“दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया,
तुझसे भी दिलफ़रेब हैं गम रोजगार के”
तो साहिबान, भले ही पुराने जमाने में लड़ाइयां तख्तोताज के लिये हुआ करती थीं, बाद के दौर में लड़ाइयों को जर,जोरू,जमीन के इर्द-गिर्द परिभाषित करने की कोशिश की गई। लेकिन अब बदलते दौर में भले ही लड़के-लड़की की शिक्षा का पैटर्न एक जैसा हो गया हो मगर आज भी लड़कों के जीवन की सबसे बड़ी समस्या रोज़गार ही है । भारत के हर घर में लड़का मां-बाप के यही ताने सुनते हुए जवान होता है कि “कुछ पढ़-लिख ले, नहीं तो कौन तुझे नौकरी देगा। और अगर नौकरी नहीं मिली तो कौन तुझसे अपनी लड़की ब्याहेगा”।
लब्बोलुबाब यह हुआ कि भारत में युवकों की सारी खुशियों की चाबी एक अदद नौकरी में छिपी होती है। ऐसे ही मां-बाप के तानों को सुनकर बड़ा हुआ एक युवक नौकरी की तलाश में इंटरव्यू के लिये गया। चूंकि युवक उच्च शिक्षा प्राप्त था, इसलिये खुद को ‘लाखों में एक’ समझता था। सो बहुत आत्मविश्वास से एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में इंटरव्यू देने पहुंचा।
सामने बैठे इंटरव्यू लेने वाले एच आर ने उससे पूछा –
आपने इस जॉब के लिये क्यों एप्लाई किया ?
युवक –
मैंने और भी नौकरियों के लिये एप्लाई किया है। तो साथ में इस जॉब के लिये भी कर दिया। एप्लाई करने के बाद आपने इंटरव्यू के लिये बुला लिया तो मैं आ गया। सो सिंपल।
एचआर- आप इस कम्पनी के लिये क्यों काम करना चाहते हैं ?
युवक- मुझे जहाँ कहीं भी जॉब मिले वहाँ तो जॉब करना ही है किसी न किसी कम्पनी में। जॉब मिलते ही मेरे सारे काम बन जाएंगे। पूरी लाइफ सेट हो जाएगी। मुझे मतलब जॉब से है फिर वह चाहे इस कम्पनी में हो या किसी और कम्पनी में। मेरे लिये जॉब मैटर करता है कोई खास कम्पनी नहीं ।
एच आर – आप ये बताएं कि मुझे ये नौकरी आपको ही क्यों देनी चाहिए ?
युवक- वेरी सिम्पल, यह नौकरी आपको किसी न किसी को तो देनी ही है। फिर मुझे ही दे दें । इसमें आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिये?
एच आर को यह उत्तर थोड़ा अटपटा लगा कि यह युवक नौकरी के लिये बहुत जरूरतमंद भी है और नौकरी देने वाले को हल्के में ले रहा है। जबकि इसे तो झूठ बोलकर बड़े-बड़े दावे करते हुए एच आर से रिक्वेस्ट करके नौकरी मांगनी चाहिये। एच आर ने सोचा कि इस युवक के विचारों और इरादों की थोड़ी और थाह ली जाए।
एच आर- आप कम्पनी में किस प्रकार से काम करेंगें, कैसी परफार्मेंस करने का इरादा रखते हैं आप ?
युवक- अब जिस दिन जैसा मूड, मौसम और माइंडसेट होगा उसी हिसाब से मैं परफ़ोर्म करने का इरादा करूंगा।
एच आर -आप जानते हैं कि आपकी सबसे बड़ी स्ट्रेंथ क्या है ?
