Wednesday, March 25, 2026
होमव्यंग्यदिलीप कुमार का व्यंग्य - संपूर्ण समाधान

दिलीप कुमार का व्यंग्य – संपूर्ण समाधान

देश में स्टार्टअप की धूम मची हुई है। हर कोई स्टार्टअप कर रहा है। नौकरी का आकर्षण अब उतार पर है। हाल ही में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारत के राष्ट्रीय खेल हाकी की टीम पदक जीत कर लौटी थी। भीड़ थोड़ा – बहुत उन खिलाडियों से मिल -जुल रही थी और उन्हें तवज्जो भी दे रही थी। खिलाडियों को देश के लिए मेडल जीतने पर गर्व की अनुभूति हो रही थी।तब तक उसी जगह पर डाली चायवाला नाम की मीडिया हस्ती का आगमन हुआ। स्टार्टअप की मिसाल बने और मीडिया की सनसनी बन चुके डाली चायवाला के पीछे सारी भीड़ चली गई। अचानक हुई इस घटना से विजेता हाकी टीम के खिलाडी हक्के -बक्के रह गए। देश के राष्ट्रीय खेल के पदक विजेताओं पर चाय का स्टार्ट अप करने वाला भारी पड़ा। स्टार्टअप का यह जलवा देख कर मुझे भी स्टार्टअप करने की सूझी। 
काफी सोच -विचार कर मैंने पॉलिटिक्स का स्टार्टअप करने का सोचा। क्योंकि इस देश में हमेशा तो चुनाव होते रहते हैं और पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के लोग राजनीति में चुनाव के दरम्यान स्टार्टअप का सहारा लेते हैं। भारत में अगर कोई कुछ सोचता है और उसे अपनी सोच का लोहा मनवाना है तो यूट्यूब से बेहतर कोई भी प्लेटफार्म नहीं है। यही सब सोचकर मैंने भी राजनीति का स्टार्टअप कर ही दिया। काफी मोल -भाव के बाद एक यूट्यूबर मुझे मिला। स्टार्टअप करने वाले और यूट्यूब चलाने वालों को एक दूसरे की जरूरत पड़ती ही रहती है। दोनों को इस तरह से अपना प्रचार करना होता है कि प्रचार ना लगे।  तो यूँ बनाये गए कैमरे के सामने यूट्यूब वाले और स्टार्टअप करने वाले के सवाल – जवाब।
यूट्यूबर – आप अपने बारे में कुछ बताएं?
बिज़नेस मैन – देखिये जी, हर स्टार्ट अप की रीढ़ होते हैं एंजल इंवेस्टर, सो निकल पड़े हम भी ऐसे एंजल इंवेस्टर की तलाश में। अपने स्टार्ट अप का नाम रखा हमने संपूर्ण समाधान। पहले तो मैं इसका नाम वन स्टॉप शाप रखना चाहता था। मगर राजनीति को सीधे -सीधे बिजनेस स्टार्ट अप का नाम देना उचित नहीं लगता। इससे जन भावनाएं आहत हो सकती थीं और जन सेवा की बात करके राजनीति में आने वाले लोगों को झटका लग सकता था।
यूट्यूबर – वैसे भी भारतवर्ष में राजनीति को लाभ कमाने का नहीं अपितु सेवा करने का माध्यम माना गया है।  पर आप तो अर्थ का अनर्थ करने की बात कर रहे हैं।
बिजनेसमैन – इसी पिछड़ी सोच को तो दूर करना है। आप सिंगापुर, अमेरिका जैसे विकसित देशों को देखिये। वहाँ जिसका जितना बड़ा बिजनेस उसका राजनीति में कद भी उतना ही बड़ा।साउथ एशिया के नेताओं को कितनी भी सुविधा दे दी जाए तो वो सब जनसेवा हेतु साधन ही माने जाते हैं। मुझमें सेवा करने की ना तो कूवत थी और ना ही हैसियत ।सो मैंने राजनीति से जुड़ी चीजों का व्यापार करने का निश्चय किया। चुनाव जीतने के लिए कैंडिडेट को कितनी चीजें जुटानी पड़ती है और कितनी ज्यादा समस्यायों का सामना करना पड़ता है ? अगर ऐसा हो जाए कि प्रत्याशी को सारी समस्याओं का उपाय एक ही स्थान पर कर दिया जाए तो, प्रत्याशी को उसकी समस्या का संपूर्ण समाधान मिल जाया करेगा। वैसे भी प्रत्याशी को इस बात से काफी सहूलियत मिल जाया करेगी। 
यूट्यूबर -तो आप इसमें नया और अनूठा क्या करने वाले हैं  ? 
