Sunday, July 21, 2024
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रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – किसकी किस्मत !

घर में शादी की धूमधाम मची थी, तीसरे दिन बारात जानी थी। सुबह जब सब उठे तो नीलेश के पापा सीढियों के नीचे मृत पड़े थे।
घर में कोहराम मच गया। जितने मुँह उतनी बातें।
“लड़की के पैर अच्छे नहीं है, शादी तोड़ दें।”
“लड़की मनहूस है।”
“आ जायेगी तो पता नहीं क्या हो?”
      नीलेश की माँ कम पढ़ी लिखी जरूर थीं, सबकी बात सुनती रहीं कि अचानक बोली – “शादी तो अब उसी लड़की से होगी, जिससे ये तय करके गये हैं। जब मेरे सात बच्चों की किस्मत उनको बचा नहीं पाई तो एक की किस्मत से कैसे अनहोनी हो सकती है ?”
सारे मुँह बंद हो गये।
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