युवक – हाँ क्यों नहीं जानता अपनी स्ट्रेंथ। मैं जॉब के लिये एप्लाई कर ही देता हूँ कम्पनी चाहे ब्लू चिप हो या दिवालिया हो जाने वाली हो। मेरा फ़ोकस और मतलब अपनी सेलरी से होगा सिर्फ़ कम्पनी के लेवल से नहीं।
एच आर उसके रूखे जवाब सुनकर भन्ना गया। उसने सोचा कि यह कैसे खरे जवाब दे रहा है एच आर को, जबकि इंटरव्यू में तो कैंडिडेट, एच आर की चापलूसी पर उतर आते हैं; ताकि उनको जॉब मिल सके। एच आर ने सोचा कि अब क्यों न युवक को कायदे से रोस्ट किया जाए मगर मखमली शब्दों से।
एच आर – आपकी सबसे बड़ी कमजोरी क्या है या आपको सबसे बुरा क्या लगता है?
युवक- जब मेरिट, नौकरी में, मैं किसी लेडी से पिछड़ जाता हूँ। लड़कों से पिछड़ जाना तो मेरे लिये रोज़मर्रा की बात रही है ।
एच आर – आपकी सबसे बड़ी मिस्टेक क्या थी और उससे आपने क्या सबक लिया?
युवक- मेरी सबसे बड़ी मिस्टेक यह थी कि मैंने जो पिछली नौकरी ज्वाइन की थी, उसे छोड़ दिया, कार्पोरेट वर्ल्ड में किसी कम्पनी में तबतक नौकरी नहीं छोड़नी चाहिए जबतक कि कंपनी खुद ही कैंडीडेट को निकालने पर आमादा न हो जाये।
एच आर जान गया कि यह अब पूरी तरह न सिर्फ बेरोज़गार है बल्कि जरूरतमंद भी है । उसने सोचा कि अब इस कैंडीडेट को जॉब पर रखने के बारे में सोचा जाए।
एचक्षआर– आपकी पिछली नौकरी में सबसे ख़ास बात क्या थी? मेरा मतलब है कि वहाँ पर आपने कोई ख़ास काम तो किया ही होगा अगर इतने दिन जॉब किया है तो।
युवक- अगर मैंने कुछ खास किया होता तो आज यहां जॉब तलाशने नहीं आता। कॉमन सेंस की बात है कि अगर पिछली कम्पनी में कुछ ख़ास होता तो मैं उसे छोड़ता ही क्यों ?
एच आर- कॉर्पोरेट वर्ल्ड में जॉब से जुड़ा कौन सा सबसे बड़ा चैलेंज आपने फेस किया और उससे कैसे निकले।
युवक- सबसे बड़ा चैलेंज तो यही है कि आपकी इस बात का जवाब देना, कि आप यह जॉब क्यों करना चाहते हैं? और अब मैं सोच रहा हूँ कि अब इस चैलेंज को पार कैसे करूं। क्या जवाब दूं आपको?
सवाल के जवाब में सवाल सुनकर एच आर परेशान हो गया। अब तो उसे सवालों के जवाब लेने की आदत रही थी, अब उसके सवालों पर उसी से सवाल दागे जा रहे थे। कुछ देर तक चुप रहने और विचार करने के बाद एच आर ने इंटरव्यू को आगे बढ़ाने का निर्णय किया।
एच आर -आपने अपना लास्ट जॉब क्यों छोड़ा?
युवक- उसी वजह से जिस वजह से आपने अपना लास्ट जॉब छोड़ा। वेरी सिम्पल, आई वांट मोर मनी।
एच आर- आपकी इस कम्पनी से क्या उम्मीदें हैं ?
युवक- यही कि कोई ख़ास काम मुझसे न लिया जाए मगर पेमेंट ख़ास समझ कर किया जाए।
एच आर- आपके कैरियर के क्या गोल हैं और आप उन्हें कैसे एचीव करेंगे?
युवक- मेरे कैरियर का एक ही गोल है कि ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाना। इसके लिये हमेशा नई कम्पनियों में ज्यादा सेलरी के लिये एप्लाई करते रहना और जैसे ही ज़्यादा सेलरी वाली कम्पनी में जॉब कन्फर्म हो जाये, तुरंत पुरानी कंपनी को छोड़कर नई कम्पनी को ज्वाइन कर लेना।
एच आर- आप हमारी कंपनी के वर्क कल्चर के बारे में क्या जानते हैं ?