 बिजनेसमैन – इसके लिए मैंने सबसे पहले प्रिंटिंग प्रेस वालों से करार किया। शहर के छोटे -मझोले प्रिंटिंग प्रेस सभी से बात कर ली और उन्हें एडवांस भी दिया। रैली के आयोजकों को पोस्टर और बैनर लगवाने के अलग से और चार्ज देने पड़ते हैं। प्रिंटिंग प्रेस वालों ने मुझसे वादा किया है कि जिले में चाहे जिस जगह चाहे जिस नेता की रैली हो, वो बैनर -पोस्टर का आर्डर मेरे जरिये ही पूरा करेंगे। 
इसके बाद मैंने लाईट, माइक वालों से संपर्क किया। फैंटम फिल्म देख कर तमाम नेता सहम गए थे कि माइक से ही नेताओं को उनके दुश्मन नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए माइक को लेकर सुरक्षा सर्वोपरि है। मैंने माईक वाले से अनुबंध करके उसका सेफ्टी ऑडिट कर लिया। उससे कौल -करार भी कर लिया कि उसका माईक मेरे लोगों के सामने ही लगाया जायेगा। इस बात की तसल्ली बख्श और लिखित गारन्टी मेरी कम्पनी ने जारी कर दी है कि माईक पूरी तरह से सुरक्षित है नेताजी निश्चिंत होकर निर्बाध भाषण दें। 
यूट्यूबर – नेताओं की रैली में भीड़ दिन -ब -दिन कम होती जा रही है। आप इस समस्या से कैसे उबरेंगे? 
बिजनेसमैन -अब चुनाव के दौरान सबसे बड़ा सवाल भीड़ का तो रहता ही है। जितना बड़ा नेता उतनी ही ज्यादा भीड़ चाहिए। भीड़ जुटाने के लिए जो फिल्म स्टार बुलाये जाते हैं वह बहुत ही ज्यादा फीस चार्ज करते हैं। हम उन फिल्म वालों के मुकाबले काफी कम फीस लेते हैं और काफी ज्यादा भीड़ जुटाते हैं। आखिर भीड़ से ही तो माहौल बनता है।इसी भीड़ को लाने के लिए ही तो मैंने बेरोजगार युवक -युवतियों और अकुशल श्रमिकों का पंजीकरण करके उनसे अनुबंध कर लिया है। 
यूट्यूबर – तमाम लोग पैसा लेकर भी रैली में नहीं आते या विपक्षी की रैली में चले जाते हैं। आप इस समस्या से कैसे निबटेंगे?
