Tuesday, May 28, 2024
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अंजू खरबंदा की लघुकथा – होम ! हैप्पी होम

एक दिन नेहा बच्चों को पढ़ा रही थी । एक कविता में दादा दादी नाना नानी की बात आई । रैनेसां ने नेहा की ओर प्रश्न सूचक निगाहों से देखते हुए कहा – “मम्मा घर में दादा दादी की फोटो तो है पर नाना नानी की क्यों नहीं !”
उसकी बात सुनकर रोहन जोर-जोर से हँसने लगा और बोला – “बुद्धु तुझे इतना भी नही पता ! ये घर तो पापा का है न … तो पापा के मम्मी पापा की फोटो ही तो लगेगी न ! क्यूं पापा !”
पास ही बैठे पति देव ने नेहा की ओर देखते हुए कहा – “जितना ये घर मेरा है उतना ही तुम्हारी मम्मी का ।”
इतना कहकर वे उठकर जाने लगे । नेहा ने पूछा- “कहाँ चल दिए एकदम से ।”
“बच्चों का सवाल वाजिब है तो जवाब भी तो वाजिब ही होना चाहिए न ! तुम मम्मी पापा की अच्छी सी फोटो निकाल दो, मैं आज ही फ्रेम करवा कर लाता हूँ ।”
अंजू खरबंदा
अंजू खरबंदा
संपर्क - anjukharbanda401@gmail.com
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