युवक- मैंने आपकी कम्पनी की वेबसाइट ठीक से पढ़ ली है और मैं यह जनता हूँ कि जो कम्पनी अपने यहां के वर्क कल्चर को वेबसाइट पर जितना ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड लिखती है वह कम्पनी उतना ही अंदर से डिसऑर्गेनाइज्ड होती है, सो वर्क और वर्क कल्चर तो मैं समझ ही गया।
एच आर- कितनी सेलरी की उम्मीद करते हैं ।
युवक- अब पुरानी सेलरी से ज़्यादा कमाने के लिये ही तो वो जॉब मैंने छोड़ा था। तो लास्ट सेलरी पर काम करने की तो सोचिए ही मत। मेरी लॉस्ट सेलरी का कम से कम 20 परसेंट हाइक तो होना ही चाहिए। मैं जानता हूँ कि एच आर बार्गेनिंग तो करते ही हैं। इसलिये मैं 30 परसेंट ज्यादा सेलरी पर काम करने को तैयार हूँ। आप एच आर हैं आप भी अपना काम कर लीजिए सो बार्गेनिंग करके 10 परसेंट कम करवा लीजिए। मलतब लास्ट सेलरी के 20 परसेंट हाइक पर यह जॉब डन हुआ ना। कब दे रहे हैं मेरा अपॉइंटमेंट लेटर ?
यह कहकर एच आर को युवक प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगा।
एच आर सकपका गया उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि वह युवक से क्या कहे? जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने हाथ के इशारे से युवक को इंतजार करने को कहा और उठकर केबिन के अंदर बने एक दूसरे केबिन में चला गया ताकि अपने असहज मनोभाव और तनाव उस युवक से छुपा सके।
दूसरी तरफ़ एच आर की मनोदशा देखकर युवक कॉन्फिडेंट हो गया कि यह जॉब उसे ही मिलेगी और एचआर उसका एपाइंटमेट लेटर बनवाने ही अंदर गया है। इसीलिए एच आर ने उसे इंतजार करने को कहा है ।
युवक प्रसन्नता से उठकर केबिन से लाउंज में आ गया। वहाँ पर सुट्टा ब्रेक चल रहा था। वहाँ पर उसने एक दूसरे युवक से उसकी आधी पी हुई सिगरेट मांग ली और लंबे-लंबे कश लगाने लगा। पीछे कहीं किशोर कुमार की अभिनीत नौकरी फ़िल्म में किशोर कुमार का ही गाया हुआ गाना बज रहा था-
“एक छोटी सी नौकरी का तलबगार हूँ मैं,
तुमसे कुछ और भी मांगू तो गनाहगर हूँ मैं”।
नौकरी पर केंद्रित एक चुटिला व्यंग्य।
दिलीप जी!
आपका व्यंग्य पढ़ा। खासा मजेदार है।
काफी अच्छा इंटरव्यू रहा। ग़म-ए-रोज़गार काफी तकलीफदेह है।
सच है लड़कों के लिये नौकरी के साथ छोकरी भी जुड़ी।आजकल की नौकरी के यही तेवर हैं। पर आजकल कंपनियाँ भी चतुर हो गई हैं ।10000 हजार में रखेंगी एक साल बाद भारी इन्क्रीमेंट के लालच के साथ और,एक वर्ष के होते ही जय श्री राम करके टाटा । फिर किसी नए बंदे को 10000 में रख लेंगे। हमारी बड़ी बहू भी इंदौर लॉ कॉलेज में एच आर है हमने यह शेअर किया कि उसका अनुभव बढ़ जाए सोचकर
बढ़िया व्यंग्य के लिये बधाई।
बहुत मज़ेदार व्यंग्य ,लगता है इन संवादों के साथ यात्रा की है ।
बधाई