सरिता सुराणा का पहला कहानी संग्रह है। सरिता जी कहानियों के साथ व्यंग्य, निबन्ध, लघुकथा, कविता, संस्मरण, पत्र-लेखन, समीक्षा इत्यादि सभी विधाओं में लिख रही हैं। इनकी रचनाएं निरंतर देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। सरिता जी की कहानियों की विषयवस्तु समसायिक है। इस कहानी संग्रह की भूमिका बहुत ही सारगर्भित रूप से हैदराबाद के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने लिखी है।
डॉ. शर्मा ने भूमिका में लिखा है ” अपने इस पहले कहानी संग्रह के माध्यम से सरिता सुराणा यथार्थ की पीठ पर आदर्श का रचनाधर्मी सन्देश लेकर साहित्य जगत के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। उनके इस सन्देश में मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था, एक दूसरे के प्रति सहानुभूति, दूसरे के दर्द को समझने की योग्यता, भलमनसाहत की विजयकामना तथा स्वतंत्रता, समता और बन्धुत्व के साथ सामाजिक न्याय जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों का सन्देश सम्मिलित है। ”
इस कहानी संग्रह में छोटी-बड़ी 15 कहानियां हैं। इस कहानी संग्रह की कहानियों के घूमते आईने में यथार्थवादी जीवन, पारिवारिक रिश्तों के बीच का ताना-बाना, रिश्तेदारों की संवेदनहीनता, पारिवारिक रिश्तों का विद्रूप चेहरा, टूटते परिवार और दरकते रिश्ते, नैतिक मूल्यों का ह्रास, आर्थिक परिवेश का दबाव, दहेज़ प्रथा, भ्रूण ह्त्या, अनाथ बच्चों की पीड़ा, सामंती व्यवस्था के अवशेष, स्त्री संघर्ष और स्त्रीमन की पीड़ा, बाल मनोविज्ञान, माँ की कोमल भावनाओं आदि का चित्रण मिलता है। सरिता की कहानियाँ प्रेम, साथ, सहयोग, संवेदना, इंसानियत जैसे मूल्यों की पुरजोर वकालत करती हैं।
संग्रह की पहली रचना स्नेह-दीप आत्मीय संवेदनाओं को चित्रित करती एक मर्मस्पर्शी, भावुक कहानी है। कथाकार ने इस कहानी में पारिवारिक आत्मीय संबंधों के बेगानेपन और पारिवारिक संबंधों की धड़कन को बखूबी उभारा है। आर्थिक स्वतंत्रता की वजह से टूटते परिवार और दरकते रिश्ते वर्तमान समय की मुख्य समस्या है।
आर्थिक स्वार्थ मनीष को इतना अंधा कर देता है कि उसको कोई संबंध, कोई रिश्ता, कोई भावना महसूस नहीं होती। लेखिका ने आर्थिक परिवेश के दबाव को इस कहानी में स्वाभाविक रूप से निरूपित किया है। शीतल के संकल्प और विश्वास के जीत की कहानी है नई जिन्दगी।
सिन्दूर की कीमत कहानी की केंद्र और मुख्य पात्र श्रेया है, वह अत्यंत सूझ-बूझ वाली शिक्षित युवती है। वह युवतियों के लिए एक प्रेरक मिसाल है। श्रेया अपनी एक अलग अस्मिता बनाती है। इस कहानी में पुरूष सत्तात्मक समाज के शोषण के प्रति श्रेया का विद्रोही स्वर सुनाई पड़ता है। वह दहेजप्रथा जैसी सामाजिक कुरूतियों व रूढ़ियों के विरूद्ध अपनी आवाज बुलंद करती है।
स्त्री संघर्ष और स्त्रीमन की पीड़ा को बहुत बारीकी के साथ उठाया इस संग्रह की शीर्षक कहानी माँ की ममता में। कहानीकार इस कहानी में संगीता की मनोदशा की आतंरिक तह तक जाती है। समाज की जर्जर मान्यताओं ने स्त्रियों का किस तरह    शोषण किया है, लेखिका ने इस शोषण को माँ की ममता में बहुत प्रभावी रूप से उजागर किया है।
लेखिका ने एक महत्वपूर्ण विषय को उठाया है कहानी नाजायज में। इस कहानी में कथाकार ने बालक की मन स्थिति और उसके मनोविज्ञान का चित्रण सफलतापूर्वक किया है। माँ मर गई कहानी कथाकार की पैनी लेखकीय दृष्टि तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव का जीवंत सबूत है। इस कहानी में द्रोपदी के लम्पट पति की कारस्तानियों और नारी उत्पीड़न की सूक्ष्मता से पड़ताल की गई है। इस कहानी की नायिका द्रोपदी एक दलित स्त्री है जो अन्याय, अत्याचार और शोषण का विरोध नहीं करती है। यह कहानी दलित स्त्री विमर्श पर एक नई बहस को जन्म देती है।
नन्हा अंकुर इस संग्रह की महत्वपूर्ण कहानी है। इस कहानी का कैनवास बेहतरीन है। यह एक नियतिवादी कहानी है। परिस्थिति व्यक्ति को किस तरह के दिन दिखाती है लेकिन कहानी का अंत सुखद है। नन्हा अंकुर कहानी का एक अंश यहाँ दृष्टव्य है – आज अंकुर में अपने भाई तरूण की छवि देखकर श्यामली ने उसे छाती से लगा लिया और इस बात का दृढ़ निश्चय किया कि वह इस “नन्हे अंकुर” को पल्लवित और पुष्पित कर एक विशाल वटवृक्ष बनायेगी, जो आगे जाकर अनेक बेसहारों को सहारा प्रदान करेगा और अनेक पंछियों को आश्रय ! ये वाक्य अनाथ और बेसहारा बच्चों के दर्द को बयाँ करने के लिए पर्याप्त है।
चर्चा का विषय, मुक्ति, तवायफ का सच इत्यादि कहानियों में शोषित नारी के दर्द को बेपर्दा करते हुए उनके संघर्ष, सहनशीलता और साहस को चित्रित किया है। इस संग्रह की अन्य कहानियाँ परित्यक्ता,  संशय के बादल, कान्वेण्ट का बुखार, आतंकवाद की भेंट मन को छूकर उसके मर्म से पहचान करा जाती हैं।
इस संकलन की कहानियों में लेखिका का सामाजिक सरोकार स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। इनकी कहानियों में समाज के यथार्थ की अभिव्यक्ति है। इस संग्रह की कहानियां हमारे आज के समय का दर्पण है। प्रत्येक कहानी आँखों के सामने घटना का सजीव चित्र खड़ा कर देती है।
कथाकार इन कहानियों में मन के भीतरी तहों में संजोए सच को कहानियों में अभिव्यक्त कर देती है। कहानियों के कथ्यों में विविधता हैं। लेखिका की कहानियाँ समाज के ज्वलंत मुद्दों से मुठभेड़ करती है और उस समस्या का समाधान भी प्रस्तुत करती है।
कहानियों में लेखिका नैतिक मूल्यों में हो रहे ह्रास के प्रति चिंतित दिखती है। इस कहानी संग्रह को पढ़कर लेखिका के मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था, उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है। सहज और स्पष्ट संवाद, घटनाओं का सजीव चित्रण इस संकलन की कहानियों में दिखाई देता हैं। सरिता सुराणा की कहानियों में नारी पात्र के विविध रूप चित्रित हुए हैं।
सरिता जी की नारी पात्र भावुक, स्नेहमयी, संयमी, श्रद्धा-त्याग की मूर्ति, उदार है। इस संकलन की अधिकाँश कहानियों के स्त्री पात्र विपरीत समय आने पर चुनौतियों का सामना करनेवाली सशक्त नारी के रूप में दिखाई देते हैं। सरिता जी की कहानियों के स्त्री चरित्र स्वयं निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं और अन्याय व शोषण के विरूद्ध नारी मुक्ति के संदेशवाहक भी हैं। संग्रह की कहानियाँ पाठक को बांधे रखती हैं। आशा है कि सरिता सुराणा के इस प्रथम कहानी संग्रह माँ की ममता का हिन्दी साहित्य जगत में भरपूर स्वागत होगा।
पुस्तक  : माँ की ममता
लेखिका  : सरिता सुराणा
प्रकाशक : सरिता सुराणा, संजीवय्या हाउसिंग सोसायटी, प्लाट नंबर 33, फर्स्ट फ्लोर, ताडबंद हनुमान मंदिर के सामने, सिख विलेज, सिकन्दराबाद – 500009 हैदराबाद
मूल्य   : 200 रूपए
पेज    : 106
समीक्षक : दीपक गिरकर 

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