बिजनेमैन – देखिये हमने सभी को कुछ-ना- कुछ एडवांस देकर उनसे ये अनुबंध भी करवा लिया कि सारे भुगतान चुनाव के बाद ही होंगे। क्योंकि अगर ये पता चला कि मुझसे एडवांस लेने के बाद अगर ऐन मौके पर किसी दूसरे से पैसा लेकर बंदा दूसरी रैली में चला गया तो उसका सारा भुगतान लैप्स कर दिया जायेगा। 
यूट्यूबर – हूटिंग या वाह – वाह करने के लिए क्या कोई खास इंतजाम रहते हैं।
बिजनेमैन  – अच्छी बात पूछी आपने।ये हमारे क्राउड मैनेजमेंट की  सबसे स्पेशल सर्विस रहेगी।पर यह एक किस्म की प्रीमियम सर्विस रहा करेगी। किस्म किस्म की भीड़,तो किस्मकिस्म के इंतजाम। आफ सीजन में कव्वाली  का में गद्दा लगाना पड़ता है उसकी एलीट क्राउड का अलग से चार्ज।  देसी टाइप के कवि सम्मेलन का अलग मगर रियायती चार्ज।टेंट- कुर्सी लगवाकर अपने लोगों से  दाद दिलवाने का एक्स्ट्रा चार्ज। अंडे, टमाटर के पैकेज मीटिंग के बाद तय होंगे जो कि सार्वजनिक नहीं किये जायेंगे। जितना बड़ा शायर, हूटिंग का चार्ज उतना ही ज्यादा। 
यूट्यूबर चुनाव के दौरान खाने पीने के ठेके आप किस हिसाब से तय करते हैं। मेरा मतलब भुगतान से है। 
 बिजनेसमैन देखिये साहब, हमारी कंपनी की पॉलिसी साफ है। खाने पीने के सामान की व्यवस्था तभी की जा सकेगी जब बुकिंग की सारी राशि एडवांस में जमा कर दी जाएक्योंकि चुनाव के बाद खानेपीने के पैसे का भुगतान कोई नहीं करता। हारने वाला कहता है कि नहीं दे पाएंगे और जीतने वाला कहता है कि तुम्हे कहीं इससे ज्यादा कमवा दूंगा।अनुभवी लोग बताते हैं ज्यादा तगादा करने पर कम्पनी ही बंद करवाने की शुरुआत कर दी जाती है। 
यूट्यूबर सुना है कोई स्पेशल पैकेज भी आफर करती है आपकी कम्पनी मगर सिर्फ कुछ वीआईपी लोगों को ही। 
बिजनेसमैन- जी सही सुना है आपने। यह हमारी प्रीमीयम और एक्सक्लूसिव सर्विस है।  इसमें हमारे पास साड़ी, मुर्गा और दारू बाँटने के विशेष पैकेज उपलब्ध हैं। दारूबंदी वाले राज्य में हम स्वयं दारू नहीं बांटते। पर कैसे बांटते हैं ये हमारा ट्रेड सीक्रेट है जो हम कैमरा पर नहीं बता सकते। 
यूट्यूबर पर आप राजनीति जैसे जनसेवा के कार्य को उद्योग क्यों घोषित करवाना चाहते हैं। 
 बिजनेसमैन – जी मेरा तो यही सोचना है कि नेतागीरी को बाकायदा उद्योग घोषित कर ही देना चाहिए। इससे लोगों के मन में नेताओं के प्रति कटुता में भी कमी आएगी। जब भी कोई नेता भ्रमण पर आएगा तो लोग उसे अनावश्यक समझकर ये सोचेंगे कि नेताजी नहीं रहे हैं बल्कि रोजगार रहा है। और तो और
उद्यमी  नया स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं  और अपने विज्ञापन में चोरी छिपे नहीं बल्कि सीना ठोंक कर लिखवा सकते हैं कि
हमारे यहां नेताओं के स्वागत की समस्त सामग्री उपलब्ध है 
या  फिर  “नेता के स्वागत की सम्पूर्ण व्यवस्था उचित दरों पर कराई जाती है 
या फिरहमारे स्वागत से यदि नेता खुश हो तो संपूर्ण पैसे वापस 
या फिर “हमारे यहाँ राजनीति से जुड़ी हर समस्या के संपूर्ण समाधान की गारन्टी दी जाती है। 
और हाँ “एक बार सेवा का अवसर अवश्य दें”। 
यूट्यूब का सेशन समाप्त हो चुका था। यूट्यूबर और बिजनेसमैन एक दूसरे को देख कर मुस्करा रहे थे। 


RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest