ऊषा भदौरिया की लघुकथा - बढ़ते कदम 3
  • ऊषा भदौरिया

“वन टू थ्री एंड गो …..” और उसके गो कहते ही चल पड़ी थीं, दुनिया की चुनिंदा सुपर बेस्ट मॉडल्ज़ …..
तालियों की गड़गड़हाट और तेज़ लाइट्स में वह कुछ पल … दिन और सालों पीछे चली गयी थी ।
“यू और सो ब्यूटिफ़ुल एंड स्मार्ट टू! मॉडलिंग में क्यूँ नहीं ट्राई करती ?” एक दिन मिरर में ख़ुद को निहारते हुए उसने एक बड़ा निर्णय ले लिया था।
नामुमकिन को मुमकिन करना ही उसका शुरू से पैशन था ।
इसके लिए किसी से भी लड़ जाती थी वह ।
पेरेंट्स के लाख विरोध के बाद भी उसने उनको मना लिया था और देखते ही देखते ऊँचाइयों को छू लिया था । पर जल्द ही वह बुरी तरह औंधे मुँह गिरी जब डॉक्टर ने उसका कैन्सर डिटेक्ट किया ।
इलाज के कठिन दौर से गुज़रते हुए उसने सब कुछ खो दिया…अपनी सुंदरता, लम्बे बाल, चमकती स्किन , ख़ूबसूरत नेल्ज़ और इनके साथ साथ उसने खोए अपने दोस्त ,अपनी शोहरत और अपने ख़्वाब !
“यू आर स्टिल सो ब्यूटिफ़ुल ..!” एक दिन मिरर ने ख़ुद ही उसको बोल दिया ।
और शुरू हुआ एक और जंग का एलान …..
उसके जैसी ही कैन्सर से लड़ती, सबके सामने से छुपती हुई, अपना आत्मविश्वास खो चुकी लड़कियों की तलाश और उनकी ख़ूबसूरती को दुनिया के सामने एक पहचान दिलाना ।
मुश्किल था सब कुछ गवाँ चुके, हारे हुए लोगों को फिर से ज़िंदगी की जंग के लिए तैयार करना!
आज उसकी लाइफ़ का सबसे बड़ा दिन था। लास्ट मॉडल के साथ उसने भी क़दम बढ़ा दिए स्टेज की ओर ।तालियों की गड़गड़हाट में उसे अपना  और अपनी जैसी  उन सभी लड़कियों का खोया सम्मान पुनः दिख रहा था।
उन सभी मॉडल्ज़ के सर पर बाल अभी भी नहीं थे पर चेहरे की चमक, हॉल की लाइट्स से ज़्यादा तेज़ थी।

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